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Photograph: (the sootr)
News In Short
- सरिस्का में ट्रेनिंग लेने आए 20 देशों के पशु चिकित्सक राजस्थानी रंग में दिखे।
- इन विदेशी मेहमान ने राजस्थानी पोशाक पहनकर ठुमके लगाए।
- विदेशी पशु चिकित्सकों की ट्रेनिंग 27 फरवरी तक चलेगी।
- ट्रेनिंग में करीब 20 देशों के लगभग 40 से 50 पशु चिकित्सक ले रहे हैं भाग।
- ये डॉक्टर वन्यजीवों के खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर कर रहे शोध।
News In Detail
सुनील जैन@​अलवर
राजस्थान में अलवर के सरिस्का बाघ अभयारण्य में प्रशिक्षण लेने आए 18 देशों के पशु चिकित्सक गुरुवार को राजस्थानी रंग में रंगे नजर आए। जंगल की खाक छानने और वन्यजीवों पर शोध करने आए इन विदेशी मेहमानों ने जब घाघरा-लुगड़ी पहनी, तो वे किसी राजस्थानी से कम नजर नहीं आ रहे थे।
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हरिपुरा गांव बना 'इंटरनेशनल डांस फ्लोर'
​वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की ओर से आयोजित इस 18 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर के तहत विदेशी डॉक्टरों की टीम सरिस्का के अंदर बसे हरिपुरा गांव पहुंची थी। जैसे ही विदेशी महिला डॉक्टरों ने गांव की महिलाओं के पारंपरिक पहनावे और उनके सहज जीवन को देखा, वे उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकीं।
देखते ही देखते विदेशी मेहमानों ने राजस्थानी घाघरा और लुगड़ी पहन ली। उन्होंने राजस्थानी और हरियाणवी लोक गीतों की धुन पर विदेशी डॉक्टरों ने गांव की महिलाओं के साथ ताल से ताल मिलाई और 'पधारो म्हारे देश' पर जमकर ठुमके लगाए। ग्रामीण महिलाओं ने भी बड़ी गर्मजोशी से इन 'गोरे मेहमानों' को अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाया।
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लिया राजस्थानी जायके का आनंद
​सरिस्का के डीएफओ अभिमन्यु सहरन ने बताया कि 9 फरवरी से शुरू हुई यह ट्रेनिंग 27 फरवरी तक चलेगी। इसमें 20 से अधिक देशों के लगभग 40 से 50 पशु चिकित्सक भाग ले रहे हैं। ये डॉक्टर जंगल के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर वन्यजीवों के खान-पान, उनके मल के नमूनों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर गहरा शोध कर रहे हैं।
फील्ड वर्क और रिसर्च के बीच जब इन मेहमानों को गांव की सादगी और राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद मिला, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विदेशी मेहमानों ने चूल्हे पर बने देसी खाने का आनंद लिया और राजस्थान के आतिथ्य सत्कार की जमकर तारीफ की।
​वायरल हुआ 'देसी' अंदाज
​टूरिस्ट गाइड और वाइल्डलाइफ टीम द्वारा बनाए गए इन पलों के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। नीली आंखों और सुनहरे बालों वाली विदेशी युवतियों को सिर पर पल्ला रखकर नाचते देख स्थानीय लोग भी दंग रह गए।
पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे सरिस्का का यह जंगल न केवल बाघों के लिए, बल्कि सांस्कृतिक मिलन का भी केंद्र बन गया है।
ट्रेनिंग प्रोग्राम
​आयोजक: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII)
​अवधि: 9 फरवरी से 27 फरवरी (18 दिन)
​प्रतिभागी: 20 देशों के करीब 50 डॉक्टर
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