सांवलिया सेठ मंदिर में खुला कुबेर खजाना, 34 साल में सबसे अधिक रिकॉर्ड चढ़ावा
News In Short
- सांवलिया मंदिर में वर्ष 2025 में 337 करोड़ का चढ़ावा आया, जो 34 वर्षों में सबसे अधिक।
- मंदिर प्रशासन ने काउंटिंग प्रक्रिया के लिए 200 लोगों की टीम नियुक्त की है।
- भक्तों का मानना है कि ठाकुर जी के प्रति अटूट आस्था से बिजनेस में होती है वृद्धि।
- मंदिर ने आसपास के 16 गांवों के विकास की जिम्मेदारी ली है।
- अब मंदिर परिसर में टॉयलेट, स्नान घर और धर्मशाला जैसी नई सुविधाएं बनेंगी।
News In Detail
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित भगवान सांवलिया सेठ का मंदिर में वर्ष 2025 के दौरान चढ़ावे ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान करीब 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है। यह चढ़ावा पिछले 34 वर्षों में सबसे अधिक है। यह दिखाता है कि हर साल चढ़ावे की राशि में लगातार वृद्धि हो रही है।
चढ़ावे की काउंटिंग प्रक्रिया
मंदिर में चढ़ावे की काउंटिंग के लिए हर महीने विशेष इंतजाम किए जाते हैं। काउंटिंग प्रक्रिया में लगभग 200 लोगों का स्टाफ शामिल होता है। इसमें बैंक कर्मी और मंदिर प्रशासन के लोग शामिल होते हैं। शुरुआत में चढ़ावे की काउंटिंग हाथों से की जाती थी लेकिन अब मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
दान राशि की काउंटिंग
मंदिर प्रशासन के अनुसार हर महीने चतुर्दशी के दिन दान पात्र खोले जाते हैं और राजभोग आरती के बाद 11:45 बजे काउंटिंग शुरू होती है। इस काउंटिंग में करीब 200 लोग शामिल होते हैं, और यह प्रक्रिया 5 से 10 दिन तक चलती है। नोटों और सिक्कों को अलग किया जाता है और फिर मशीनों से उनकी काउंटिंग की जाती है।
34 साल पहले चढ़ावे का आंकड़ा
श्रीसांवलिया जी मंदिर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर और CEO प्रभा गौतम के अनुसार, इस मंदिर के दान पात्र खोलने की परंपरा 1992 से शुरू हुई थी। उस समय चढ़ावे की राशि केवल 65 लाख रुपये थी, जो अब बढ़कर 337 करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है।
भक्तों की मान्यता और योगदान
मंदिर में मान्यता है कि ठाकुर जी यहां सेठजी के रूप में विराजमान हैं। भक्तों का मानना है कि यदि ठाकुर जी को अपना पार्टनर बना लिया जाए तो बिजनेस में वृद्धि होती है। इस विश्वास के चलते भक्त बकायदा स्टाम्प पर राशि लिखवा कर लाते हैं और मन्नत पूरी होने पर लाखों की राशि मंदिर में अर्पित कर देते हैं।
विदेशी श्रद्धालुओं और ऑनलाइन दान
मंदिर में अब न केवल स्थानीय भक्तों का योगदान बढ़ा है, बल्कि विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ रही है। इस कारण, फॉरेन करेंसी का भी दान में शामिल होना आम बात हो गई है। पहले, श्रद्धालु मंदिर में आते थे और चढ़ावे की काउंटिंग देख सकते थे, लेकिन अब इसे अलग सेपरेट कर दिया गया है ताकि काउंटिंग में कोई गड़बड़ी न हो।
मंदिर द्वारा गांवों का विकास
मंदिर प्रशासन ने मंडफिया और आसपास के 16 गांवों का विकास भी जिम्मेवार लिया है। यह विकास कार्यों में हाई मास्क लाइट लगाना, सामुदायिक भवन का निर्माण और बच्चों तथा महिलाओं के लिए सुविधाएं शामिल हैं।
भक्तों के लिए नई सुविधाएं
मंदिर प्रशासन भक्तों की सुविधाओं के लिए काम कर रहा है। आने वाले समय में मंदिर परिसर में टॉयलेट कॉम्प्लेक्स, स्नान घर और 180 कमरों की धर्मशाला बनाई जाएगी। इसके अलावा, पार्किंग व्यवस्था भी बेहतर की जाएगी।
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