एसीआर नही होने पर भी कर्मचारी को मिलेंगे सेवा लाभ, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Mukesh Sharma | Jul 30, 2026, 19:58 IST
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
राजस्थान में जिला जज अभय जैन के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। शीर्ष कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट को डीजे अभय जैन का वेतन तीन महीने में रिवाइज करने का निर्देश दिया है।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में डीजे अभय जैन के पक्ष में फैसला सुनाया है।
  • शीर्ष कोर्ट ने कहा, ACR नहीं होने पर भी कर्मचारी को मिलेंगे सेवा लाभ।
  • राजस्थान हाई कोर्ट की अर्जी खारिज, DJ अभय जैन को मिलेगा पे-स्केल लाभ
  • नियोक्ता की गलती का खामियाजा नहीं भुगतेगा कर्मचारी
  • बाकी बची सही ACR के आधार पर तय होंगे प्रमोशन और वेतन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक अधिकारी को सिर्फ इसलिए सिलेक्शन स्केल और सुपर टाइम स्केल देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि उस समय की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) उपलब्ध नहीं थीं। हकीकत में वह गलत तरीके से नौकरी से बाहर था।



कोर्ट ने कहा कि नियोक्ता अपनी ही गलती का फ़ायदा नहीं उठा सकता। यदि एसीआर नहीं होने के लिए नियोक्ता ज़िम्मेदार है तो अधिकारी के हक का आकलन बाकी बची हुई सही एसीआर के आधार पर किया जाना चाहिए।



हाई कोर्ट की अर्जी का निपटारा

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह फ़ैसला राजस्थान हाई कोर्ट की एक अर्जी का निपटारा करते हुए दिया। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 15 मार्च, 2022 के फ़ैसले पर स्पष्टीकरण मांगा था।



इस आदेश से एडीजे अभय जैन को नौकरी से हटाने का आदेश रद्द कर दिया था। कोर्ट ने जैन को नौकरी में निरंतर मानते हुए सीनियरिटी सहित सभी संबंधित फ़ायदों और 50% बकाया वेतन के साथ बहाल करने का निर्देश दिया था।



हाईकोर्ट ने यह मांगा था स्पष्टीकरण

राजस्थान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण के लिए अर्जी दायर की थी। इसमें पूछा कि एडीजे जैन जनवरी 2016 से अप्रैल 2022 तक नौकरी से बाहर थे। इस अवधि की उनकी एसीआर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में क्या सभी संबंधित फायदे देने के निर्देश का अर्थ जैन को सिलेक्शन स्केल और सुपर टाइम स्केल भी दिया जाए।



यह तो हाई कोर्ट की गलती थी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संबंधित अवधि के दौरान जैन की एसीआर नही होना उन्हें गलत तरीके से नौकरी से हटाए जाने का नतीजा था।



हाईकोर्ट को अपनी गलती का फायदा उठाने की इजाजत देना अन्याय होगा। कानूनी तौर पर किसी पक्ष को अपने की गलत काम का फायदा उठाने की इजाजत नहीं है। इसलिए जैन को गलत तरीके से नौकरी से निकाले जाने का बुरा नतीजा नहीं भुगतने दिया जा सकता।



यानी जरूरी वार्षिक गोपनीय रिपेार्ट नहीं होने के आधार पर उन्हें सिलेक्शन स्केल या सुपर टाइम स्केल देने पर विचार करने से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषकर तब, जब संबंधित अवधि में उन्हें गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से बाहर रखा गया



जब जैन को नौकरी से हटाना ही गलत था तो

कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को गलत तरीके से नौकरी से बाहर रखा जाता है तो प्रमोशन या ज़्यादा पे-स्केल जैसे फायदे देने से इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि वह एम्प्लॉयर की गैर-कानूनी कार्रवाई के कारण योग्यता की शर्तें पूरी नहीं कर पा रहा है।



2022 के फ़ैसले में जैन को नौकरी से हटाने को पहले ही गलत माना जा चुका है। फैसले में माना गया कि जैन के विरुद्ध खराब परफ़ॉर्मेंस या गलत व्यवहार दिखाने वाला कोई सबूत नहीं था। 2015 की ACR, जिसके बारे में उन्हें बताया नहीं गया था, उसके ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं की जा सकती।



कोर्ट ने तय किया कि जैन के हक का आकलन 2013 और 2014 के उनके वैध एसीआर के आधार पर किया जाना चाहिए। इनमें ईमानदारी के सर्टिफिकेट के साथ बहुत अच्छा और अच्छा ग्रेडिंग शामिल थी।



कोर्ट ने कहा कि जैन 16 जुलाई 2018 से सिलेक्शन स्केल के हकदार थे। जिस तारीख को उन्होंने नौकरी के पांच साल पूरे किए थे। सिलेक्शन स्केल में तीन साल पूरे करने के बाद 16 जुलाई 2021 से सुपर टाइम स्केल के हकदार थे।



तीन महीने में फिर से तय करो वेतन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जैन के साथ के और उनसे जूनियर अधिकारियों को भी उन तारीखों से ये फायदे दिए जा चुके हैं। राजस्थान हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर जैन की सैलरी फिर से तय करने को कहा है।



कोर्ट ने सभी संबंधित फायदों को संशोधित करने और बकाया राशि का भुगतान करने के निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मौद्रिक फायदों की गणना उसके पहले के निर्देश के अनुसार की जाएगी।



इस आदेश में जिसमें पिछली सैलरी (बैक वेजेज) को 50% तक सीमित किया गया था। कोर्ट ने फैसले की कॉपी सभी हाईकोर्ट को भेजने का भी निर्देश दिया।



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