सुप्रीम कोर्ट: APO भर्ती 2024 में आवेदन की अंतिम तिथि तक लॉ डिग्री अनिवार्य, हाईकोर्ट का आदेश रद्द
News In Short
- RPSC APO में फाइनल ईयर के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा आवेदन की अंतिम तिथि 12 अप्रैल 2024 तक डिग्री अनिवार्य।
- हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए SC ने कहा, विज्ञापन की भाषा में सब कुछ स्पष्ट।
- इस फैसले के बाद चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता खत्म होगी और प्रशासनिक बोझ घटेगा।
- RPSC ने 7 मार्च 2024 में 181 APO पदों का विज्ञापन जारी किया था।
News In Detail
Ajmer: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2024 मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अपील को स्वीकार कर लिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि इस भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास अनिवार्य रूप से लॉ (विधि स्नातक) की डिग्री होनी चाहिए। यदि कोई अभ्यर्थी अंतिम तिथि तक डिग्री धारक नहीं है, तो उसका आवेदन अमान्य माना जाएगा।
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस पिछले आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिसमें लॉ के फाइनल ईयर में पढ़ रहे छात्रों को APO परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद RPSC द्वारा 7 मार्च 2024 को जारी किए गए APO के 181 पदों के विज्ञापन से शुरू हुआ। इस विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि लॉ ग्रेजुएट की डिग्री इस पद के लिए एक अनिवार्य योग्यता है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया, जिनकी लॉ की डिग्री आवेदन की अंतिम तिथि तक पूरी नहीं हुई थी और वे अंतिम वर्ष में अध्ययनरत थे।
बाद में, RPSC ने एक शुद्धिपत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट की कि जिन अभ्यर्थियों के पास आवेदन की अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है, वे अपने आवेदन वापस ले लें। आयोग के इस निर्णय को प्रभावित अभ्यर्थियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट का निर्णय और RPSC की अपील
राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 15 जनवरी 2025 को और बाद में खंडपीठ ने 12 अगस्त 2025 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट का मत था कि यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा की तिथि तक अपनी डिग्री प्राप्त कर लेता है, तो उसे भर्ती के लिए पात्र माना जा सकता है। हाईकोर्ट के इस फैसले से असहमत होते हुए और चयन प्रक्रिया में नियमों की स्पष्टता बनाए रखने के लिए, RPSC ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने RPSC की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
पुराना प्रावधान हटा दिया गया है: पीठ ने स्पष्ट किया कि राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम, 1978 के नियम 12 में एक प्रावधान था जो अंतिम वर्ष के छात्रों को आवेदन करने की छूट देता था। हालांकि, इस प्रावधान को अक्टूबर 2002 में ही हटा दिया गया था। इसलिए, वर्तमान में ऐसी कोई छूट कानूनी रूप से उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन की भाषा स्पष्ट: अदालत ने माना कि भर्ती विज्ञापन की भाषा बिल्कुल स्पष्ट थी। नियमों के अनुसार, किसी भी अभ्यर्थी की योग्यता का आंकलन आवेदन के समय जमा किए गए या उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता और प्रशासनिक बोझ: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अभ्यर्थियों को इंटरव्यू या बाद की किसी तिथि तक योग्यता हासिल करने की छूट दी जाती है, तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया में भारी अनिश्चितता पैदा होगी। इसके अलावा, इससे आयोग पर अपात्र उम्मीदवारों के आवेदन प्रोसेस करने का अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ भी पड़ेगा।
अपात्र अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, अब केवल वही अभ्यर्थी सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती की चयन प्रक्रिया में बने रहेंगे, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि तक लॉ की डिग्री उपलब्ध थी। RPSC के सचिव रामनिवास मेहता ने पुष्टि की है कि न्यायालय ने हाईकोर्ट के उन आदेशों को निरस्त कर दिया है जिन्होंने अपात्र अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी।
गौरतलब है कि APO के 181 पदों के लिए आयोग को 52 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 19 जनवरी 2025 को और मुख्य परीक्षा 1 जून 2025 को आयोजित की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 4 मई को सुनाया था, जिसे RPSC द्वारा आज सार्वजनिक किया गया है। यह फैसला भविष्य की अन्य सरकारी भर्तियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर बनेगा।
ये भी पढ़ें:-
कलेक्ट्रेट में कुर्की की कार्रवाई, कलेक्टर की कुर्सी-मेज सील, कोर्ट आदेश की अवहेलना का मामला
WAPCOS के पूर्व सीएमडी आरके अग्रवाल पर CBI जांच का शिकंजा, राजस्थान से जुड़े भ्रष्टाचार के तार
बंगाल में मारवाड़ियों का बजा डंका, भाजपा के टिकट पर पांच प्रवासी राजस्थानी जीते
सीबीएसई की नई मूल्यांकन प्रणाली, अब रटने की जगह सीखने का होगा आकलन