केबीसी में जीती लाखों की राशि को लगाया गांव के स्कूल पर, शिक्षा के लिए बनी मिसाल

राजस्थान के झुंझनू जिले की रहने वाली नीरू यादव को लोग 'हॉकी वाली सरपंच' के नाम से पहचानते हैं। यादव ने टीवी प्रोग्राम केबीसी में जीते हुए पैसों को बच्चों की शिक्षा में लगा कर एक मिसाल कायम की हैं।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

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News In Short 

  • नीरू यादव ने केबीसी से जीती राशि को बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित किया।
  • उन्होंने अपने गांव में एक अत्याधुनिक बाल वाटिका का निर्माण कराया।
  • बाल वाटिका में 'बुक-फ्री लर्निंग' पद्धति के तहत बच्चों को शिक्षा दी जाएगी।
  • शिक्षा के लिए परिवहन सुविधा भी मुहैया कराई गई है ताकि दूरदराज के बच्चे भी शिक्षा से वंचित न रहें।
  • नीरू यादव की पहल से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

News In Detail 

राजस्थान में 'हॉकी वाली सरपंच' के नाम से लोकप्रिय  झुंझनू जिले की नीरू यादव ने नई मिसाल बनाई है। उन्होंने टीवी प्रोग्राम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) से जीती पूरी राशि का उपयोग नेक कार्य में किया है। उन्होंने अपनी जीती हुई रकम को गांव के बच्चों की शिक्षा में समर्पित करने का फैसला लिया। इसके लिए, नीरू ने अपने गांव लाम्बी सहड़ स्थित शहीद सुरेश कुमार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक अत्याधुनिक 'बाल वाटिका' का निर्माण कराया है। इसका उद्घाटन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने किया। यह कदम नीरू यादव के समाज के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

नीरू यादव का केबीसी में सफर

नीरू यादव को सितंबर 2023 में 'कौन बनेगा करोड़पति' में भाग लेने का अवसर मिला था।  उन्होंने 6.70 लाख रुपए की राशि जीती थी। उसी समय उन्होंने अमिताभ बच्चन से यह वादा किया था कि वह यह राशि शिक्षा के लिए समर्पित करेंगी। नीरू ने ना केवल केबीसी की राशि, बल्कि अपनी स्वंय की आदित्री फाउंडेशन में एकत्रित धन को भी बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया है।

निजी स्कूल से कम नहीं

नया बाल वाटिका अब सरकारी स्कूलों में भी एक बेमिसाल उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह किसी निजी स्कूल से कम नहीं है। यहाँ रंग-बिरंगी दीवारें, अल्फाबेट और नंबर डिजाइन, नैतिक शिक्षा से जुड़ी पेंटिंग्स, और खेल सामग्री बच्चों को एक मजेदार और आनंदपूर्ण वातावरण में शिक्षा प्रदान करती हैं। यह कक्षा में बैठने के बजाय बच्चों को खेलने और सीखने के अवसर प्रदान करती है। इससे वे बिना किसी दबाव के शिक्षा प्राप्त कर सकें।

शिक्षा को नई दिशा

नीरू यादव का मानना है कि छोटे बच्चों के लिए किताबों की बजाय विजुअल और एक्टिविटी-आधारित लर्निंग अधिक प्रभावी होती है। इसीलिए बाल वाटिका में 'बुक-फ्री लर्निंग' का कॉन्सेप्ट अपनाया गया है। यहां बच्चे खेल-खेल में सीखनें का मजा लेते हैं, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया और भी मजेदार हो जाती है।

शिक्षा के लिए परिवहन सुविधा

ग्रामीण इलाकों में बच्चों को स्कूल भेजने की सबसे बड़ी समस्या उनके घर से स्कूल तक का सफर है। इसे देखते हुए, पांच किलोमीटर तक के दायरे में बच्चों के आने-जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की गई है। इस कदम से अब कोई भी बच्चा सिर्फ दूरी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

संस्कार और आधुनिकता का मेल

बाल वाटिका का डिजाइन इस तरह से किया गया है कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कार और नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराया जा सके। यह पहल सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करेगी।

नीरू यादव का दृष्टिकोण

नीरू यादव का कहना है, "इस राशि को निजी सुख-सुविधाओं पर खर्च करने के बजाय गांव के बच्चों के भविष्य में लगाना मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। बच्चों की मुस्कान और उनकी शिक्षा में योगदान से जो सुकून मिला है, वह किसी भी इनाम से कहीं बड़ा है।" यह बयान उनके समाजसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

नीरू यादव की समाजसेवा की यात्रा

नीरू यादव की समाजसेवा का सफर यहीं खत्म नहीं होता। वह 'हॉकी वाली सरपंच' के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है। अमेरिका में पंचायती राज संस्थाओं पर आयोजित कार्यक्रमों में वह भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनके द्वारा शुरू किए गए ‘बैंक बर्तन’ मॉडल को प्रदेश में अपनाया जा चुका है।

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