सीकर में ASI ने पंचायती राज चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी पुलिस की नौकरी, 13 साल सर्विस थी बाकी
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के बीच सीकर से एक दिलचस्प मामला सामने आया है। यहां रानोली थाने में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर तैनात सुल्तान सिंह बराल ने चुनाव लड़ने के लिए पुलिस की नौकरी छोड़ दी। उनकी सेवा के करीब 13 साल बाकी थे। इसके बावजूद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लेने का फैसला किया। अब वे जिला परिषद के वार्ड 40 से चुनाव मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस ने उन्हें इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है।
पुलिस सेवा से राजनीति में आए सुल्तान सिंह का फैसला चर्चा में है। एक तरफ पुलिस की जिम्मेदारी और लंबा अनुभव है, तो दूसरी तरफ जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ने का मौका। ऐसे में सीकर के ग्रामीण इलाकों में उनके फैसले को लेकर चर्चा हो रही है।
गुरुवार को दिया VRS का आवेदन
मिली जानकारी के अनुसार, सुल्तान सिंह बराल ने गुरुवार को सीकर के पुलिस अधीक्षक संजीव नैन के सामने VRS के लिए आवेदन दिया था। पुलिस विभाग ने उसी शाम उनका आवेदन मंजूर कर लिया। इसके बाद उनके चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया।
सुल्तान सिंह इन दिनों शारदीय नवरात्र के दौरान प्रसिद्ध जीणमाता मेले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर तैनात थे। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे समय में नौकरी छोड़ने के उनके फैसले ने पुलिस महकमे और स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा।
हालांकि, VRS मंजूर होने के बाद चुनाव लड़ने के लिए जरूरी अन्य औपचारिकताओं और नामांकन की स्थिति की पुष्टि संबंधित चुनावी रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
परिवार का राजनीति से पुराना नाता
सुल्तान सिंह बराल का परिवार स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता भागीरथमल ग्राम पंचायत जुराठड़ा में वार्ड पंच रह चुके हैं। उनके छोटे भाई भी वार्ड पंच रह चुके हैं और सरपंच का चुनाव लड़ चुके हैं।
ऐसे में सुल्तान सिंह के लिए चुनावी मैदान पूरी तरह नया नहीं है। परिवार के स्थानीय राजनीतिक अनुभव और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ाव को उनकी चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव में मतदाताओं का समर्थन कितना मिलेगा, यह नतीजे आने पर ही साफ होगा।
पुलिस की नौकरी से जनता के बीच पहुंचेंगे
पुलिस विभाग में काम करते हुए सुल्तान सिंह ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज को करीब से देखा है। अब वे इसी अनुभव के साथ जिला परिषद चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगे।
जिला परिषद सदस्य ग्रामीण क्षेत्र के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर काम करते हैं। इनमें सड़क, पेयजल, स्वच्छता और ग्रामीण सुविधाओं जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे में मतदाता उम्मीदवार से यह जानना चाहेंगे कि वह क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए क्या योजना लेकर आया है।
सुल्तान सिंह के सामने भी यही चुनौती होगी। पुलिस सेवा का अनुभव उनकी पहचान का हिस्सा है, लेकिन चुनाव में उन्हें अपनी विकास योजनाओं और क्षेत्र के लोगों से जुड़ाव के आधार पर समर्थन जुटाना होगा।
वार्ड 40 पर रहेगी नजर
सीकर जिला परिषद के वार्ड 40 से चुनाव लड़ने के लिए सुल्तान सिंह ने पुलिस सेवा छोड़कर राजनीतिक मैदान में कदम रखा है। कांग्रेस का उम्मीदवार बनने के बाद मुकाबले में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।
उनका यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए भी चर्चा का विषय है, जो नौकरी छोड़कर राजनीति में आने का रास्ता चुनते हैं। अब देखना होगा कि करीब 13 साल की सेवा बाकी रहते पुलिस की वर्दी उतारने वाले सुल्तान सिंह को ग्रामीण मतदाताओं का कितना समर्थन मिलता है।