रितु बराला केस: पुलिस ने लिखकर दिया; नहीं कर सकते FIR, कांग्रेस का धरना खत्म, जाएंगे कोर्ट
कांग्रेस ने रितु बराला केस में अंतत: जयपुर पुलिस कमिश्नर लिखकर दे दिया कि रितु बराला ने दिल्ली के पुलिस थाने में घटना के संबंध में परिवाद दे रखा है इसलिए जयपुर पुलिस कानूनी रुप से जीरो FIR दर्ज नहीं कर सकती।इसके बाद कांग्रेस ने अपना धरना खत्म कर दिया।
बातचीत के बाद दिया लिखकर
एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला से कथित मारपीट और अभद्रता के मामले में जीरो FIR नहीं करने के मामले में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेता सोमवार की शाम से जयपुर पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में धरने पर बैठे थे।
पुलिस लगातार जीरो FIR दर्ज करने से इंकार कर रही थी। लेकिन,डोटासरा भी लगातार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) का हवाला देकर जीरो नंबर की FIR दर्ज करके दिल्ली के संबंधित थाने को भेजने की जिद्द पर अड़े थे।
उनका कहना था कि भारत में 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना किसी भी पुलिस थाने में दी जा सकती है, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो। इसमें क्षेत्राधिकार का सवाल ही नहीं उठता।
सुप्रीम कोर्ट फैसले का हवाला
डोटासरा ने वर्ष 2004 में Upkar Singh बनाम Ved Prakash मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि यदि एक पक्ष पहले FIR दर्ज करवा देता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरा पक्ष उसी घटना के बारे में अपनी शिकायत दर्ज नहीं करवा सकता। और कानून की भाषा में Counter-FIR यानी जवाबी FIR कहते हैं।
पुलिस कमिश्नर ने दिया लिखित में
बुधवार को सुबह करीब 10.30 पर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कांग्रेस नेताओं से बातचीत की। इसके बाद पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज नहीं करने का कारण लिखित में बताया।
दोपहर करीब 12:30 बजे पुलिस कमिश्नर ने डोटासरा को पत्र सौंपा। इसके बाद कांग्रेस नेता कमिश्नरेट में चल रहे धरने को खत्म करके बाहर निकल आए।
यह लिखा पुलिस ने
धरना खत्म करने के बाद प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने बताया कि पुलिस का कहना है कि रितु बराला व अन्य के खिलाफ पाबंदी के बावजूद धरना प्रदर्शन करने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। वहीं पर बराला ने भी अपने साथ मारपीट करने पर कांस्टेबल चंचल यादव,सोनिका व ज्योति के खिलाफ परिवाद दे दिया था। दिल्ली पुलिस मामले में जांच कर रही है। इसलिए जब दिल्ली पुलिस रितु की शिकायत पर जांच कर ही रही है तो जयपुर पुलिस उसी मामले में जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती।
पहले ही दिन लिखकर दे देते
धरना खत्म होने के बाद डोटासरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जयपुर पुलिस कानून की गलत व्याख्या कर रही है।
जबकि BNSS की धारा 173(1) स्पष्ट है कि पीड़ित कहीं भी एफआईआर करवा सकता है। पुलिस संज्ञेय अपराध होने पर एफआईआर जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज करके संबंधित पुलिस थाने को भेजने को बाध्य है।
डोटासरा ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को पता है कि जीरो एफआईआर नहीं हो सकती तो पुलिस ने पहले ही दिन लिखकर क्यों नहीं दिया ? यदि पुलिस पहले ही दिन यह लिखकर दे देती तो हमें तीन दिन तक रुकने की जरुरत ही नहीं होती।
उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को कोर्ट में लेकर जाएंगे और कानून की पालना नहीं करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ भी कार्यवाही की गुहार लगाएंगे।
मदन राठौड़ पर किया कटाक्ष
डोटासरा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हो सकता है कि उनके पाकिस्तानी प्रेम से जनता का ध्यान भटकाने के लिए दिल्ली के इशारे पर जानबूझकर कांग्रेस को धरने पर बैठने को मजबूर किया हो।
बेईमान अफसरों को पीटेगें ग्रामीण
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अब यह लड़ाई बड़ी हो गई है। जयपुर पुलिस कानून की गलत व्याख्या कर रही है। यदि कानून में प्रावधान नहीं है तो यही बात पुलिस ने दो दिन से लिखकर क्यों नहीं दी थी ?
इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि निकाय चुनाव के समान अफसरों ने पंचायत चुनाव भी बेईमानी की तो गांवों की जनता उन्हें पेड़ से बांधकर पीटेगी। इस बार किसी भी हाल में बेईमान अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।