जबरन जंग में धकेल दी भारतीय जिंदगियां, 5 के शव आए, 15 का अब तक सुराग नहीं
News In Short
- रूस-यूक्रेन युद्ध में जबरन धकेल दिए 15 भारतीय युवाओं को खैर-खबर नहीं।
- इन युवकों को रूसी सेना ने जबरन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में झोंक दिया था।
- ये युवा रोजगार की तलाश में रूस गए थे, लेकिन इन्हें युद्ध सहायक बना दिया।
- पांच अन्य युवाओं के शव भारत पहुंचे हैं, चार युवकों के लापता की सूचना है।
- विदेश मंत्रालय ने कहा, भारतीय युवाओं की सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी।
News In Detail
Jaipur: यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में फंसी भारतीय जिंदगियों को लेकर बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। रूसी सेना में जबरन भर्ती किए गए दर्जनों भारतीय युवाओं में से 15 का अब तक कोई अता-पता नहीं चला है। हालांकि केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी हैं, लेकिन खैर-खबर नहीं मिलने से परिवारों की उम्मीदें अब दम तोड़ रही हैं।
संसद से सड़क तक गूंजा मुद्दा
यह मामला केवल कुछ युवाओं के लापता होने का नहीं है, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जाल का है। राजस्थान के रालोप सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे को संसद और विदेश मंत्रालय के समक्ष प्रमुखता से उठाया था। इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हाल ही में बेनीवाल को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ये युवा बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गए थे, लेकिन आज वे मौत के साये में खड़े हैं।
भारत आए पांच युवाओं के शव
सबसे विचलित करने वाली जानकारी उन युवाओं को लेकर है, जो इस खूनी संघर्ष की भेंट चढ़ गए। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने अब तक 5 भारतीयों के पार्थिव शरीर उनके घर भेजे हैं। इन परिवारों के लिए विदेश से खुशहाली की खबर नहीं, बल्कि बेटों की लाशें आईं।
स्वदेश लौटे पार्थिव शरीरों का विवरण:
नाम पासपोर्ट नंबर वापसी की तारीख
समरजीत सिंह Y4848630 11 मार्च, 2026
अनुज C5901903 25 मार्च, 2026
अंकित W0920182 03 अप्रैल, 2026
सचिन खजुरिया AA147209 03 अप्रैल, 2026
अंशु S6044856 16 अप्रैल, 2026
अब DNA टेस्ट का सहारा
रूस ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि फिलहाल 4 भारतीय नागरिक युद्ध क्षेत्र से लापता हैं। इनकी पहचान और खोज के लिए भारत सरकार ने अब वैज्ञानिक रास्ता अपनाया है। लापता युवाओं के परिवारों के DNA सैंपल लिए जा रहे हैं, जिन्हें रूसी अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा।
लापता भारतीयों की पहचान सुमित शर्मा (पासपोर्ट: X9325776), संदीप सुंडा (पासपोर्ट: C0204351), गुरसेवक सिंह (पासपोर्ट: T9174703) और विजय सिंह (पासपोर्ट: W3426660) के रूप में की गई है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि इन लापता भारतीयों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन 15 जिंदगियों का क्या?
सवाल उन 15 युवाओं पर भी खड़ा है, जिनके बारे में फिलहाल रूस की तरफ से सरकार के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास लगातार रूसी रक्षा मंत्रालय के संपर्क में है। कोशिश यही है कि जो जीवित हैं, उन्हें युद्ध क्षेत्र से निकालकर जल्द से जल्द रिहा कराया जाए।
धोखा, लालच और फिर मजबूरन भर्ती
ये युवा आखिर इस दलदल में फंसे कैसे, इसकी जांच में सामने आया है कि इन्हें सहायक या हेल्पर की नौकरी का झांसा देकर रूस ले जाया गया था। वहां जाते ही उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें सैन्य ट्रेनिंग देकर सीधे यूक्रेन सीमा पर भेज दिया गया। अधिकतर युवाओं को तो पता ही नहीं था कि उन्हें सीधे युद्ध लड़ना पड़ेगा। यह एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट की तरह काम कर रहा है, जिसने भारतीय युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त दस्तक
अब यह लड़ाई अदालती गलियारों तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया है, जिसमें 26 भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी की मांग की गई है। कोर्ट में पेश वकील ने दावा किया कि इन लोगों को हिरासत में लेकर जबरन युद्ध में धकेला गया है। यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।
सरकार का दावा, प्रयास जारी
केन्द्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने सांसद हनुमान बेनीवाल को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि रूस के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत अंतिम दौर में है। सरकार का लक्ष्य न केवल लापता लोगों को ढूंढना है, बल्कि वहां फंसे हर भारतीय को वापस लाना है। यूक्रेन की सीमाओं पर भारतीय पासपोर्ट और पहचान के बीच फंसी ये जिंदगियां आज पूरे देश की चिंता का विषय हैं।
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