निलंबित RAS व डमी कैंडीडेट हनुमानाराम को सुप्रीम कोर्ट की जमानत से इंकार
News In Short
- सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के निलंबित आरएएस अधिकारी हनुमानाराम की जमानत याचिका की खारिज।
- आरोपी के खिलाफ राज्य सरकार ने अपनाया सख्त रुख
- कोर्ट ने कहा कि हनुमानाराम का कृत्य गलती नहीं बल्कि निरंतर आचरण है।
- हनुमानाराम पर आरोप है कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बनकर दी परीक्षा।
- जांच में हनुमानाराम की संगठित अपराधों से गहरी संलिप्तता के मिले पुख्ता सबूत।
News In Detail
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के निलंबित आरएएस अधिकारी हनुमानाराम को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बैंच में हुई इस सुनवाई में राज्य सरकार ने आरोपी के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया।
यह तो राज्य को ही बेच खाता
सरकार की ओर कहा गया कि प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हनुमानाराम जैसा व्यक्ति यदि इस तरह के संगठित अपराधों में लिप्त पाया जाता है तो वह पूरे सरकारी तंत्र और लोक प्रशासन की नींव के लिए गंभीर खतरा है। यदि ऐसा भ्रष्ट अधिकारी अपने पद पर बना रहता है तो वह भविष्य में राज्य को ही बेच देता।
गलती नहीं बल्कि आचरण का आईना है
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने टिप्पणी की है कि आरोपी का कृत्य केवल एक आकस्मिक गलती नहीं है। बल्कि उसके निरंतर आचरण को दर्शाता है। हनुमानाराम पर आरोप है कि उन्होंने एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग व्यक्तियों के स्थान पर डमी अभ्यर्थी बनकर प्रतियोगी परीक्षाएँ दीं। कोर्ट ने सरकार के इन तथ्यों को स्वीकार किया कि आरएएस जैसे उच्च पद पर चयनित व्यक्ति द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर प्रहार करना अक्षम्य है। इसलिए उसे इस स्तर पर जमानत का कोई कानूनी अधिकार नहीं होना चाहिए।
मेधावी छात्र से डमी कैंडीडेट तक
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हनुमानाराम खुद एक अत्यंत मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने आरएएस परीक्षा 2018 में पूरे प्रदेश में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य भर्ती परीक्षा में वे दूसरे स्थान पर रहे थे। अपनी इसी शैक्षणिक योग्यता का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2021 और पटवारी भर्ती परीक्षा 2021 के विभिन्न चरणों में डमी कैंडिडेट बनकर असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी। सॉलिसिटर जनरल और अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि हालांकि प्रारंभिक एफआईआर में उनका नाम नहीं था, लेकिन जांच के बाद एक बड़े परीक्षा घोटाले और संगठित रैकेट में उनकी गहरी संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले हैं।
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