बोगस फर्मों के खातों से उठाया भुगतान, 60 लाख रुपए का घोटाला उजागर

Jageshwar prasad | Jun 17, 2026, 18:48 IST
समग्र शिक्षा में घोटाला
राजस्थान के बाड़मेर में 60 लाख रुपए का घोटाला उजागर हुआ है। समग्र शिक्षा कार्यालय में इस राशि को हड़पने के लिए बोगस फर्मों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बाड़मेर में समग्र शिक्षा कार्यालय के 60 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा।
  • एडीपीसी और कैशियर ने मिलकर फर्जी बिल पास कर रकम हड़पी।
  • भुगतान बोगस फर्मों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
  • कनिष्ठ लेखाकार ने बिना दस्तावेजों के पास हुए बिलों पर की जांच।
  • राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की।

Barmer: राजस्थान में बाड़मेर के समग्र शिक्षा कार्यालय में करीब 60 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। इस पूरे घोटाले को वित्तीय वर्ष 2025-26 के आखिर में शातिर तरीके से अंजाम दिया गया।



इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। साथ ही दोषियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।



​ऐसे रचा घोटाले का ताना-बाना

समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) के अलग-अलग ट्रेड के लिए सामग्री मद में कुल दो करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था।



इस बजट में से नियमों के तहत 1.40 करोड़ रुपए की सामग्री टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से खरीद ली गई थी। उसे संबंधित स्कूलों में भेज भी दिया गया था।



इसके बाद शेष बची 60 लाख रुपए वित्तीय वर्ष 2025-26 के मार्च में लैप्स (खत्म) होने वाले थे। इस राशि को हड़पने के इरादे से अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) और कैशियर ने मिलकर ताना-बाना बुना।



उन्होंने 28 और 29 मार्च को वित्तीय वर्ष के ठीक खत्म होने से पहले नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया। आनन-फानन में करीब 59.78 लाख रुपए के फर्जी बिल पास कर दिए।



क्या हैं नियम?

वित्तीय नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार के भुगतान से पहले संबंधित शाखा द्वारा फाइल पर विधिवत अनुमोदन और गहन जांच होनी अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।



भुगतान स्वीकृति के आदेशों के साथ कोई भी मूल बिल, वाउचर या सहायक दस्तावेज संलग्न नहीं पाए गए। इसके बजाय सामग्री मद के इस भारी बजट को सेक्शन वीटी-वीसी के मानदेय के रूप में झूठा दर्शाया गया। भुगतान पूरी तरह से बोगस फर्मों के बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया गया।



​फर्जी इनर शीट से छिपाने की कोशिश

सरकारी रिकॉर्ड और कैश बुक में इस गबन को छिपाने के लिए कैशियर ने मूल बिलों के साथ फर्जी इनर शीट लगा दी।



कागजों में जिन वास्तविक फर्मों के नाम पर भुगतान मंजूर किया गया था, असल में पैसा उन फर्मों को न देकर किसी अन्य बोगस फर्मों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। सामग्री के बजट को मानदेय का रूप देकर अधिकारियों ने पूरी व्यवस्था को गुमराह किया।



​कनिष्ठ लेखाकार ने किया भंडाफोड़

इस पूरे काले कारनामे का खुलासा तब हुआ, जब समग्र शिक्षा विभाग के ही कनिष्ठ लेखाकार की नजर बिना दस्तावेजों के पास हुए बिलों पर पड़ी। कनिष्ठ लेखाकार ने मामले की गहराई से जांच की और पूरे घोटाले को उजागर कर दिया।



उन्होंने बिना किसी देरी के इस पूरे मामले की लिखित शिकायत और रिपोर्ट राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद को भेजी। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच करवाने की पुरजोर मांग की।



​जांच कमेटी गठित, दर्ज होगी एफआईआर

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की मुख्य वित्तीय सलाहकार अनुपमा शर्मा ने बताया कि बाड़मेर एडीपीसी कार्यालय में 60 लाख रुपए के गबन का यह मामला हमारे संज्ञान में आया है।



विभाग ने इस पर तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। हमने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया है। समिति इसी सप्ताह बाड़मेर पहुंचकर अपनी जांच शुरू कर देगी।



सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी के इस मामले में संलिप्त एडीपीसी, कैशियर और अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने के भी आदेश जारी किए हैं।



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