रणथंभौर में बूढ़े और बीमार बाघों के लिए बनेगा अलग सफारी पार्क, सरकार को भेजा प्रस्ताव
News In Short
- रणथंभौर में बूढ़े और बीमार बाघों के लिए नया सफारी पार्क बनाए जाने का प्रस्ताव।
- बाघों की बढ़ती संख्या के कारण बाघों के बीच संघर्ष में कमी लाने की होगी कोशिश।
- आईओसी प्लांट की 100 बीघा जमीन के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव।
- यह सफारी पार्क बाघों की देखभाल में सुधार करेगा और रणथंभौर रिजर्व पर दबाव कम करेगा।
- इसे नाहरगढ़ और गिर के सफारी पार्क की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
News In Detail
Sawai Madhopur: राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या अब 76 के पार पहुंच गई है, जो कि इसकी क्षमता से कहीं बहुत अधिक है। इस बढ़ती आबादी ने न केवल बाघों के बीच टेरिटरी को लेकर संघर्ष बढ़ा दिया है, बल्कि वन विभाग के लिए भी चुनौती पैदा कर दी है। ऐसे में अब प्रशासन ने एक अनोखी पहल करते हुए सालों से बंद पड़े आईओसी प्लांट की जमीन पर बूढ़े और बीमार बाघों के लिए विशेष सफारी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
बाघों को मिलेगा नया आशियाना
करीब 23 साल से बंद पड़ा यह आईओसी प्लांट अब बाघों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे इस प्लांट की 100 बीघा जमीन के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की पहल पर तीन महीने पहले ही यह प्रस्ताव तैयार कर मंत्रालय को भेज दिया गया था।
प्लांट के आसपास घना जंगल
खास बात यह है कि यह प्लांट क्षेत्र पहले से ही बाघों के लिए उपयुक्त माहौल तैयार कर चुका है। चारों तरफ करीब आठ फीट ऊंची दीवार और लंबे समय से बंद रहने के कारण यहां प्राकृतिक जंगल विकसित हो चुका है। यानी बाघों को यहां आने के बाद नए माहौल में ढलने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
क्यों जरूरी है यह सफारी पार्क?
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की 2015 की स्टडी के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व के लिए 50 बाघों की संख्या सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन, मौजूदा समय में यह संख्या 76 से अधिक है, जिससे बाघों के बीच टेरिटरी को लेकर झड़पें आम हो गई हैं। कई बार तो बाघ जंगल से बाहर निकलकर इंसानी बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है।
नए प्रस्तावित सफारी पार्क में विशेष रूप से घायल, बीमार और बुजुर्ग बाघों को रखा जाएगा। इससे दो फायदे होंगे - एक तो इन बाघों की बेहतर देखभाल हो सकेगी और दूसरा मुख्य रिजर्व क्षेत्र पर दबाव कम होगा।
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