सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, होटल कंपनी को 9000 वर्गमीटर जमीन देने के आदेश पर रोक

Mukesh Sharma | Sept 07, 2026, 19:47 IST
जयपुर एयरपोर्ट प्लाजा में होटल को 9000 वर्गमीटर जमीन आवंटन पर SC ने रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के एयरपोर्ट प्लाजा में साई दर्शन होटल को 9000 वर्गमीटर जमीन देने के राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर जेडीए की अपील पर रोक लगाकर अगली सुनवाई नवंबर में तय की है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के आवंटन आदेश पर रोक लगाई।
  • हाई कोर्ट ने होटल को 9000 वर्गमीटर जमीन देने का दिया था आदेश।
  • सरकार का आरोप,तत्कालीन मंत्री को रिश्वत देकर कराया था अवैध आवंटन।
  • मामले में अगली सुनवाई अब नवंबर में होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने एयरपोर्ट प्लाजा में साई दर्शन होटल को बेशकीमती जमीन देने के राजस्थान हाई कोर्ट आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस संजय कुमार व जस्टिस संजीव सचदेवा ने यह आदेश जयपुर विकास प्राधिकरण की अपील पर दिए।



राजस्थान हाई कोर्ट ने दिए थे जमीन आवंटित करने के आदेश

जेडीए के एडवोकेट अमित कुड़ी ने बताया कि राजस्थान हाई कोर्ट ने 16 मार्च, 2026 को जेडीए की अपील खारिज करते हुए साईं दर्शन होटल प्रा.लि.को एयरपोर्ट प्लाजा में जमीन अवाप्ति के बदले मुआवजे के तौर पर 9000 वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन आवंटित करने के आदेश दिए थे।



जेडीए ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए नवंबर में अगली सुनवाई तय की है।



यह है मामला

21 अगस्त 1969 को सरकार ने ग्राम चैनपुरा, तहसील सांगानेर की 23 बीघा 16.5 बिस्वा जमीन (खसरा नं. 35 से 43 आदि) को अवाप्त किया था।



9 अप्रैल 1981 को भू-अवाप्ति अधिकारी ने मूल खातेदारों (अयोध्या प्रसाद एवं दौलत बाबू) के पक्ष में 1,38,180 रुपए प्रत्येक का मुआवजा तय किया। रेफरेंस कोर्ट ने 24 मार्च 1990 को मुआवजे की दर 6,000 रुपए प्रति बीघा से बढ़ाकर 24,000 रुपए प्रति बीघा कर दी।



लेकिन इस बढ़ी हुई राशि का भुगतान खातेदारों को नहीं किया गया और न ही अदालत में जमा कराया गया। इससे पहले ही जेडीए ने 22 अक्टूबर 1983 को जमीन का कब्जा ले लिया था।



मेसर्स साईं दर्शन होटल्स एंड मोटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने खातेदारों से उनके अधिकार खरीद लिए। राजस्थान सरकार की 2001 और 2002 की पॉलिसी के अनुसार अवाप्त जमीन के बदले खातेदार को सभी मुकदमे वापिस लेने पर 15 फीसदी विकसित जमीन देने का प्रावधान है।



होटल कंपनी ने इस पॉलिसी के अनुसार 15 फीसदी विकसित जमीन मांगी। सरकार के आदेश पर 2003 में कंपनी को एयरपोर्ट प्लाजा में 9000 वर्गमीटर जमीन आवंटित करने के आदेश हो गए​ थे।



आवंटन आदेश हुआ स्थगित

राजस्थान सरकार ने 23 जून,2009 को आवंटन आदेश को स्थगित कर दिया था। लेकिन हाईकोर्ट की एकलपीठ ने होटल कंपनी के पक्ष में फैसला दिया। जेडीए ने एकलपीठ के फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी थी।



रिश्वत देकर लिया था आदेश

खंडपीठ में सरकार ने कहा कि संबंधित कंपनी ने तत्कालीन मंत्री व अन्य लोगों को रिश्वत देकर आवंटन आदेश लिया था। सरकार को जमीन आवंटन का अधिकार ही नहीं था क्यों कंपनी का जमीन से कोई लेना-देना नहीं है।



जमीन अवाप्त है व जेडीए कब्जा ले चुकी है। होटल कंपनी से रिश्वत लेने वाले मंत्री व अन्य की मृत्यु होने पर मामला भले ही खत्म हो गया हो। लेकिन,इससे होटल कंपनी को जमीन लेने का कोई अधिकार नहीं मिल जाता।



खंडपीठ ने 16 मार्च, 2026 को जेडीए की अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को बहाल रखा था। खंडपीठ ने मैसर्स साईं दर्शन होटल्स एंड मोटल्स प्राइवेट लिमिटेड एयरपोर्ट प्लाजा में 9000 वर्गमीटर जमीन आवंटित करने के आदेश दिए थे। इस आदेश को जेडीए ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।



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