दिनेश की जिंदगी बचाने आगे आए 3 लाख शिक्षाकर्मी, 45-45 रुपए की मदद से देंगे संबल
समझें क्या है पूरा मामला
- शिक्षा विभाग जीवन-मौत से जूझ रहे दिनेश कुमार चौधरी को जीवन देने के लिए आगे आया।
- उन्होंने दुलर्भ बीमारी से पीड़ित दिनेश के इलाज के लिए अंशदान राशि देने की पहल की है।
- करीब 3 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी अपने वेतन से देंगे 45-45 रुपए का अंशदान।
- अलवर में सेवारत दिनेश को है इंटरस्टिशल लंग डिजीज (ILD) जैसी दुर्लभ बीमारी।
- इस गंभीर बीमारी के उपचार पर डॉक्टरों ने दो करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च बताया है।
सुनील जैन @ अलवर
राजस्थान का शिक्षा विभाग एक बार फिर गंभीर रूप से बीमार साथी कर्मचारी को जिंदगी की जंग जिताने में एकजुट हो गया है।
प्रदेश में करीब 3 लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों का परिवार एक ऐसा उदाहरण पेश करने जा रहा है, जो मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल बन चुका है।
मामला अलवर के राजकीय प्रताप उच्च माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक दिनेश कुमार चौधरी से जुड़ा है। दिनेश वर्तमान में इंटरस्टिशल लंग डिजीज (ILD) जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं।
उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। वे सिकंदराबाद (तेलंगाना) स्थित कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) के आईसीयू में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार दिनेश कुमार चौधरी की जान बचाने के लिए लंग री-ट्रांसप्लांटेशन (Lung Retransplantation) अत्यंत आवश्यक है।
इस जटिल और दुर्लभ सर्जरी का अनुमानित खर्च करीब 2 करोड़ रुपए है, जो किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार की आर्थिक क्षमताओं से बहुत परे है।
45 रुपए का योगदान, 2 करोड़ का संबल
अपने साथी कर्मचारी को इस संकट से उबारने और उन्हें नया जीवन देने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने भावनात्मक कदम उठाया है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के तहत प्रदेश के शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों से स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग का आह्वान किया गया है।
विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी (चतुर्थ श्रेणी को छोड़कर) के जुलाई 2026 (देय अगस्त 2026) के वेतन से मात्र 45 रुपए की स्वैच्छिक कटौती की जाएगी।
यदि किसी कर्मचारी का वेतन बिल पहले ही कोषालय में प्रस्तुत किया जा चुका है तो वे सीधे निर्धारित बैंक खाते में नकद या ऑनलाइन माध्यम से सहायता राशि जमा करा सकते हैं।
यह कटौती पूरी तरह स्वैच्छिक है। जो अधिकारी या कर्मचारी इसमें भाग नहीं लेना चाहते वे अपने आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को लिखित में सूचित कर सकते हैं।
3 लाख हाथों का सहारा, बनेगी उम्मीद की किरण
शिक्षा विभाग में 3 लाख से अधिक का स्टाफ कार्यरत है। यदि इस विशाल परिवार का हर सदस्य महज 45 रुपये का योगदान देता है तो दिनेश कुमार चौधरी के इलाज के लिए आवश्यक 2 करोड़ रुपए की राशि आसानी से जुटाई जा सकती है।
शिक्षा विभाग के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस पहल का स्वागत करते हुए अपनी सहमति पत्र प्रस्तुत किए हैं। शिक्षक संगठनों के अनुसार विभाग का यह प्रयास न केवल एक परिवार की टूटती सांसों को सहारा देगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि आपदा में शिक्षा विभाग हर सदस्य के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।
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