डेयरी वाला बना डायरेक्टर, करोड़ों की घूसखोरी में गिरफ्तार

Ashish Bhardwaj | Jun 09, 2026, 13:48 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में मोटी रिश्वतखोरी में पकड़े गए बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई का बैकग्राउंड सामान्य रहा है। वह किसी समय दूध की डेयरी चलाते थे। बाद में कीटनाशक कंपनी में मामूली नौकरी करने लगा। यही से रसूख बढ़ाकर बीज निगम का डायरेक्टर बन गया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मोटी रिश्वतखोरी में पकड़े गए बीज निगम के डायरेक्टर जुगल का बैकग्राउंड सामान्य रहा।
  • जुगल किशोर किसी समय दूध की डेयरी चलाते थे, फिर कीटनाशक कंपनी में नौकरी की।
  • जुगल शुरुआत से महत्वाकांक्षी रहा। उसने नेताओं और अधिकारियों से संपर्क बढ़ाए।
  • इन्हीं रसूखों के बल पर जुगल किशोर राज्य बीज निगम का डायरेक्टर बन गया।
  • एसीबी ने जुगल के घर से 1.59 करोड़ और भांजे स्वतंत्र से 85 लाख रुपए बरामद किए।

राजस्थान में नकली बीज मामले में रिश्वतखोरी को लेकर गिरफ्तार हुए बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। कभी दूध की डेयरी चलाने वाला और कीटनाशक कंपनी में मामूली नौकरी करने वाला व्यक्ति कैसे भ्रष्ट तंत्र के सहारे करोड़ों रुपये की रिश्वत का मुख्य किरदार बन गया, इसकी एक परत-दर-परत कहानी उजागर हुई है।



मामला राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई से जुड़ा है। उन पर नकली बीजों के एक बड़े रैकेट को संरक्षण देने और उसके बदले भारी-भरकम घूस लेने का गंभीर आरोप लगा है। एसीबी ने उसके घर से 1.59 करोड़ रुपए नकद बरामद किए हैं, जबकि उसके भांजे से 85 लाख रुपए जब्त हुए हैं। दोनों एसीबी के पांच दिन के रिमांड पर हैं। जुगल किशोर को अब बीज निगम से हटा दिया गया है।





जुगल किशोर विश्नोई को पद से हटाया


​साधारण शुरुआत से डायरेक्टर बनने का सफर

​जुगल किशोर विश्नोई की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य रही है। साल 2007 में वह श्रीगंगानगर के 13 डीओएल गांव में एक छोटी सी दूध की डेयरी चलाता था। बीएससी तक शिक्षित जुगल किशोर 2008 में अपने गांव से बीकानेर आ गया। बीकानेर आने के बाद उसने यहां एक खाद, बीज और पेस्टिसाइड (कीटनाशक) कंपनी में नौकरी की शुरुआत की।



​यहां काम करते हुए उसने इस क्षेत्र के पूरे नेटवर्क और लूपहोल्स को बारीकी से समझा। अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक साठगांठ को मजबूत करते हुए उसने तेजी से तरक्की की। इसका नतीजा यह हुआ कि जनवरी 2026 में उसे सीधे राजस्थान राज्य बीज निगम का डायरेक्टर नियुक्त कर दिया गया। लेकिन इस बड़ी कुर्सी पर बैठते ही उसने भ्रष्टाचार का एक बड़ा खेल शुरू कर दिया।



क्या है पूरा मामला और रिश्वत का खेल?

​यह पूरा मामला नकली बीजों के व्यापार को बढ़ावा देने और लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट्स में हेरफेर करने से जुड़ा हुआ है।


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विभाग द्वारा गजराज ब्रांड के मूंगफली बीज के सीज किए गए गोदामों से नकली बीजों को चुपचाप गायब कर वापस गुजरात भेजने, चल रही सरकारी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डालने और लैब में नकली बीजों के सैंपल को पास कराने के एवज में अधिकारियों और बिचौलियों के बीच भारी-भरकम रिश्वत बांटी गई।


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इस पूरे काले कारनामे में लेनदेन का जो आंकड़ा सामने आया है, उसके अनुसार जुगल किशोर विश्नोई ने इस पूरी डील को रफा-दफा करने और सरकारी फाइलों को दबाने के लिए 1.20 करोड़ की मोटी रकम प्राप्त की।


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इस पूरी डील की बिचौलियागीरी और सेटिंग करने के लिए फलोदी के भाजपा विधायक पब्बाराम विश्नोई के पीए गणपत विश्नोई ने गुजरात की गजराज ब्रांड कंपनी से अलग से 60 लाख रुपए वसूले।



​लैब में सैंपल पास कराने का सिंडिकेट

​इस मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि किरण कापडिया की कंपनी गजरात ब्रांड ने केवल अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को ही मैनेज कर रखा था। कंपनी के रसूखदारों ने लैब में अपने अमानक और नकली बीजों के सैंपल को पास करा लिया। मार्केट में उन प्रतिबंधित या घटिया बीजों की बिक्री को दोबारा चालू करवाने के लिए एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था।



​इसके लिए उन्होंने विभाग के कई आला अधिकारियों, निचले स्तर के कर्मचारियों और बाजार में सक्रिय बिचौलियों से लगातार संपर्क साध रखा था। पैसों के दम पर लैब की रिपोर्ट्स को बदलवाया गया, जिससे किसानों की फसलों के साथ खिलवाड़ करने वाले इस नकली बीज के धंधे को बिना किसी कानूनी अड़चन के धड़ल्ले से चलाया जा सके।



उठ रहे हैं गंभीर सवाल

इस खुलासे के बाद अब राजस्थान राज्य बीज निगम की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि ​जनवरी 2026 में किस आधार पर एक निजी पेस्टीसाइड कंपनी के पूर्व कर्मचारी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई? ​क्या नियुक्ति से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच नहीं की गई थी?



​फिलहाल, इस महाघोटाले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की नजर इस पूरे सिंडिकेट पर है। अब तक एसीबी डायरेक्टर जुगलकिशोर समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। सर्च के दौरान कुल 2 करोड़ 44 लाख रूपए बरामद किए जा चुके हैं।



FAQ

  1. जुगल किशोर विश्नोई कौन हैं?
    जुगल किशोर विश्नोई राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर थे, जिन पर नकली बीजों के रैकेट को संरक्षण देने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं।
  2. जुगल किशोर विश्नोई पर क्या आरोप लगे हैं?
    उन पर नकली बीजों के व्यापार को बढ़ावा देने, लैब रिपोर्ट्स में हेरफेर और अधिकारियों और बिचौलियों से करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।
  3. जुगल किशोर और उनके भांजे को एसीबी कितनी रिश्वत की राशि मिली
    जुगल किशोर और उनके भांजे को एसीबी ने पांच दिन के रिमांड पर लिया। घर से 1.59 करोड़ और भांजे से 85 लाख रुपए नकद बरामद किए गए।

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