सुप्रीम कोर्ट ने RPSC के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत रद्द की
News In Short
- सुप्रीम कोर्ट ने RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत रद्द की।
- कटारा पर सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक करने का आरोप।
- सरकार ने कोर्ट में कटारा के खिलाफ पांच लंबित मामलों का खुलासा किया।
- कटारा ने पेपर लीक के बाद सबूत जलाकर उन्हें मिटाने की कोशिश की।
- कटारा के खिलाफ अन्य मामले भी हैं, जमानत मिलने के बावजूद जेल में ही रहा।
News In Detail
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत को रद्द कर दिया है। यह वही कटारा है, जिस पर सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा का पेपर परीक्षा से 60 दिन पहले ही लीक कर देने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
जमानत तो मिली थी, लेकिन
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने 9 फरवरी को कटारा को अंतरिम जमानत दी थी। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकी। राजस्थान सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा के माध्यम से काउंटर एफिडेविट दायर कर जमानत रद्द करने की मांग की। सरकार ने अदालत में ऐसे तथ्य रखे कि सुनवाई के बाद बेंच ने अंतरिम जमानत को खारिज करने का फैसला सुना दिया।
सरकार ने कोर्ट में खोल दिए 'पांच मामलों' के पन्ने
सरकार की तरफ से दायर काउंटर एफिडेविट में चौंकाने वाले खुलासे हुए। बताया गया कि कटारा के खिलाफ 5 मामले लंबित हैं, जिनमें से एक मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) में भी दर्ज है। यानी कटारा सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई पेपर लीक मामलों में फंसा हुआ है।
सरकार का तर्क था कि आरोपी आरपीएससी का सदस्य रहते हुए पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामले में शामिल है। अगर उसे जमानत मिलती है तो जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उसकी न्यायिक हिरासत जरूरी है। कोर्ट ने सरकार की इस दलील को अहम माना कि अंतरिम जमानत एक अस्थायी और विवेकाधीन राहत है, जिसे बाद में उत्पन्न परिस्थितियों के आधार पर निरस्त किया जा सकता है।
60 दिन पहले ही लीक हो गया था पेपर, रजिस्टर जलाकर मिटाए सबूत
चार्जशीट में खुलासा हुआ था कि 24 दिसंबर 2022 को होने वाली सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा का पेपर अक्टूबर में ही लीक हो गया था। कटारा पर आरोप है कि पेपर तैयार होते ही वह सभी सेट की मूल कॉपी अपने सरकारी आवास पर ले गया। इसके बाद कटारा ने अपने भांजे विजय डामोर से सभी सवाल एक रजिस्टर में लिखवा लिए। फिर यह रजिस्टर उसने शेर सिंह मीणा को दे दिया। शेर सिंह ने रजिस्टर की फोटो खींची, फोटो से पेपर टाइप करवाकर गिरोह को बेच दिया। और फिर सबूत मिटाने के लिए वह रजिस्टर जला दिया गया!
जमानत तो मिली, लेकिन जेल से बाहर नहीं आए
हैरान करने वाली बात यह है कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद भी कटारा जेल से बाहर नहीं आ सका। क्योंकि वह एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले और ईडी के मामले में भी गिरफ्तार है। ईडी मामले में उसे जमानत नहीं मिली थी। यानी एक मामले में जमानत मिलने के बावजूद दूसरे मामलों में वह फंसा हुआ था।
राज्य सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से रखा और सुप्रीम कोर्ट ने कटारा की अंतरिम जमानत रद्द कर दी। इस मामले में राज्य की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय, एएजी शिव मंगल शर्मा के अलावा एडवोकेट अनिशा रस्तोगी और सोनाली गौर ने भी अदालत में राज्य का पक्ष रखा। अब ये देखना होगा कि कटारा इस मामले में अगली कानूनी लड़ाई कैसे लड़ेगा। हालांकि, यह साफ है कि पेपर लीक के इस सनसनीखेज मामले में अब और भी नए मोड़ आ सकते हैं और कई महत्वपूर्ण घटनाएं घट सकती हैं।
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