परीक्षा हॉल में ठप होंगे मोबाइल और ब्लूटूथ के सिग्नल, RSSB लगाएगा हाई-टेक जैमर
समझें क्या है पूरा मामला
- आरएसएसबी अब अपनी भर्ती परीक्षाओं में जैमर भी तैनात करेगा।
- शुरुआत 24 जुलाई को होने वाली महिला पर्यवेक्षक परीक्षा से।
- फिलहाल 20 परीक्षा केंद्रों में प्रयोग के रूप में लगेंगे जैमर।
- नकल के इरादे से लाए गए ब्लूटूथ, ईयरफोन या मोबाइल डैड हो जाएंगे।
Jaipur: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में नकल माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) ने एक और कदम उठाया है।
आरएसएसबी इसी 24 जुलाई को होने वाली महिला पर्यवेक्षक परीक्षा में हाई-टेक सिग्नल साइलेंसर जैमरतैनात करेगा। इससे परीक्षा हॉल में नकल के इरादे से लाए गए ब्लूटूथ, ईयरफोन या मोबाइल डैड हो जाएंगे।
20 केंद्रों से होगी पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
आरएसएसबी के अनुसार इसे पहले पायलट टेस्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। इसके लिए 20 परीक्षा केंद्रों का चयन किया गया है। इन्हें दो हिस्सों में बांटा गया है। 10 केंद्र शहरी क्षेत्रों में और 10 केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में होंगे।
बोर्ड का मानना है कि यद्यपि अभ्यर्थियों की गहन चेकिंग और बहुस्तरीय सुरक्षा जांच पहले से ही लागू हैं। फिर भी कोई अभ्यर्थी छोटा डिवाइस या ब्लूटूथ गैजेट परीक्षा हॉल में ले जाने सफल हो जाता है तो ये जैमर उन सभी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को पूरी तरह ठप कर देंगे। यानी गैजेट अंदर पहुंच भी गया तो भी वह केवल एक बेकार प्लास्टिक का टुकड़ा बनकर रह जाएगा।
बायोमेट्रिक से लेकर हैंडराइटिंग तक
आरएसएसबी ने कुछ वर्षों में नकलचियों और डमी कैंडिडेट्स को पकड़ने के लिए सुरक्षा के कई कड़े इंतजाम किए हैं:
बायोमेट्रिक और फेस स्कैनिंग: बोर्ड ने जनवरी 2025 से परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन और चेहरे की पहचान प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया था। इससे किसी दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले मुन्नाभाइयों पर लगाम लगी।
हैंडराइटिंग सैंपल: वर्ष 2024 से बोर्ड ने सुरक्षा जांच के समय सभी अभ्यर्थियों से लिखावट के नमूने लेना शुरू किया था, ताकि बाद में किसी भी प्रकार के संशय होने पर लिखावट का मिलान किया जा सके।
सेंटर्स और हॉलों की वीडियोग्राफी: परीक्षा केंद्रों में होने वाली निरंतर वीडियोग्राफी से यह सुनिश्चित हो चुका है कि यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान कोई संदिग्ध गतिविधि या नकल का प्रयास करता है, तो उसे बाद में भी आसानी से ट्रेस करके वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
क्या सभी परीक्षाओं में लगेंगे जैमर?
बोर्ड इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता पर पैनी नजर रख रहा है। अधिकारियों का फोकस यह जांचना है कि क्या ये जैमर मोबाइल नेटवर्क, ब्लूटूथ और वाई-फाई सिग्नलों को 100% ब्लॉक करने में सक्षम हैं या नहीं।
बोर्ड के अनुसार यदि यह नया प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है और सिग्नल ब्लॉकिंग प्रभावी साबित होती है, तो बोर्ड जल्द ही एक टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके बाद भविष्य में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में जैमर तकनीक को स्थायी रूप से लागू कर दिया जाएगा।
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