रणथंभौर में पर्यटक वाहनों के बीच फंसा टाइगर, वन विभाग ने लिया 8 लोगो पर एक्शन
News In Short
- रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघ को घेरने का वीडियो वायरल हुआ।
- वन विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों और गाइडों पर प्रतिबंध लगाया।
- रणथंभौर में बाघ के रास्ते को पर्यटक वाहनों ने घेर लिया था।
- वन्यजीव विशेषज्ञों ने बाघ को घेरने की घटना को खतरनाक बताया।
- टाइगर रिजर्व में सुरक्षा चूक पर वन विभाग ने जांच शुरू की।
News In Detail
राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व फिर विवादों में है। इस बार मामला किसी फर्जी टिकट का नहीं है, बल्कि खुद वनराज यानि बाघ सुरक्षा में बड़ी चूक का है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो ने रणथंभौर वन प्रशासन की कार्यशैली और वन्यजीव संरक्षण के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
क्या है वायरल वीडियो
वायरल वीडियो रणथंभौर के जोन नंबर 3 (Zone 3) का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक बाघ जंगल में रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे आधा दर्जन से ज्यादा पर्यटक वाहनों ने चारों तरफ से घेर लिया है। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि बाघ को चहलकदमी करने तक की जगह नहीं मिल रही थी। बाघ वाहनों के बीच फंसा हुआ था और काफी बेबस नजर आ रहा था, जबकि वाहनों में सवार पर्यटक नियमों को नजरअंदाज कर उसकी तस्वीरें और सेल्फी ले रहे थे।
वन विभाग ने की कार्रवाई
वायरल वीडियो के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए। जांच के बाद, दोषी पाए गए चार वाहनों के चालकों और गाइडों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। वन विभाग ने इन व्यक्तियों पर टाइगर रिजर्व में प्रवेश पर आगामी आदेश तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
गाइडलाइनों का उल्लंघन
डीएफओ मानस सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइनों के मुताबिक सफारी के दौरान वाहनों और बाघ के बीच कम से कम 30 फीट की दूरी होनी चाहिए। संकरे रास्तों, घाटी या ढलान वाले इलाकों में यह दूरी 50 से 100 फीट तक होनी चाहिए। लेकिन रणथंभौर में कई बार गाइड और ड्राइवर इन नियमों को नजरअंदाज कर पर्यटकों को खुश करने के लिए बाघ को घेर लेते हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह बाघ को घेरना न केवल वन्यजीव संरक्षण के नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह जानलेवा भी हो सकता है। अगर बाघ को घेरने के दौरान भीड़ और शोर बढ़ जाए, तो बाघ उग्र हो सकता है। इससे सैलानियों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
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