जब सिर्फ 4 घंटे के लिए अधिकारी को मिला दो शहरों का जिम्मा, आदेश देखकर सब रह गए दंग

Ashish Bhardwaj | May 16, 2026, 15:57 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान आवासन मण्डल का एक आदेश पूरे विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरत की बात यह है कि 16 दिन के ठप पड़े काम को पूरा करने के लिए एक अधिकारी को केवल चार घंटे का समय दिया गया।

News In Short

  • उदयपुर में 16 दिन से ठप पड़ा था प्रशासनिक और वित्तीय काम।
  • भीलवाड़ा के संजय कुमार खरे को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
  • आदेश जिस दिन जारी हुआ, उसी दिन खत्म हो गया।
  • अधिकारी को काम निपटाने के लिए केवल 4 घंटे का समय मिला।
  • अधिकारी कुछ प्लान बनाते, इतने में समय अवधि पूरी हो गई।

News In Detail

राजस्थान सरकारी महकमों में अजीबोगरीब आदेशों का आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन राजस्थान आवासन मंडल (Rajasthan Housing Board) ने हाल ही में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने प्रशासनिक गलियारों में हैरत का एक नया रिकॉर्ड बना दिया है।



उदयपुर में पिछले 16 दिनों से ठप पड़े वित्तीय और प्रशासनिक कामों को निपटाने के लिए जयपुर मुख्यालय ने एक ऐसा आदेश जारी किया, जिसे देखकर लोग हैरान हैं कि यह कोई गंभीर सरकारी फैसला था या कोई प्रशासनिक सर्कस।



​क्या है पूरा मामला?

मामला उदयपुर और भीलवाड़ा वृत्त से जुड़ा है। उदयपुर आवासन मंडल में पिछले आधे महीने से भी ज्यादा समय (16 दिन) से फाइलें धूल खा रही थीं। वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा था। इस डेडलॉक को तोड़ने के लिए जयपुर स्थित मुख्यालय ने शुक्रवार को एक नया फरमान जारी किया।



​सचिव गोपाल सिंह द्वारा जारी इस आदेश के तहत भीलवाड़ा में तैनात परियोजना अभियंता संजय कुमार खरे को उदयपुर वृत्त के उप आवासन आयुक्त और आवासीय अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। यहाँ तक तो सब ठीक था, असली ट्विस्ट इसके आगे आता है।



उसी दिन शुरू, उसी दिन खत्म

​इस आदेश में जो पेंच फंसा, उसने इस पूरी कवायद को एक मजाक बना दिया। ​आदेश जारी होने की तारीख 15 मई थी। ​रोचक बात यह है कि अधिकारी के कार्यकाल की अंतिम तारीख भी 15 मई थी। ​यानी जिस दिन अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई, उसी दिन उनका कार्यकाल समाप्त भी हो गया। यह अपने आप में एक अनोखा एक दिनी मुख्यमंत्री जैसा आदेश था, लेकिन इसकी असलियत इससे भी कहीं ज्यादा चौंकाने वाली थी।



ड्यूटी खत्म होने से महज 4 घंटे पहले मिला लिफाफा

​मज़े की बात यह रही कि भीलवाड़ा में बैठे अधिकारी संजय कुमार खरे को यह आदेश तब मिला, जब उनकी उस दिन की सरकारी ड्यूटी खत्म होने में महज 4 घंटे का समय बचा था।



​अब जरा भौगोलिक स्थिति और गणित को समझिए। ​भीलवाड़ा से उदयपुर की दूरी लगभग 150 किलोमीटर से अधिक है। यदि कोई व्यक्ति बिना रुके गाड़ी दौड़ाए, तब भी उसे भीलवाड़ा से उदयपुर पहुंचने में कम से कम 2.5 से 3 घंटे का समय लगेगा।


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ऐसे में अधिकारी के पास केवल 1 घंटा बचता। इस 1 घंटे में उन्हें उदयपुर पहुंचकर पदभार ग्रहण करना था, पिछले 16 दिनों से लटकी हुई दर्जनों फाइलों को पढ़ना था, उन पर वित्तीय और प्रशासनिक फैसले लेने थे और फिर अपनी ड्यूटी खत्म कर वापस भीलवाड़ा के लिए रवाना होना था।



​उठ रहे हैं कई तीखे सवाल

इस विचित्र आदेश के बाद अब आवासन मण्डल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ​क्या यह महज़ खानापूर्ति थी? जो काम पूरे 16 दिनों में सीनियर अधिकारी नहीं कर पाए, क्या मुख्यालय को सचमुच लगता था कि कोई अधिकारी भीलवाड़ा से आकर उसे चंद घंटों में जादू की छड़ी घुमाकर पूरा कर देगा?



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