SMS में जहर जांचने की लैब खुद सिस्टम के ‘जहर’ में फंसी: 9 महीने से बंद, जांच की फीस तक तय नहीं
समझें क्या है पूरा मामला
- SMS कीटॉक्सिकोलॉजी लैब 9महीने से बंद, वजहचौंकाने वाली।
- मशीनें तैयार,स्टाफ मौजूद, फिर भीजांच शुरू नहीं हुई है।
- जनवरी में उद्घाटन,सितंबर में भी लैब पर लटकाताला।
- फीस तय नहोने से अटकीजहर-ओवरडोज की जांच।
- रोज 25-30 गंभीरमरीज, फिर भी लैब काताला नहीं खुला।
जहर खाया है, ड्रग्स या दवाओं का ओवरडोज हुआ है या सांप ने काटा है... ऐसे गंभीर मरीज सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंच तो रहे हैं, लेकिन उनकी सटीक टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए बनाई गई अत्याधुनिक लैब खुद करीब 9 महीने से बंद पड़ी है।
जनवरी 2026 में लैब का उद्घाटन हुआ था। मशीनें लग चुकी हैं। चार कर्मचारियों का स्टाफ भी मौजूद है। इसके बावजूद सितंबर तक मरीजों की जांच शुरू नहीं हो सकी। वजह चौंकाने वाली है अलग-अलग जांचों की फीस कितनी होगी, यही अब तक तय नहीं हो पाया है। इसके चलते जांचों के जरूरी सरकारी कोड जारी नहीं हुए।
द सूत्र की टीम SMS अस्पताल पहुंची तो लैब बंद मिली।
प्रदेश की पहली पॉइजन डिटेक्शन लैब
सवाई मानसिंह अस्पताल में इसे प्रदेश की पहली पॉयजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल टॉक्सीकॉलोजी लैब के रूप में तैयार किया गया है। पहले प्रकाशित जानकारी में भी इसे राजस्थान की पहली ऐसी अत्याधुनिक लैब बताया गया था।
क्या है टॉक्सिकोलॉजी लैब?
टॉक्सिकोलॉजी लैब सामान्य खून-पेशाब की जांच करने वाली लैब से अलग है। इसका मुख्य काम शरीर में पहुंचे जहरीले पदार्थ, ड्रग्स या दवाओं की पहचान और उनकी मात्रा का पता लगाने में मदद करना है।
जहर खाने या ड्रग ओवरडोज के मामले में मरीज कई बार ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, जब वह खुद नहीं बता पाता कि उसने क्या खाया या कौन-सी दवा कितनी मात्रा में ली। ऐसे में ब्लड, यूरिन और जरूरत के अनुसार दूसरे जैविक सैंपल की टॉक्सिकोलॉजी जांच
डॉक्टरों को विषाक्त पदार्थ या दवा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकती है। स्नेक बाइट और दूसरे जहरीले जीवों के संपर्क से जुड़े मामलों में भी संबंधित जांच इलाज की दिशा तय करने में मददगार हो सकती है। यानी इस लैब का सीधा संबंध उन मरीजों से है, जिनके इलाज में समय और जहर की सही पहचान दोनों बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
रोज 25-30 ऐसे मरीज पहुंचने की जानकारी
SMS राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। जयपुर के अलावा प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गंभीर मरीज यहां रेफर किए जाते हैं। अस्पताल से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक जहर, ड्रग्स ओवरडोज, स्नेक बाइट और विषाक्तता से जुड़े करीब 25 से 30 मरीज प्रतिदिन SMS पहुंचते हैं। हालांकि यह संख्या अलग-अलग तरह के मामलों को मिलाकर बताई गई है।
जनवरी में उद्घाटन, सितंबर में भी ताला
सबसे बड़ा सवाल लैब के उद्घाटन को लेकर है। जब जांच शुरू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई थी तो जनवरी में इसका उद्घाटन क्यों किया गया? करीब 9 महीने बीत चुके हैं। इस दौरान न तो मशीनों की कमी सामने आई और न ही स्टाफ की। लैब के लिए चार लोगों का स्टाफ भी मौजूद है, लेकिन जांच शुरू नहीं होने के कारण इन कर्मचारियों से फिलहाल दूसरे काम लिए जा रहे हैं।
यानी एक तरफ मशीनें इस्तेमाल का इंतजार कर रही हैं और दूसरी तरफ जिस काम के लिए स्टाफ रखा गया, वह भी वही काम नहीं कर पा रहा।
पूरा मामला जांच की ‘कीमत’ पर अटका
द सूत्र की पड़ताल में सामने आया कि लैब में अलग-अलग तरह की टॉक्सिकोलॉजी जांच होनी हैं। लेकिन किस जांच के लिए मरीज से कितने रुपए लिए जाएंगे, इसकी दरें अभी तक अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हुई हैं।
दरें तय होने के बाद जांचों के लिए जरूरी सरकारी कोड की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही इन्हें अस्पताल के सिस्टम में नियमित रूप से शुरू किया जा सकेगा। यानी लैब तैयार है, मरीज हैं, मशीनें हैं और स्टाफ भी है, लेकिन जांच की कीमत तय नहीं होने से पूरी व्यवस्था ठप है।
नोडल अधिकारी बोले- हमारी तरफ से पूरी तैयारी
SMS अस्पताल में तैयार हुई टॉक्सिकोलॉजी लैब के नोडल अधिकारी डॉ डीके शर्मा ने द सूत्र से बातचीत में लैब शुरू नहीं होने की वजह स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से लैब शुरू करने की सभी तैयारियां पूरी हैं। फिलहाल अलग-अलग जांचों के लिए कितनी राशि निर्धारित की जाएगी, इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
डॉ. शर्मा ने कहा, 'हमारी तरफ से सारी तैयारी है। हमें कोड मिल जाता है तो हम तुरंत जांच शुरू कर देंगे।' उनके मुताबिक जांचों की दरें निर्धारित होने के बाद संबंधित कोड मिलने का रास्ता साफ होगा और लैब में जांच शुरू की जा सकेगी।
डॉक्टरों और विभागों की खींचतान में अटकी फीस?
इस कहानी का एक और पहलू SMS के भीतर से सामने आया है। अस्पताल से जुड़े सूत्रों का दावा है कि डॉक्टरों और अलग-अलग विभागों के बीच जांचों की दरें तय करने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही। इसी खींचतान के कारण जांच की कीमत तय करने का काम लंबा खिंच रहा। इसके बावजूद सवाल बना हुआ है कि जिस मूल्य निर्धारण के बिना लैब चल ही नहीं सकती थी, वह काम उद्घाटन से पहले क्यों नहीं किया गया?
लैब बंद तो डॉक्टर कैसे कर रहे इलाज?
लैब शुरू नहीं होने का सबसे बड़ा असर मरीजों पर है। जहर या ओवरडोज के कई मामलों में मरीज खुद यह बताने की स्थिति में नहीं होता कि उसने कौन-सा पदार्थ लिया है। कई बार परिजनों के पास भी इसकी पूरी जानकारी नहीं होती।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज के लक्षण, उपलब्ध जानकारी और दूसरी जांचों के आधार पर तत्काल इलाज शुरू करते हैं। टॉक्सिकोलॉजी लैब शुरू होने का उद्देश्य इसी कमी को दूर करना और डॉक्टरों को जहरीले पदार्थों तथा दवाओं से संबंधित ज्यादा सटीक जांच उपलब्ध कराना है।
उद्घाटन पहले कर दिया, होमवर्क 9 महीने बाद भी अधूरा
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर है। जनवरी में लैब का उद्घाटन हुआ। सितंबर आ गया। मशीनें तैयार हैं। चार कर्मचारियों का स्टाफ मौजूद है। मरीज रोज अस्पताल पहुंच रहे हैं। नोडल अधिकारी भी जांच शुरू करने के लिए तैयार हैं।
फिर भी जांच नहीं हो रही। कारण केवल इतना है कि अलग-अलग जांचों की दरें तय करने और उसके बाद जरूरी कोड जारी करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
अब सवाल यह नहीं कि SMS के पास टॉक्सिकोलॉजी लैब है या नहीं। सवाल यह है कि जिस लैब को मरीजों की जान बचाने में मदद के लिए बनाया गया, उसके उद्घाटन के 9 महीने बाद भी सरकार और अस्पताल जांच की कीमत क्यों नहीं तय कर पाए?
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