IPS प्रशाखा माथुर की प्रॉपर्टी रिटर्न खाली, पति IAS शिखर अग्रवाल ने उनकी कई प्रॉपर्टी का क्रिया जिक्र, जानिए क्या है पूरा सच
News In Short
- सीनियर आईपीएस प्रशाखा माथुर ने अपना प्रॉपर्टी रिटर्न खाली छोड़ा है।
- दूसरी ओर प्रशाखा के पति आईएएस शिखर अग्रवाल के रिटर्न में अलग जानकारी।
- शिखर अग्रवाल ने लिखा कि पत्नी प्रशाखा के साथ साझे में उनकी कई संपत्तियां।
- सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल की गिनती राजस्थान में रईस अधिकारियों में।
- सवाल है कि प्रशाखा ने अपने संपत्ति विवरण में प्रॉपर्टी डिटेल क्यों नहीं दी।
News In Detail
Jaipur: अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के सार्वजनिक हुए संपत्ति विवरण में सीनियर IPS प्रशाखा माथुर का प्रॉपर्टी रिटर्न चर्चा में है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने प्रॉपर्टी रिटर्न को खाली छोड़ा है, जबकि उनके पति सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल ने अपने रिटर्न में उनके नाम कई प्रॉपर्टी दिखाई हैं। सवाल यह है कि इस अधिकारी दंपती में से किसका प्रॉपर्टी रिटर्न सही है।
क्या है पति शिखर अग्रवाल के रिटर्न में
राजस्थान में 1993 बैच के पावरफुल अधिकारी शिखर अग्रवाल ने अपने प्रॉपर्टी विवरण में लिखा है कि पत्नी प्रशाखा माथुर के साथ संयुक्त नाम से जयपुर में दो फार्म हाउस, एक मिक्सयूज प्लॉट और उदयपुर में 9945 वर्ग फीट का साझा भूखंड है।
आईएएस अधिकारियों में संपत्ति के मामले में शिखर अग्रवाल का दबदबा है। राजस्थान कैडर में अम्बरीश कुमार के बाद वे सबसे रईस आईएएस अधिकारियों में हैं। उनके पास कुल 11.58 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
शिखर अग्रवाल का पूरा प्रॉपर्टी रिटर्न
शिखर अग्रवाल के संपत्ति विवरण के अनुसार, जयपुर की आमेर तहसील के गुणावता और लबाना गांव में उनके पास दो फार्म हाउस हैं। मैपलवुड प्रोजेक्ट में स्थित इन फार्म हाउस का क्षेत्रफल क्रमशः 3031.75 और 3036.77 वर्ग गज है। इन्हें खरीदने में प्रत्येक की लागत 25 लाख रुपए आई थी, जिनकी वर्तमान अनुमानित कीमत अब 55 लाख रुपए प्रति फार्म हाउस बताई गई है। यह संपत्ति उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर के साथ संयुक्त रूप से खरीदी है।
इसके अलावा उदयपुर के भुवाणा (गिरीवा) में उनके पास 9945 वर्ग फुट का एक आवासीय भूखंड है, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 2 करोड़ आंकी गई है। यह प्लॉट वर्ष 2010 में कृषि भूमि के रूप में खरीदा गया था। बाद में इसे यूआईटी उदयपुर से पट्टा प्राप्त कर परिवर्तित करवाया गया।
होटल और रिसॉर्ट्स में बड़ा निवेश
प्रॉपर्टी विवरण के अनुसार, अतिरिक्त मुख्य सचिव अग्रवाल के निवेश का बड़ा हिस्सा होटल और पर्यटन क्षेत्र में भी है।
उदयपुर के भुजड़ा गांव में स्थित अनंता होटल्स एंड रिसॉर्ट्स में उनके नाम पर 10 कॉटेज हैं। इनकी खरीद लागत 15 लाख रुपए प्रति कॉटेज थी। अभी बाजार मूल्य 25 लाख रुपए प्रति कॉटेज (कुल 2.5 करोड़ रुपए) है। खास बात यह है कि इन कॉटेज से उन्हें सालाना लगभग 50 लाख की आय प्राप्त हो रही है।
अलवर के अजबगढ़ तहसील में स्थित अनंता स्पा एंड रिसॉर्ट्स में भी शिखर अग्रवाल के नाम पर चार विला हैं। इनसे उन्हें प्रति वर्ष लगभग 20 लाख की आय होती है।
जयपुर के पॉश इलाकों में कमर्शियल और आवासीय संपत्तियां
शिखर अग्रवाल ने जयपुर की प्राइम लोकेशंस पर भी बड़ा निवेश किया है। जयपुर स्टॉक एक्सचेंज के सामने स्थित ज्वेल ऑफ इंडिया फेज-2 में उन्होंने आलीशान यूनिट बुक की है। इसका कारपेट एरिया 2933.41 वर्ग फुट है। इसकी कीमत 20755000 (दो करोड़ सात लाख से अधिक) दर्शाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस राशि का बड़ा हिस्सा वर्ष 2025 में ही चुकाया गया है।
जयपुर में वैशाली नगर की डिफेंस कॉलोनी में उनका और उनकी पत्नी के नाम पर 452.69 वर्ग गज का एक मिक्स यूज प्लॉट है। इसकी वर्तमान कीमत 3 करोड़ रुपये के करीब है। इसे अक्टूबर 2023 में खरीदा गया था।
जयपुर टेक्सटाइल मार्केट में शिखर अग्रवाल के नाम पर एक दुकान (GF 68) है। इसकी वर्तमान कीमत 85 लाख रुपये है। इस दुकान से उन्हें सालाना 18 लाख रुपये का किराया प्राप्त होता है।
पैसा कहां से आया?
संपत्ति विवरण में शिखर अग्रवाल ने लिखा है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन का मुख्य स्रोत उनकी व्यक्तिगत बचत, पत्नी की बचत और पिछली संपत्तियों के बेचान से प्राप्त राशि रही है। उदाहरण के लिए जयपुर टेक्सटाइल मार्केट की दुकान के लिए उन्होंने 64 लाख रुपए का लोन एचडीएफसी बैंक से लिया है, जबकि 16 लाख रुपए अपनी बचत से दिए हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
इस मामले पर विशेषज्ञ कहते हैं कि यहां दो ही संभावनाएं हो सकती हैं। पहली बात, यदि आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर ने अपना प्रॉपर्टी रिटर्न जमा किया है, लेकिन उसमें संपत्ति की जानकारी खाली या ‘शून्य’ दिखाई है तो यह गंभीर मामला माना जाएगा। इसे नियमों का उल्लंघन और गलती नहीं, बल्कि अपराध की तरह देखा जा सकता है।
दूसरी बात, यदि उन्होंने प्रॉपर्टी रिटर्न जमा ही नहीं किया है तो यह लापरवाही है। सरकारी अधिकारियों के लिए समय पर सही जानकारी देना जरूरी होता है, ऐसे में रिटर्न न भरना भी बड़ी चूक है। सीधी भाषा में समझें तो या तो जानकारी छुपाई गई है या फिर नियमों को नजरअंदाज किया गया है...दोनों ही स्थिति सवाल खड़े करती हैं।
इसे लेकर 'द सूत्र' ने आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर से बात की। जब उनसे प्रॉपर्टी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वे अभी मीटिंग में हैं। बात करने की स्थिति में नहीं हैं। जब प्रशाखा माथुर अपना पक्ष रखेंगी तो हम उसे भी अपनी खबर में शामिल करेंगे।
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