उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को कलेक्टर का नोटिस, वजह हैरान करने वाली
समझें क्या है पूरा मामला
- उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को जोधपुर जिला निर्वाचन अधिकारी से नोटिस मिला।
- नोटिस में चुनाव ड्यूटी में लापरवाही बरतने को लेकर चेतावनी दी गई।
- मन्नालाल रावत का नाम अब तक सरकारी कर्मचारियों की लिस्ट में दर्ज है।
- वे 2024 में VRS लेकर लोकसभा चुनाव लड़े थे और सांसद चुने गए थे।
- नोटिस मिलने पर उदयपुर सांसद मन्नालाल ने सिस्टम पर हैरानी जताई।
उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत से जुड़ा दिलचस्प मामला सामने आया है। उन्हें जोधपुर निर्वाचन अधिकारी की तरफ से कार्रवाई को लेकर नोटिस जारी हुआ। इस नोटिस में चुनाव ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
सांसद मन्नालाल रावत लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले परिवहन विभाग में एडिशनल कमिश्नर थे। वे जोधपुर में भी तैनात रह चुके हैं। मार्च 2024 में उन्होंने वीआरएस लेकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद वे उदयपुर से सांसद चुने गए थे।
इसके बावजूद उनका नाम अब भी जोधपुर जिले के सरकारी कर्मचारियों की सूची में दर्ज है। इसी वजह से उन्हें निर्वाचन विभाग का नोटिस मिल गया।
नोटिस में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत से क्या मांगा गया?
जोधपुर जिला परिषद सीईओ और कार्मिक प्रकोष्ठ प्रभारी आशीष कुमार मिश्रा के कार्यालय ने गुरुवार शाम यह नोटिस जारी किया। नोटिस में सांसद मन्नालाल रावत से उनके कार्यालय के कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई।
यह जानकारी सरकारी पोर्टल पर शुक्रवार दोपहर तीन बजे तक अपडेट करनी थी। ऐसा न करने पर इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 134 के तहत अपराध माने जाने की बात लिखी गई थी। इसमें कार्रवाई का प्रावधान भी है।
सरकारी कर्मचारियों की सूची अपडेट नहीं होने से हुई गलती
सीईओ आशीष कुमार मिश्रा के मुताबिक ईएमएस पोर्टल पर कर्मचारियों की जानकारी 1 अगस्त तक अपडेट होनी थी। 13 अगस्त तक एनआईसी से मिली सूची में कई डीडीओ कार्यालयों की जानकारी अधूरी पाई गई।
इसी सूची में संयुक्त यातायात कमिश्नर कार्यालय की जानकारी भी अपडेट नहीं थी। नंबर 129 पर पूर्व अधिकारी के तौर पर रावत का नाम होने के कारण उन्हें नोटिस भेज दिया गया।
सांसद मन्नालाल बोले- फोन पर मिली नोटिस की सूचना
सांसद मन्नालाल रावत ने बताया कि सबसे पहले जोधपुर निर्वाचन शाखा के एक कर्मचारी ने फोन कर उन्हें सूचना दी। इसके बाद गुरुवार शाम साढ़े पांच बजे वॉट्सएप पर नोटिस की कॉपी भेजी गई।
उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में भी निर्वाचन विभाग का डेटा तीन साल पुराना चल रहा। उनके मुताबिक इससे पता चलता है कि सिस्टम आम आदमी और कर्मचारियों का डेटा कैसे मेंटेन करता है। इस घटना के बाद पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारियों पर भी सवाल उठे हैं।
FAQ
- उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को नोटिस क्यों मिला?
जोधपुर निर्वाचन विभाग की सरकारी कर्मचारियों की लिस्ट में सांसद मन्नालाल रावत का नाम अब भी दर्ज था। इसी वजह से उन्हें कार्रवाई का नोटिस भेजा गया। - सांसद मन्नालाल रावत पहले क्या काम करते थे?
वे परिवहन विभाग में एडिशनल कमिश्नर थे और जोधपुर में भी पोस्टेड रहे। 2024 में वीआरएस लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था। - जोधपुर जिला परिषद सीईओ ने नोटिस को लेकर क्या कहा?
ईएमएस पोर्टल पर सरकारी कर्मचारियों की जानकारी 1 अगस्त तक अपडेट होनी थी, जो नहीं हुई थी। मौजूदा लिस्ट में पूर्व अधिकारी के तौर पर मन्नालाल रावत का नाम होने के कारण नोटिस भेज दिया गया।
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