एसओजी ने पकड़ा शिक्षा विभाग का यूडीसी, ताइक्वांडो के नाम पर ऐसे बेची जा रही थीं सरकारी नौकरियां
News In Short
- निलंबित यूडीसी जगदीश सारण फर्जी ताइक्वांडो सर्टिफिकेट बेचने के आरोप में गिरफ्तार।
- जगदीश सारण और उसके रिश्तेदार ने 2.30 लाख रुपये में अभ्यर्थियों को फर्जी सर्टिफिकेट दिए।
- आरोपियों ने ताइक्वांडो फेडरेशन की नकली ईमेल आईडी से फर्जी प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया।
- अब तक 20 अभ्यर्थियों, 3 सहयोगियों और 1 दलाल को गिरफ्तार किया जा चुका है।
- एसओजी जांच कर रही है कि शिक्षा विभाग के अंदर भी कोई अन्य था जिसने इसमें सहयोग किया।
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Hanumangarh: राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवा दिन-रात पसीना बहाते हैं, लेकिन कुछ शातिर लोग इसे शार्टकट से हासिल करने का काला कारोबार चला रहे हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने शिक्षक भर्ती-2022 में हुए एक ऐसे ही बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। खेल कोटे में ताइक्वांडो के फर्जी सर्टिफिकेट बांटने वाले गिरोह के मुख्य मोहरे और शिक्षा विभाग के निलंबित यूडीसी जगदीश सारण (33) को एसओजी ने दबोच लिया है।
असली फेडरेशन जैसी 'नकली ईमेल आईडी'
इस घोटाले की सबसे रोचक और हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने के लिए 'ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया' की आधिकारिक आईडी से मिलती-जुलती एक नकली ईमेल आईडी बनाई।
जब बीकानेर निदेशालय ने खिलाड़ियों के प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए फेडरेशन को ईमेल भेजा, तो जवाब असली फेडरेशन से नहीं, बल्कि आरोपियों की फर्जी आईडी से आया। निदेशालय को 'सब कुछ सही है' वाली फर्जी सत्यापन रिपोर्ट मिली और 38 संदिग्धों का रास्ता साफ हो गया।
2.30 लाख का सौदा और पीटीआई रिश्तेदार
जांच में सामने आया कि यूडीसी जगदीश सारण इस पूरे रैकेट का मुख्य कड़ी था। उसने हनुमानगढ़ के एक अभ्यर्थी योगेंद्र से 2.30 लाख रुपये में सौदा तय किया और पहली किस्त के रूप में 30 हजार रुपये लेकर उसे सर्टिफिकेट थमा दिया।
जगदीश ये फर्जी सर्टिफिकेट अपने रिश्तेदार रामचंद्र (पीटीआई) से बनवाता था। रामचंद्र ने न केवल योगेंद्र, बल्कि मुमताज, ज्योतिरादित्य और ममता कुमारी जैसे कई अभ्यर्थियों को फर्जी नेशनल खिलाड़ी बना दिया। फिलहाल यह मास्टरमाइंड पीटीआई फरार है।
आदतन अपराधी है जगदीश सारण
जगदीश सारण के लिए पुलिस और सलाखें नई नहीं हैं। वह फर्जीवाड़े का पुराना खिलाड़ी है। उसने अपने भाई मुकेश को शारीरिक शिक्षक भर्ती-2022 में फर्जी बी.पी.एड डिग्री दिलाकर चयनित करवाने की कोशिश की थी। 2020 की शिक्षक भर्ती में भी वह रस्साकशी के फर्जी सर्टिफिकेट मामले में जेल जा चुका है।
अब तक 20 अभ्यर्थी और दलाल गिरफ्तार
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि इस मामले में अब तक 20 अभ्यर्थियों, 3 सहयोगियों और 1 दलाल की गिरफ्तारी हो चुकी है। जगदीश को 25 अप्रैल तक रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है कि इस यूडीसी ने और कितने लोगों को फर्जी खिलाड़ी बनाकर मास्टर बनाया है।
नागौर का रहने वाला यह यूडीसी खुद विभाग में रहकर विभाग की जड़ें खोद रहा था। अब एसओजी यह जांच कर रही है कि क्या निदेशालय के भीतर भी कोई विभीषण था जिसने इन फर्जी ईमेल आईडी को पहचानने में जानबूझकर देरी की।
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