सरिस्का टागर रिजर्व का एरिया बढ़ेगा, जोड़े जाएंगे दौसा व जयपुर के गांव

राजस्थान में सरिस्का टाइगर रिजर्व का एरिया बढ़ाने पर विचार चल रहा है। जल्द ही इस पर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। फिर इसे सरकार को भेजा जाएगा।

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Ashish Bhardwaj
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News In Short

  • सरिस्का टाइगर रिजर्व का एरिया बढ़ाने पर विचार
  • राजस्थान सरकार ने सरिस्का पर गठित की कमेटी
  • सरिस्का में जोड़े जा सकते हैं दौसा व जयपुर के कुछ हिस्से
  • प्रस्ताव जल्द ही भेजा जा सकता है सरकार को
  • सरिस्का में वर्ड सैंट्रिक टूरिज्म बढ़ाने पर हो रहा विचार

News In Detail

सुनील जैन@अलवर 

राजस्थान के टाइगर रिजर्व सरिस्का का एरिया बढ़ाया जाएगा। यह कदम बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उठाया जा रहा है। इस टाइगर रिजर्व में पड़ोसी दौसा और जयपुर जिले के
कुछ हिस्सों को जोड़ने का प्रस्ताव है। इस समय सरिस्का में 50 बाघ—बाघिन मौजूद हैं। इनमें 21 शावक हैं।

सरिस्का में जुड़ेंगे दौसा व जयपुर के हिस्से

सूत्रों ने बताया कि सरिस्का टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल बढ़ाकर 1829 वर्ग किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। अभी सरिस्का का क्षेत्रफल 1229 वर्ग किलोमीटर है। इसे बढ़ाने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो गया है। यह प्रस्ताव सरिस्का वन प्रशासन जल्द ही राज्य सरकार को भेज सकती है। 

बाघों की बढ़ती संख्या से प्रस्ताव

सरिस्का के उप वन संरक्षक अभिमन्यु सहारण ने बताया कि यह सही है कि बाघों की बढ़ती संख्या के बाद इस टाइगर रिजर्व का ​एरिया बढ़ाने की जरूरत महसूस हो रही है। इसमें सरिस्का में जयपुर और दौसा के बफर एरिया को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने कमेटी गठित कर दी है। 

600 वर्ग किलोमीटर एरिया बढ़ेगा

अधिकारियों के अनुसार, सरिस्का टाइगर रिजर्व में जयपुर और दौसा जिले का करीब 600 वर्ग किलोमीटर एरिया जोड़े जाने का प्रस्ताव है। अगर यह प्रस्ताव पास हो गया है, तो सरिस्का का एरिया बढ़कर 1829 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सरिस्का का एरिया बढ़ने पर जो नए शावक अपनी टेरिटरी बढ़ाएंगे, उनके लिए जंगल का विस्तार बहुत जरूरी हो गया है। 

सरिस्का में हैबिटेट इंप्रूव जरूरी

सहारण ने बताया कि टाइगर रिजर्व में हैबिटेट इंप्रूव भी बहुत जरूरी है। प्रस्तावित बढ़े हुए एरिया में गांवों का विस्थापन जरूरी है। इस पर फोकस चल रहा है। सरकार ने अपनी पॉलिसी भी चेंज की है। विलेज रीलोकेशन के तहत सुकोला गांव का दोबारा सर्वे कराया गया है। अगले सत्र में इसको विस्थापित कर दिया जाएगा।  

बर्ड सेंट्रिक टूरिज्म पर फोकस 

सरिस्का के जंगलों में टाइगर टूरिज्म के साथ ही बर्ड सेंट्रिक टूरिज्म बढ़ाने पर विचार हो रहा है। यह संभावना सिलीसेढ़ झील के रामसर साइट में शामिल होने के बाद ज्यादा बढ़ गई है। सरिस्का प्रशासन भी चाहता है कि सिलीसेढ़ के अलावा सरिस्का के एरिया में पड़ने वाली कई झीलों को रामसर साइट में शामिल किया जाए, जिससे पक्षियों के लिए अच्छा क्लाइमेट मिले। 

हर साल आते हैं विदेशी पक्षी 

कोशिश यह की जाएगी कि जिस तरह भरतपुर का केवला उद्यान (घना पक्षी विहार ) पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, उसी तरह सरिस्का को भी विकसित किया जाए। सरिस्का में कई झील ऐसी हैं, जहां लगातार पानी रहता है। यहां पक्षियों के अनुसार अच्छा क्लाइमेट भी उपलब्ध है। सरिस्का में करना का बास, मंगलसर, मानसरोवर बांध, सिलीसेढ़ और वाटर बॉडी कांकबाड़ी फोर्ट में कई विदेशी पक्षियों का प्रवास देखा गया है।

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