RTE लॉटरी के 50 दिन बाद भी 1.90 लाख बच्चे प्रवेश से वंचित, एडमिशन के लिए भटक रहे अभिभावक
News In Short
- 12 मार्च को लॉटरी निकलने के बावजूद प्रदेश के 1.90 लाख बच्चों का आरटीई प्रवेश अटका।
- इस वर्ष आरटीई के तहत कुल 6.25 लाख से अधिक छात्रों ने आवेदन किया था।
- निजी स्कूलों पर फीस पुनर्भरण की देरी का बहाना बनाकर प्रवेश से वंचित रखने का आरोप।
- संयुक्त अभिभावक संघ 7 मई को जयपुर में शिक्षा संकुल के बाहर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगा।
- शिक्षा विभाग के एसीएस ने प्रवेश न देने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश का सपना देख रहे हजारों मासूम का भविष्य अधर में लटका हुआ है। ऑनलाइन लॉटरी निकले 50 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के लगभग 1.90 लाख चयनित बच्चों को अब तक स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाया है। शिक्षा विभाग की सुस्ती और निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अब संयुक्त अभिभावक संघ ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। आगामी 7 मई को राजधानी जयपुर के शिक्षा संकुल पर प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
अधूरा प्रवेश
इस शैक्षणिक सत्र में आरटीई के तहत रिकॉर्ड आवेदन प्राप्त हुए थे। आंकड़ों के अनुसार कुल 6,25,146 छात्रों ने निःशुल्क शिक्षा के लिए फॉर्म भरा था। इनमें 3,29,165 बालक, 2,95,970 बालिकाएं और 11 ट्रांसजेंडर छात्र शामिल हैं। 12 मार्च को जारी ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से करीब सवा दो लाख बच्चों की प्राथमिकता सूची जारी की गई थी। लॉटरी के 50 दिन बाद भी 1.90 लाख बच्चे स्कूल की दहलीज लांघने का इंतजार कर रहे हैं।
फीस पुनर्भरण की फांस
अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल प्रबंधन RTE के तहत प्रवेश देने में जानबूझकर अड़ंगे लगा रहे हैं। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन के अनुसार, स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि राज्य सरकार की ओर से फीस पुनर्भरण (Reimbursement) का पैसा समय पर नहीं मिलता, जिसके कारण वे नए दाखिले देने से कतरा रहे हैं। स्कूलों की इस फीस पॉलिटिक्स में मासूम बच्चों का शिक्षा का अधिकार कुचला जा रहा है।
7 मई को शिक्षा संकुल का घेराव
अभिभावक संघ ने तीखे तेवर अपनाते हुए आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग और मंत्री निजी स्कूलों को संरक्षण दे रहे हैं। इसी के विरोध में 7 मई को प्रदेशभर के पीड़ित अभिभावक और छात्र जयपुर स्थित शिक्षा संकुल के बाहर जुटेंगे। संघ का कहना है कि जिन बच्चों को अभी क्लास में होना चाहिए था, उन्हें अपने संवैधानिक अधिकार के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर किया जा रहा है।
स्कूलों के खिलाफ उठाए जाएंगे सख्त कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो स्कूल आरटीई चयन के बावजूद छात्रों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं, उनके खिलाफ विभाग सख्त कदम उठाएगा। गंभीर शिकायतों के आधार पर कड़ी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है, ताकि किसी भी बच्चे के भविष्य से समझौता न हो।
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