इंजीनियरिंग का कमाल, बिना एक ईंट तोड़े 3 फीट उठाई धर्मशाला

Ashish Bhardwaj | Jun 20, 2026, 15:54 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में जैसलमेर के रामदेवरा में 18 हजार स्क्वायर फीट की नागौर धर्मशाला को बिना तोड़े जैक से 3 फीट ऊपर उठाया जा रहा है। 72 दिनों में 80 फीसदी काम पूरा। जिले में पहला मामला।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जैसलमेर के रामदेवरा में 18 हजार स्क्वायर फीट की धर्मशाला को बिना तोड़े 3 फीट ऊंचा किया जा रहा है।
  • हाइड्रोलिक जैक की मदद से भवन को सुरक्षित तरीके से ऊपर उठाने का काम चल रहा है।
  • हरियाणा की टीम पिछले 72 दिनों से लगातार दिन-रात इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।
  • अब तक करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है, शेष काम जल्द पूरा होने का लक्ष्य है।
  • जलभराव की समस्या से बचाने के लिए यह तकनीक अपनाई गई है, जो जिले में पहली बार इस्तेमाल हो रही है।

जैसलमेर के रामदेवरा में एक पूरी इमारत को बिना तोड़े ऊपर उठाया जा रहा है। 18 हजार स्क्वायर फीट में फैली नागौर धर्मशाला को जैक की मदद से करीब 3 फीट ऊंचा किया गया है। हरियाणा से आई टीम 72 दिनों से दिन-रात काम कर रही है। अब तक 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। जिले में इस तरह का यह पहला मामला है।



रामदेवरा में दिखा हैरतअंगेज नजारा

राजस्थान के जैसलमेर जिले का रामदेवरा कस्बा इन दिनों चर्चा में है। यहां एक दो मंजिला धर्मशाला को बिना एक ईंट तोड़े ऊपर उठाया जा रहा है। यह नजारा देखकर स्थानीय लोग हैरान हैं। सैकड़ों लोग रोज इस काम को देखने पहुंच रहे हैं।


नागौर धर्मशाला 18 हजार स्क्वायर फीट में बनी है। इसे जैक की मदद से करीब 3 फीट ऊंचा उठाया जा रहा है। पूरा भवन अपनी जगह पर है, बस उसकी ऊंचाई बढ़ाई जा रही है।



जलभराव से थे परेशान

इस अनोखे काम की जरूरत क्यों पड़ी, इसकी वजह भी दिलचस्प है। हर बरसात में धर्मशाला परिसर में पानी भर जाता था। भवन का लेवल आसपास की जमीन से नीचे था। इस वजह से बारिश का पानी सीधे अंदर घुस आता था।



श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी होती थी। भवन को तोड़कर दोबारा बनाना बेहद महंगा और समय लेने वाला काम था। इसीलिए जैक से भवन उठाने का फैसला किया गया।



हरियाणा की टीम ने संभाला मोर्चा

इस काम के लिए हरियाणा के इंजीनियर प्रवीण कुमार की अगुवाई में एक बड़ी टीम रामदेवरा गांव पहुंची। इस टीम में 80 से अधिक श्रमिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। करीब 72 दिनों से यह टीम बिना रुके काम कर रही है।



दिन हो या रात, काम लगातार जारी रहता है। अब तक 80 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। बाकी 20 फीसदी काम अगले 10 दिनों में पूरा होने का लक्ष्य है।



जैसलमेर में पहला मामला

बिना किसी बड़े नुकसान के इतनी बड़ी इमारत उठाना सचमुच बड़ी उपलब्धि है। इंजीनियर प्रवीण कुमार बताते हैं कि इस तकनीक से ईंट, पत्थर या किसी भी तरह के निर्माण वाले मकान को सुरक्षित तरीके से ऊंचा उठाया जा सकता है।



जैसलमेर जिले में इस तरह का यह पहला मामला है। रामदेवरा का यह काम इंजीनियरिंग कौशल की एक मिसाल बन गया है। यहां जो हो रहा है, वह आधुनिक तकनीक और कुशल कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है।



क्या होती है जैक लिफ्टिंग तकनीक

जैक लिफ्टिंग (Jack Lifting) तकनीक में पूरे भवन की नींव के नीचे हाइड्रोलिक या मैकेनिकल जैक लगाए जाते हैं। इन्हें एक साथ और एक जैसी गति से चलाया जाता है। इससे पूरा भवन धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से ऊपर उठता है।



यह काम बेहद सावधानी से होता है। जरा सी चूक से दीवारें दरक सकती हैं। इसीलिए अनुभवी इंजीनियर और प्रशिक्षित मजदूरों की जरूरत होती है।



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