NCR प्लान 2041 मंजूरी के लिए तैयार, संरक्षित क्षेत्रों की मैपिंग अब भी बाकी
Jaipur: दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का रीजनल प्लान 2041 ड्राफ्ट मंजूरी के लिए तैयार है, लेकिन विडंबना यह है कि अभी तक प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों (NCZs) की मैपिंग नहीं हो पाई है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2018 से लगातार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद संरक्षण क्षेत्र की जमीनी हकीकत जांचने और उसकी सीमाएं तय करने का काम अभी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस प्लान पर बोर्ड की अगली बैठक (16 जून) में मंज़ूरी के लिए विचार होना है।
इतना ही नहीं, NCRPB ने पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार की उन बार-बार दी गई चेतावनियों को भी अनदेखा कर दिया है, जिनमें क्षेत्रीय योजनाओं (RPs) 2021 और 2041 के बीच भूमि उपयोग में आए बदलावों का तुलनात्मक डेटा शामिल करने को कहा गया था।
ग्राउंड हकीकत क्या है
यह सैटेलाइट तस्वीरों द्वारा दिखाए गए भूमि उपयोग और ज़मीनी हकीकत का मिलान करने और उसे सत्यापित करने की एक प्रक्रिया है, ताकि सटीक स्थिति का पता चल सके।
दशकों की देरी: प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों (NCZs) के फील्ड वेरिफिकेशन और सीमांकन में एक दशक से चली आ रही देरी नीति-निर्माण और योजना को सीधे प्रभावित करती है।
जवाबदेही तय करने में मुश्किल: स्पष्ट रूप से चिह्नित सीमाओं की कमी के कारण भूमि उपयोग के उल्लंघनों की पहचान करना और जवाबदेही तय करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
अरावली को बचाने के लिए जरूरी
अरावली के सिकुड़ने और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को को बचाने के लिए 2018 से 2022 के बीच जारी आदेशों में NGT ने 1999 और 2019 के बीच के बदलावों को जांचने के लिए 1:50,000 के पैमाने पर तुलनात्मक मैपिंग को कहा था।
ट्रिब्यूनल ने सितंबर 2020 में आदेश दिया था कि मैपिंग का वर्गीकरण इस तरह होना चाहिए कि प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्पष्ट रूप से दिखाई दें और ग्राउंड ट्रूथिंग पर पूरा ज़ोर दिया जाए।
छह साल बाद भी ड्राफ्ट पूरा नहीं
छह साल बाद भी संशोधित ड्राफ्ट RP-2041 केवल 2015-16 की सैटेलाइट इमेजरी पर आधारित ISRO के भुवन जियोपोर्टल पर निर्भर है। इसमें क्षेत्रफल, निर्देशांक (coordinates) या अतिक्रमण के संबंध में NCZs की कोई विस्तृत जानकारी नहीं है।
अप्रैल 2022 में NGT ने दोहराया था कि कम रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों में जो अरावली का सिकुड़ना और उल्लंघन दिखे हैं, उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।
फिर भी जो संशोधित ड्राफ्ट RP-2041 मंज़ूरी के लिए पेश है, वह केवल व्यापक दिशानिर्देश और NCZ क्षेत्रों का एक अस्थायी मानचित्र (tentative map) बनकर रह गया है।
डेटा का बड़ा अंतर
NCR का दायरा बढ़ा: जब से RP-2021 जारी हुआ है, तब से NCR का क्षेत्रफल 34,144 वर्ग किमी से 60% से अधिक बढ़कर 55,144 वर्ग किमी हो चुका है।
पूर्व पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, जब तक क्षेत्र-वार सटीक डेटा नहीं दिया जाता, तब तक राज्य-स्तरीय डेटा से भूमि-उपयोग के बदलावों का आकलन करना असंभव है।
जब NCRPB के सदस्य सचिव गुलज़ार नटराजन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, हमारी पर्यावरण मंत्रालय के साथ बैठकें हुई थीं। मेरी जानकारी में इस समय कुछ भी लंबित नहीं है। सीमाओं के उल्लंघन और केंद्रीय मैपिंग अभ्यास की कमी पर उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
वहीं, पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, आखिरकार, NCRPB शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, और अंततः यह मामला उनके और NRSC के बीच का है।
क्या है एनसीआर?
दिल्ली से आबादी का दबाव कम कर करने और आसपास के क्षत्र में व्यवस्थित विकास के लिए नेशनल कैपिटल रीजन बनाया गया। इसमें दिल्ली के अलावा हरियाणा, यूपी और राजस्थान का हिस्सा आता है।
फिलहाल, एनसीआर में तीन राज्यों के 24 जिलों को शामिल किया गया है। एनसीआर में राजस्थान से अलवर और भरतपुर को जोड़ा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट अपने मकसद में विफल रहा है। वजह साफ है कि एनसीआर में जितना विकास अपेक्षित था, वह नहीं हो पाया। अधिकारियों के सुस्त रवैये और गलत प्लानिंग से इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को काफी नुकसान हुआ।
FAQ
- NCR क्या है, इसमें कितना एरिया शामिल है?
दिल्ली में आबादी का दबाव कम करने और आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर घोषित किया है। दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान का कुछ हिस्सा NCR में आता है। फिलहाल तीन राज्यों के 24 जिले शामिल हैं। NCR में राजस्थान से अलवर और भरतपुर जिले आते हैं। - NCR रीजनल प्लान 2041 क्या है?
एनसीआर रीजनल प्लान 2041 भविष्य का एरिया नियोजन प्रस्ताव है। इसे वर्ष 2041 को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। दिक्कत यह है कि 2026 के इस ड्राफ्ट में प्राकृतिक संरक्षित एरिया 2015-16 की पुरानी सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर शामिल किया है। दरअसल, एनसीआर प्रोजेक्ट बोर्ड ने 2020 में NRSC के मैपिंग प्रस्ताव के लिए बजट देने से इनकार कर दिया था। NGT के 2018 से लगातार आदेशों के बावजूद फील्ड वेरिफिकेशन पूरी नहीं हुई। - NCZ मैपिंग न होने से क्या नुकसान है?
प्राकृतिक संरक्षित एरिया की नवीनतम सीमाएं नहीं होने से भूमि उपयोग के उल्लंघनों की पहचान और जवाबदेही तय करना मुश्किल है। अरावली क्षेत्र में अतिक्रमण होता रहा और कार्रवाई नहीं हो सकी। बिना सटीक डेटा के नीति-निर्माण और योजना दोनों प्रभावित होते हैं।
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