सरिस्का टाइगर रिजर्व में रात के अंधेरे में डाला कचरा, वन्यजीवों के लिए बना खतरा
News In Short
- सरिस्का टाइगर रिजर्व में रात के अंधेरे में अवैध रूप से कचरा डाला।
- कचरे ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।
- अधिकारी बोले, कचरा डालने की करतूत पड़ोसी पालिकाओं की।
- कचरा डालने वालों की पहचान के लिए अधिकारियों की जांच शुरू।
- अधिकारियों ने कहा कि यह कचरा बना सकता है वन्यजीवों के लिए खतरा।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान के प्रसिद्ध सरिस्का टाइगर रिजर्व इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहा है। यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही और प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी का नतीजा है। अलवर-जयपुर मार्ग पर माधोगढ़ पुलिया के पास रात के अंधेरे में अवैध रूप से कचरा डंप किए जाने का मामला सामने आया है।
रात के सन्नाटे में डाला कचरा
बताया जा रहा है कि पास की नगर पालिकाओं ने नियमों को ताक पर रखकर दो ट्रक कचरा सीधे टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्र में डाल दिया। कचरा डालने के इस अवैध कार्य को अंजाम देने के लिए रात के समय चुना गया, जिससे किसी की नजर नहीं पड़े। सड़क किनारे पड़ा यह कचरा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के नियमों का भी खुला उल्लंघन है।
वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा
सरिस्का के अधिकारियों ने बताया कि सरिस्का क्षेत्र में जिस स्थान पर यह कचरा फेंका गया है, वह क्षेत्र वन्यजीवों के आवागमन का मुख्य गलियारा माना जाता है। यहां बंदरों की भारी संख्या है। अक्सर पैंथर व अन्य जंगली जानवर भी विचरण करते हैं।
खुले में पड़े इस कचरे में प्लास्टिक, सड़ा-गला भोजन और अन्य हानिकारक अपशिष्ट शामिल हैं। बंदर अक्सर भोजन की तलाश में ऐसे कचरे में मुंह मारते हैं, जिससे उनमें घातक बीमारियां पनपने का खतरा बढ़ गया है।
पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वन्यजीव इस कचरे का सेवन करते हैं तो यह उनके पाचन तंत्र को नुकसान हो सकता है। यह कचरा उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है। इससे सरिस्का के पूरे इको-सिस्टम का संतुलन बिगड़ने की आशंका है।
शुरू हुई जांच की कार्रवाई
दूसरी ओर, मामला संज्ञान में आते ही सरिस्का प्रशासन हरकत में आ गया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि उन ट्रकों और दोषी कर्मचारियों की पहचान की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि जो भी व्यक्ति या संस्था इसमें दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिहायशी इलाकों का कचरा जंगलों की सीमा पर डाला जाएगा तो भोजन की तलाश में जानवर सड़क और बस्तियों की ओर रुख करेंगे। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जो इंसानों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।
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