RPSC पहली बार रिजल्ट से पहले जांचेगी डॉक्यूमेंट्स, डिप्टी कमांडेंट भर्ती में बिना योग्यता भरे थे फॉर्म, सभी 255 कैंडिडेट्स को बुलाया
News In Short
- RPSC ने बिना योग्यता वाले अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर करने के लिए बरती सख्ती।
- पहली बार रिजल्ट से पहले अभ्यर्थियों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का निर्णय लिया।
- डिप्टी कमांडेंट भर्ती 2025 में 10 हजार से अधिक आवेदन आए थे, केवल 255 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे।
- अयोग्य अभ्यर्थियों के कारण आयोग को 19 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा था।
- अब आयोग ने 255 अभ्यर्थियों को 15-20 अप्रैल के बीच डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया है।
News In Detail
Ajmer: राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। उसने पहली बार परीक्षा का रिजल्ट जारी करने और इंटरव्यू से पहले ही अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच करने का निर्णय लिया है। यह प्रयोग डिप्टी कमांडेंट भर्ती-2025 में देखने को मिल रहा है, जहां बिना योग्यता के बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने फॉर्म भर दिए थे और परीक्षा में भी शामिल हो गए थे। अब आयोग ने सख्ती बरतते हुए सभी 255 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया है, ताकि रिजल्ट आने से पहले ही अयोग्य उम्मीदवारों की छंटनी हो सके।
255 अभ्यर्थियों को पहुंचना होगा आयोग कार्यालय
आरपीएससी के सचिव (आईएएस) रामनिवास मेहता ने बताया कि डिप्टी कमांडेंट भर्ती की लिखित परीक्षा में शामिल हुए सभी 255 अभ्यर्थियों को 15 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 के बीच आयोग कार्यालय बुलाया गया है। इन अभ्यर्थियों को अपने मूल दस्तावेजों और सेल्फ अटेस्टेड प्रतियों के साथ उपस्थित होना होगा। इस वेरिफिकेशन के बाद ही लिखित परीक्षा का रिजल्ट जारी किया जाएगा और उसके बाद इंटरव्यू के माध्यम से अंतिम भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बिना योग्यता के भरे गए थे फॉर्म
यह पूरा मामला तब उछला, जब आयोग को पता चला कि डिप्टी कमांडेंट के मात्र 4 पदों के लिए निकली इस भर्ती में 10 हजार से अधिक आवेदन आ गए थे, जबकि इस भर्ती के लिए पात्रता बहुत सीमित थी। केवल सेना के कैप्टन स्तर के रिटायर्ड अधिकारी, त्यागपत्र देने वाले भूतपूर्व अधिकारी या इमरजेंसी और शॉर्ट सर्विस कमीशन से मुक्त/विमुक्त कैंडिडेट्स ही आवेदन कर सकते थे। इसके बावजूद बिना योग्यता वाले अभ्यर्थियों ने फॉर्म भर दिए और कई तो परीक्षा में भी शामिल हो गए।
आयोग ने सख्ती दिखाते हुए ऐसे अभ्यर्थियों को फॉर्म वापस लेने का मौका दिया और चेतावनी दी कि अगर उन्होंने फॉर्म वापस नहीं लिया तो भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 217 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद करीब 6 हजार अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन वापस ले लिए थे। फिर भी 4 हजार 221 अभ्यर्थी बचे रहे, जिनमें से अधिकांश योग्य नहीं थे। परीक्षा के दिन केवल 255 अभ्यर्थी ही परीक्षा केंद्र पर पहुंचे। यानी कुल बचे अभ्यर्थियों में से 10 प्रतिशत से भी कम ने परीक्षा दी।
अभ्यर्थियों को ये दस्तावेज लाने होंगे
आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि सभी अभ्यर्थियों को आयोग की वेबसाइट www.rpsc.rajasthan.gov.in से काउंसलिंग पत्र और विस्तृत आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा। आवेदन पत्र की दो प्रतियों में सभी प्रविष्टियां पूरी भरी जाएंगी। 50 रुपये के ऑनलाइन शुल्क भुगतान की रसीद साथ होगी। इसके साथ ही संबंधित शैक्षणिक दस्तावेज, कैप्टन पद से रिटायर्ड/सेवात्याग/एनओसी प्रमाण पत्र, पीपीओ (पेंशन आदेश), जाति, मूल-निवास और अन्य प्रमाण पत्र मांगे गए हैं। इन सभी की सेल्फ अटेस्टेड कॉपी और मूल दस्तावेज साथ लाने होंगे।
मार्च 2025 में निकली थी वैकेंसी, परीक्षा जनवरी 2026 में हुई
आरपीएससी ने 18 मार्च 2025 को गृह रक्षा विभाग में डिप्टी कमांडेंट के 4 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। ऑनलाइन आवेदन 24 मार्च से 22 अप्रैल 2025 तक मांगे गए थे। शुरुआत में 10 हजार से अधिक आवेदन आए, लेकिन विड्रॉ करने के बाद 4 हजार 221 अभ्यर्थी रह गए। इसकी लिखित परीक्षा 11 जनवरी 2026 को हुई, जिसमें मात्र 255 अभ्यर्थी ही शामिल हुए।
ईडब्ल्यूएस, सामान्य वर्ग और एमबीसी के लिए इस भर्ती में एक भी पद नहीं था, फिर भी इन श्रेणियों के अभ्यर्थियों ने बड़ी संख्या में आवेदन कर दिए थे। एसटी वर्ग के लिए मात्र एक पद था, लेकिन इसके लिए 791 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। इस वर्ग में एक्स-सर्विसमैन केवल एक ही था। एससी वर्ग के दो पद थे, लेकिन एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन डाल दिए, जबकि एक्स-सर्विसमैन सिर्फ तीन ही थे।
आयोग को खर्च करना पड़ा 19 लाख रुपये
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरपीएससी ने 4 हजार 221 अभ्यर्थियों को देखते हुए 17 परीक्षा केंद्र बनाने पड़े, जबकि यह परीक्षा मात्र एक केंद्र पर भी हो सकती थी। इसके अलावा, परीक्षा एक लाख रुपये के खर्च में हो सकती थी, लेकिन केंद्रों की अधिकता के कारण आयोग को 20 लाख रुपये खर्च करने पड़े। यानी बिना योग्यता वाले अभ्यर्थियों के कारण आयोग को अतिरिक्त 19 लाख रुपये का अनावश्यक खर्च उठाना पड़ा।
इंटरव्यू के बाद होता है वेरिफिकेशन
इन सब घटनाक्रमों के बाद आयोग पहली बार रिजल्ट जारी करने और इंटरव्यू से पहले ही अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच करेगा। इससे पहले आमतौर पर रिजल्ट के बाद या इंटरव्यू के समय डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होता था। इस बार आयोग ने अयोग्य अभ्यर्थियों को शुरू में ही बाहर करने की रणनीति अपनाई है, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी तरह की कानूनी पेचीदगी या विवाद न हो।
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