/sootr/media/media_files/2026/01/31/rajasthan-roadvaj-2026-01-31-18-51-39.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान रोडवेज में भ्रष्टाचार के नेटवर्क का हुआ पर्दाफाश।
- 'ऑपरेशन क्लीन राइड' में गिरोह के 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार।
- गिरोह कंडक्टरों को फ्लाइंग टीम की लोकेशन बता रहा था।
- गिरोह का मास्टरमाइंड नरेंद्र सिंह राजावत हैं। यह झालावाड़ से निर्दलीय पार्षद है।
- पुलिस ने इस 12 लाख रुपये, 3 लग्जरी कारें, और अन्य सामान बरामद किया।
News In Detail
राजस्थान रोडवेज में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। झालावाड़ पुलिस ने 'ऑपरेशन क्लीन राइड' के तहत एक गिरोह का पर्दाफाश किया हैं। यह गिरोह रोडवेज के कंडक्टरों को फ्लाइंग टीम की लोकेशन बताने का काम करता था। गिरोह का नेटवर्क केवल झालावाड़ तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जयपुर, कोटा, अजमेर और चित्तौड़गढ़ जैसे शहरों तक फैला हुआ था।
पुलिस ने किया स्टिंग ऑपरेशन
झालावाड़ पुलिस को एक महीने पहले गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली। एसपी अमित कुमार ने इस पर सख्त कदम उठाते हुए प्रोबेशनर आरपीएस कमल कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। पुलिसकर्मी हेमराज और केतन ने साधारण यात्री बनकर रोडवेज बसों में सफर किया और कंडक्टरों की डीलिंग का 'स्टिंग ऑपरेशन' किया। उनके द्वारा बनाए गए गोपनीय वीडियो ने इस गिरोह के कामकाज के तरीके को उजागर कर दिया।
मास्टरमाइंड नरेंद्र सिंह राजावत
गिरोह का सरगना कोई सामान्य अपराधी नहीं था। बल्कि यह व्यक्ति खुद को राजनीतिक दबदबा रखने वाला था। गिरोह का मास्टरमाइंड, नरेंद्र सिंह राजावत है। वह झालावाड़ नगर परिषद का निर्दलीय पार्षद है। वह रोडवेज महकमे में अपनी मर्जी से कंडक्टरों और चालकों की ड्यूटी लगवाता था। उसकी मां रोडवेज में कार्यरत थी। इससे वह विभाग के हर पहलू से वाकिफ था।
कोडवर्ड 'एसटीडी गिरोह'
यह गिरोह 'एसटीडी' कोडवर्ड का इस्तेमाल करता था। इसका नाम पहले एसटीडी फोन के आधार पर पड़ा था। गिरोह के सदस्य फ्लाइंग टीम की लोकेशन का पता लगाते और कंडक्टरों को तुरंत सूचित कर देते थे। इसके बदले कंडक्टर से रोजाना 1500-2000 रुपये वसूले जाते थे। कंडक्टर यात्रियों से बिना टिकट यात्रा कराकर इस राशि को वसूल लेता था। इस कारण रोडवेज के राजस्व में बहुत नुकसान हो रहा था।
पुलिस ने की बड़ी बरामदगी
पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ छापेमारी की हैं। इसमें पार्षद नरेंद्र सिंह राजावत सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं। पुलिस ने 12 लाख रुपये नकद, 3 लग्जरी कारें, 2 मोटरसाइकिलें, 15 मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्पाई कैमरा पेन, चेक बुक्स, एटीएम कार्ड, और रोडवेज की मोहरें जब्त की।
अधिकारियों पर दबाव और ब्लैकमेलिंग
गिरोह के सदस्यों का आपराधिक रिकॉर्ड भी बहुत गहरा था। उन्होंने 2022 में यातायात प्रबंधक के साथ बुरी तरह मारपीट की थी। ये गिरोह अधिकारियों को डरता-धमकाया था। उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी। गिरोह का सरगना नरेंद्र सिंह पहले से ही कई आपराधिक मामलों में आरोपी था।
निष्कर्ष और सरकारी कार्रवाई
इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि राजस्थान रोडवेज में भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है और सरकार को इसे जड़ से खत्म करने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया कि रोडवेज में एक संगठित गिरोह सक्रिय था जो बिना किसी डर के सरकारी धन का गबन कर रहा था।
ये भी पढ़े:-
एमपी, सीजी और राजस्थान में बारिश का अलर्ट, तीनों राज्यों में शीतलहर के साथ और बढ़ेगी ठंड
विधानसभा में रविंद्र सिंह भाटी का आरोप: पश्चिम राजस्थान में 50 लाख खेजड़ी काटने की तैयारी
राजस्थान में 804 पदों पर बंपर भर्ती, 12वीं से ग्रेजुएट तक करें अप्लाई
गूगल की मदद से 30 साल बाद फ्रांसीसी दंपती पहुंचे राजस्थान के गांव, जानें क्या है मामला
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us