RGHS घोटाला: 1150 रुपये की एमआरआई का 14,950 का बिल, एसओजी की रडार पर 5 नामी डॉक्टर

Ashish Bhardwaj | Feb 22, 2026, 13:34 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में एसओजी ने आरजीएचएस में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला उजागर किया है। उसने पांच डॉक्टर और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ केस दर्ज किया है।

News In Short

  • राजस्थान के पेंशनर्स में आरजीएचएस योजना में बड़े घोटाले का खुलासा।
  • योजना में डॉक्टरों की मिलीभगत से 7.5 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
  • सीकर के पांच डॉक्टर और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ केस दर्ज।
  • डॉक्टरों ने कम कीमत वाले मेडिकल टेस्ट को महंगे पैकेज में बदला।
  • 1150 रुपये की एमआरआई जांच का 14,950 का बिल बनवाया।

न्यूज इन डिटेल

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के स्वास्थ्य के लिए शुरू की गई इस योजना में करीब 7.5 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। इस मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने सीकर के पांच नामी डॉक्टरों और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।



'महंगा' दिखाकर लूटा सरकारी खजाना

एसओजी की जांच में सामने आया कि आरोपी डॉक्टरों ने मिलीभगत कर कम कीमत वाले मेडिकल टेस्ट को महंगे पैकेज में बदलकर सरकार से भारी-भरकम क्लेम वसूला।



जिस स्पाइन स्क्रीनिंग की वास्तविक कीमत मात्र 1,150 रुपये थी, उसे अलग-अलग जांचों में बांटकर 14,950 रुपये का बिल बना दिया गया। इसी तरह घुटनों और कंधों की सस्ती जांचों को भी महंगे कोड के साथ बुक कर फर्जी तरीके से सरकारी पैसे का गबन किया गया।



​बस कागजों में होता रहा इलाज

​हैरानी की बात यह है कि कई मामलों में लाभार्थियों को न तो बिल दिया गया और न ही कोई जांच रिपोर्ट सौंपी गई। जांच में निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं:



​फर्जी रेफरल: कई मरीजों को बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण के ही निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर रेफर कर दिया गया।


​मरीज घर पर, बिल अस्पताल में: कुछ मामलों में मरीज अपने घर पर था, लेकिन उसके नाम से आरजीएचएस कार्ड का उपयोग कर ओपीडी पर्चियां कटती रहीं और फर्जी जांचें दिखाकर क्लेम उठा लिया गया।



​एक ही दिन में 5-5 एमआरआई: रिकॉर्ड में पाया गया कि कई मरीजों के नाम पर एक ही दिन में 5-5 एमआरआई तक दर्शा दी गईं, जो चिकित्सकीय रूप से संदेहास्पद है।



​इन डॉक्टरों पर गिरी गाज

​एसओजी के अनुसार स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में नामजद किए गए प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं:


​डॉ. के.के. अग्रवाल (एसोसिएट प्रोफेसर)


​डॉ. मुकेश चौधरी (वरिष्ठ विशेषज्ञ)


​डॉ. सुनील ढाका (एसोसिएट प्रोफेसर)


​डॉ. विजय चौधरी


​डॉ. विजय प्रकाश


साथ ही, बी. लाल डायग्नोस्टिक सेंटर को भी इस फर्जीवाड़ा में मुख्य भागीदार बनाया गया है



​क्या है आरजीएचएस और क्यों है यह गंभीर

​आरजीएचएस राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए 'कैशलेस' सुविधा प्रदान करती है। डॉक्टरों की इस करतूत ने न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उन मरीजों के हक पर भी डाका डाला है जिन्हें वास्तव में इलाज की जरूरत है।



आगे क्या

​SOG ने मामला दर्ज कर लिया है और अब इन डॉक्टरों के बैंक खातों और पुराने रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ने पर प्रदेश के अन्य शहरों और बड़े अस्पतालों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल, चिकित्सा विभाग में इस कार्रवाई के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।



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