स्कूल एंट्री बैन पर शिक्षा मंत्री की सफाई, गहलोत ने कहा- आदेश वापस ले सरकार
समझें क्या है पूरा मामला
- स्कूलों में एंट्री और फोटोग्राफी नियम पर विवाद तेज।
- शिक्षा मंत्री बोले पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया।
- सरकार ने नियम को बच्चों की सुरक्षा से जोड़ा।
- अशोक गहलोत ने आदेश को तानाशाही बताया।
- विपक्ष ने आदेश वापस लेने की मांग की।
राजस्थान के स्कूलों में एंट्री और फोटोग्राफी रोक पर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अब कोटा में सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है। यह नियम बच्चों की सुरक्षा और निजता के लिए बनाया गया है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे तानाशाही आदेश बताया है।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों की एंट्री और फोटो-वीडियो पर रोक को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान सामने आया है। कोटा में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने साफ किया कि सरकार ने स्कूलों में किसी तरह की पूर्ण पाबंदी नहीं लगाई है।
दिलावर बोले, अफवाहों पर न दें ध्यान
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कुछ लोग यह फैला रहे हैं कि सरकार ने स्कूलों में लोगों के आने या वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है। उन्होंने इसे गलत बताया। दिलावर के मुताबिक स्कूली छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चों की फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी है। उनका कहना है कि अनाधिकृत एंट्री से बच्चों की निजता प्रभावित होती है।
सरकार का रुख, पाबंदी नहीं सुरक्षा है मकसद
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के 8 सूत्रीय दिशा-निर्देशों के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर स्कूलों की बदहाली छुपाने का आरोप लगाया था। इस पर शिक्षा मंत्री ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह नियम शैक्षणिक माहौल बनाए रखने और नाबालिग छात्रों की निजता सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। उनके मुताबिक इसका मकसद किसी पर बेवजह रोक लगाना नहीं है।
गहलोत की सरकार पर चेतावनी
इस विवाद में अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कूद पड़े हैं। गहलोत ने कहा कि भाजपा शासन में सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छुपी नहीं है। उन्होंने टूटी छतों, टपकती कक्षाओं और शिक्षकों के हजारों खाली पदों का जिक्र किया। गहलोत के मुताबिक यह सरकार की जमीनी हकीकत को दिखाता है।
गहलोत ने सरकार को चेतावनी दी कि यह आदेश तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता से भागना बंद करे। गहलोत के मुताबिक अगर यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो जनता खुद आगे आकर स्कूलों की सच्चाई दिखाने का अभियान चलाएगी।
विवाद अब भी जारी
शिक्षा मंत्री की सफाई के बावजूद विपक्ष के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। एक तरफ सरकार इसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सरकार की नाकामी छुपाने की कोशिश करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
FAQ
- शिक्षा मंत्री ने स्कूल एंट्री बैन पर क्या कहा?
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सरकार ने स्कूलों में कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है। उनके मुताबिक यह नियम बच्चों की सुरक्षा और निजता के लिए बनाया गया है। उन्होंने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। - स्कूल एंट्री बैन पर अशोक गहलोत ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार स्कूलों की बदहाली छुपाने के लिए यह आदेश लाई है। उन्होंने टूटी छतों और शिक्षकों की कमी का जिक्र किया। उन्होंने सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है। - स्कूल एंट्री के लिए नए नियम क्या है?
नए नियम के तहत स्कूल में नाबालिग बच्चों की फोटो या वीडियो बनाने से पहले संस्था प्रधान की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति यह गतिविधि नहीं की जा सकती। इसका मकसद बच्चों की निजता सुरक्षित रखना बताया गया है।
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