BJP पार्षदों के कैंप में पहुंचने पर भड़के टीकाराम जूली, ASP को फटकारा; DG को किया फोन!

Jyoti Mahender Bhardwaj | Sept 21, 2026, 14:36 IST
कांग्रेस पार्षदों के कैंप पर विवाद, जूली के आरोप
राजस्थान में नगर निकायों के बोर्ड गठन से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं

समझें क्या है पूरा मामला

  • पार्षदों के कैंप में घुसने पर भड़के जूली!
  • ASP से तीखी बहस, DG को लगाया फोन।
  • जूली का गुस्सा देख पुलिस अधिकारी भी घिरे।
  • निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस-BJP में घमासान।
  • वीडियो में पुलिस पर सवाल उठाते दिखे जूली।

सीकर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी घमासान बढ़ गया है। लोसल नगरपालिका के कांग्रेस पार्षदों के कैंप में भाजपा समर्थकों के पहुंचने के आरोपों के बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में जूली पुलिस अधिकारियों से तीखे अंदाज में सवाल करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने मामले को लेकर राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DG) से भी संपर्क किया।



जूली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पार्षदों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।



लोसल में पार्षदों के कैंप में घुसने की कोशिश का आरोप

टीकाराम जूली ने सीकर जिले की लोसल नगरपालिका का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के पार्षद लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के धानणी गांव में कैंप कर रहे हैं। जूली का आरोप है कि भाजपा समर्थक और लोसल नगरपालिका के प्रत्याशी वहां पहुंचे और कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि पार्षदों को धमकाने और उन्हें अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है।



इससे पहले भी धानणी गांव में कांग्रेस पार्षदों के कैंप के बाहर भाजपा समर्थकों के पहुंचने और अंदर जाने की कोशिश को लेकर विवाद सामने आया था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



तिजारा के करीब 18 पार्षदों को रोकने का दावा

जूली ने खैरथल-तिजारा जिले के तिजारा नगरपालिका क्षेत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश से लौट रहे कांग्रेस गुट के करीब 18 पार्षदों को हरियाणा सीमा पर रोक लिया गया।



उनके अनुसार, पार्षदों को मतदान से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने राजस्थान और केंद्रीय चुनाव आयोग में शिकायत करने की बात कही है।



तिजारा में सभापति पद के चुनाव से पहले पार्षदों को रोके जाने के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विरोध भी जताया। हालांकि, पूरे मामले में संबंधित प्रशासन और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।



पुलिस और प्रशासन पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप

टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पुलिस, प्रशासन और अन्य सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए कर रही है।



उन्होंने कहा कि पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, न कि निर्वाचित पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए। जूली ने दावा किया कि पार्षद चाहे किसी दूसरे राज्य में हों, जंगल में हों या होटल में, पुलिस उन्हें खोज लेती है। लेकिन अपराधियों के खिलाफ इसी तरह की सक्रियता दिखाई नहीं देती।



जूली ने इस स्थिति को सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल बताया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



मालाखेड़ा में कार्रवाई को लेकर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने अलवर जिले की मालाखेड़ा नगरपालिका से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड नंबर 5 से चुने गए कांग्रेस पार्षद मनीष बलाई के घर पटवारी पहुंचा और जमीन की नाप-जोख की गई।



उन्होंने वार्ड नंबर 13 के कांग्रेस पार्षद महेश चंद्र के खिलाफ जीएसटी कार्रवाई का भी दावा किया। इसके अलावा, जूली ने थानागाजी में केमिस्ट की दुकानों पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की कार्रवाई और बड़ौद में कांग्रेस के चेयरमैन पद के प्रत्याशी की जमीन को लेकर राजस्व अधिकारियों के पहुंचने का आरोप लगाया।



जूली ने सवाल उठाया कि क्या सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल निकाय चुनाव के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। इन मामलों में संबंधित विभागों का पक्ष इस बयान में उपलब्ध नहीं है।



मुख्यमंत्री पर भी साधा निशाना

टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “कुर्सी आज तुम्हारी है, इतना गुरूर मत करना। जनता की अदालत में सबकी पेशी लगती है।”



उन्होंने राजस्थान में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निकाय चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं। जूली ने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए दबाव की राजनीति अपनाने से सरकार और प्रशासन की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।



चुनाव आयोग से शिकायत का दावा

जूली ने बताया कि उन्होंने राजस्थान चुनाव आयोग से बातचीत करने के साथ लिखित शिकायत भी दी है। इसके अलावा, केंद्रीय चुनाव आयोग को शिकायत भेजने की बात कही।



उन्होंने कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया के दौरान पार्षदों को प्रभावित किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर सवाल है। निकाय प्रमुखों के चुनाव के बीच कांग्रेस और भाजपा के बीच पार्षदों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।



फिलहाल, जूली के आरोपों पर सरकार की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है। मामले में प्रशासनिक जांच या आधिकारिक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।



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