अमित शाह के दौरे से पहले अलवर में विवाद, कलेक्टर के खिलाफ धरने पर मंत्री संजय शर्मा
समझें क्या है पूरा मामला
- अमित शाह के अलवर दौरे से पहले नगर निगम में भर्ती विवाद को लेकर प्रशासनिक संकट गहराया।
- वर्ष 2012 की भर्ती के अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र जारी न होने पर मंत्री संजय शर्मा धरने पर बैठे।
- शहर की व्यवस्था बर्बाद करने और सरकार के आदेश न मानने का आरोप लगाया।
- आयुक्त के तबादले के बाद पैदा हुआ हंगामा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 16 अगस्त को अलवर के दौरे पर आ रहे हैं। पूरी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन व नेता उनके दौरे की तैयारियों में लगे हैं। शाह के दौरे से पहले बुधवार को अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर हंगामा हो गया। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा भी सफाई कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। मंत्री ने कलेक्टर अर्तिका शुक्ला और नगर निगम कमिश्नर सोहन सिंह नरूका पर जमकर नाराजगी जताई।
मंत्री ने कमिश्नर सोहन सिंह से कहा कि सीनियर IAS रवि जैन की तुम नहीं मान रहे, प्रतीक जूईकर की तुम नहीं मान रहे। कलेक्टर और आयुक्त आप लोग चाहते क्या हो इस शहर से यह बता दो। तुम कोई राज्य सरकार से बड़े हो गए क्या या तुम ही सरकार हो? मेरी तुम नहीं सुन रहे, झाबर सिंह जी खर्रा की नहीं सुन रहे। अब किससे कहलवाना है, यह भी बता दो।
मंत्री ने कहा कि जब तक सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति-पत्र जारी कर आज ही नियुक्ति नहीं दी जाती, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे। मंत्री के साथ कांग्रेस नेता आर्यन जुबेर खान भी धरने पर बैठे हैं। हालांकि कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ता आपस में उलझ भी गए।
मंगलवार को घेर लिया था आयुक्त को
मंगलवार को आरएएस अधिकारियों की तबादला सूची में निगम आयुक्त सोहन सिंह नरुका का तबादला हो गया। सूचना मिलते ही करीब 3 बजे 2012 की सफाईकर्मी अभ्यर्थी अपने परिजनों के साथ निगम दफ्तर पहुंच गए और आयुक्त से फौरन पदग्रहण करने का पत्र देने की मांग करने लगे।
हंगामा होता देख आयुक्त सरकारी वाहन में बैठकर निकलने लगे।लेकिन एक महिला उनके वाहन के आगे लेट गई। इस पर आयुक्त ने दूसरा वाहन मंगवा लिया लेकिन,गुस्साई भीड़ ने उसे भी रोक लिया और आयुक्त को वापिस दफ्तर में आना पड़ा।
कमरे में बंद होकर बुलाई पुलिस
आक्रोशित भीड़ से घबराकर आयुक्त ने अपने को चैंबर में बंद कर लिया और पुलिस को बुला लिया था। पुलिस के पहुंचने के बाद भी करीब दो घंटे बाद आयुक्त पुलिस सुरक्षा में बाहर निकल पाए थे।
इसके बाद भीड़ केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पहुंच गई। उन्होंने कलक्टर डॉ.आर्तिक शुक्ला को बुलाया और समाधान करने को कहा था।
यह है मामला
अलवर नगर निगम में साल 2012 में सफाईकर्मियों की भर्ती निकली थी। कोर्ट की ओर से नियुक्ति के आदेश दिए जाने के बावजूद उस भर्ती के अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी। अभ्यर्थी संजय का कहना है कि वह कोर्ट से केस जीतकर आए हैं और 6-7 महीने हो गए हैं।
आयुक्त उन्हें लगातार कल और परसों नियुक्ति-पत्र देने का आश्वासन देते रहे। इस बीच उनका तबादला हो गया है। वाल्मीकि समाज के नेता जितेंद्र सारवान ने कहा कि आयुक्त हमारे समाज को कुछ देना ही नहीं चाहते हैं।
कमिश्नर-कलेक्टर ने शहर को बर्बाद कर दिया
सफाईकर्मियों की नियुक्ति को लेकर नगर निगम में धरने पर बैठे वन मंत्री संजय शर्मा कहा कि आयुक्त सोहन सिंह नरूका और कलेक्टर डॉ.अर्तिका शुक्ला ने शहर को बर्बाद कर दिया है।
भाजपा सरकार की अलवर में खुली असलियत
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा है कि भाजपा सरकार की असलियत अलवर में खुलकर सामने आ गई है। सफाई कर्मियों को नियुक्ति पत्र तक नहीं मिल रहे हैं। खुद राज्यमंत्री संजय शर्मा को अपनी ही सरकार के नगर निगम के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। यह भाजपा शासन में प्रशासनिक तंत्र के पूरी तरह चरमरा जाने का सबूत है।
जिला कलेक्टर से बात के बावजूद जब अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की,तो मंत्री को खुद सड़क पर बैठकर आंदोलन करना पड़ा। यह दिखाता है कि भाजपा राज में मंत्री सिर्फ नाम के हैं। असली फैसले नौकरशाही की मर्जी से होते हैं। जिस सरकार का अपना मंत्री ही न्याय के लिए भटकता फिरे, वह गरीब सफाई कर्मचारियों और आम जनता को क्या इंसाफ देगी?
यह सरकार नहीं चल रही,बल्कि अफसरशाही के भरोसे लड़खड़ा रही है। भाजपा को यह बताना चाहिए कि जब उसका अपना मंत्री ही व्यवस्था से त्रस्त है, तो जनता किस मुंह से इस सरकार पर भरोसा करे।
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