इकट्ठे 23 रसल वाइपर सांप ट्यूबवेल में मिले, रेस्क्यू कर जंगल छोड़ा
समझें क्या है पूरा मामला
- उदयपुर में ट्यूबवेल चैंबर से एक साथ 23 जहरीले सांप रेस्क्यू किए गए।
- सभी सांप रसल वाइपर प्रजाति के थे, जिसमें एक मादा और उसके 22 बच्चे थे।
- रेस्क्यू टीम ने पूरी सावधानी से एक-एक कर सांपों को चैंबर से बाहर निकाला।
- सभी 23 सांपों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
- रसल वाइपर अंडे नहीं देता, सीधे बच्चों को जन्म देता है।
राजस्थान के उदयपुर के ढीकली गांव में बुधवार को एक खेत के ट्यूबवेल चैंबर से रसल वाइपर प्रजाति के 23 जहरीले सांपों का रेस्क्यू किया गया। इनमें एक वयस्क मादा और उसके 22 नवजात बच्चे शामिल थे।
उदयपुर वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने सूझबूझ से सभी सांपों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। इस अनोखी घटना से पूरे इलाके में हैरानी और डर का माहौल बन गया। रेस्क्यू के बाद सभी सांपों को वन्यजीवों के अनुकूल प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
ट्यूबवेल खोला तो निकल पड़ा पूरा परिवार
बुधवार की सुबह उदयपुर के ढीकली गांव के एक किसान को खेत में बने ट्यूबवेल के चैंबर में सांप दिखाई दिया। उसने तुरंत उदयपुर वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर को सूचित किया।
सेंटर के संभागीय अध्यक्ष चमन सिंह चौहान अपने साथी लक्ष्मीलाल गमेती के साथ मौके पर पहुंचे। शुरू में लगा एक ही सांप है। लेकिन जैसे-जैसे टीम ने चैंबर की गहरी जांच शुरू की, एक के बाद एक सांप बाहर आने लगे। देखते-देखते यह संख्या 23 तक पहुंच गई।
मां के साथ थे 22 नवजात बच्चे
चैंबर से निकले सभी 23 सांपों की पहचान रसल वाइपर के रूप में हुई। इनमें एक वयस्क मादा और उसके 22 नवजात बच्चे थे। यानी यह ट्यूबवेल का अंधेरा और नमी वाला चैंबर मादा रसल वाइपर के लिए बच्चों को जन्म देने की सुरक्षित जगह बन गया था।
चमन सिंह चौहान ने बताया कि रसल वाइपर की एक खास बात यह है कि यह अंडे नहीं देता। यह सीधे बच्चों को जन्म देता है। इस प्रजाति का प्रजनन काल नवंबर में होता है और जून-जुलाई के शुरुआती दिनों में मादा बच्चों को जन्म देती है।
सावधानी से हुआ रेस्क्यू, जंगल में छोड़ा
चमन सिंह चौहान और लक्ष्मीलाल गमेती ने पूरी सतर्कता के साथ एक-एक सांप को चैंबर से बाहर निकाला। न तो सांपों को चोट लगने दी और न ही टीम के किसी सदस्य को। सभी 23 सांपों को सुरक्षित पकड़कर वन्यजीव अनुकूल प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
चमन सिंह ने गांव वालों को सलाह दी कि मानसून के मौसम में ट्यूबवेल, पुराने चैंबर और खेतों के कोनों में काम करते समय सावधानी बरतें। किसी भी सांप को खुद पकड़ने की कोशिश न करें।
रसल वाइपर क्यों है इतना खतरनाक?
रसल वाइपर भारत के चार सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसे देश में सांप के काटने से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण माना जाता है। इसके जहर का असर बेहद तेज होता है।
इसके काटने के बाद खून का थक्का जमने की प्रक्रिया बिगड़ जाती है, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है। यही वजह है कि खेत में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों के लिए इसका सामना बेहद खतरनाक हो सकता है।
मानसून से पहले बढ़ जाती है सांपों की गतिविधि
विशेषज्ञों के अनुसार जून-जुलाई में मानसून से पहले और बाद में सांपों की गतिविधि बढ़ जाती है। वे सुरक्षित और नम जगह खोजते हैं जहां बच्चों को जन्म दे सकें।
ट्यूबवेल चैंबर, पुरानी दीवारें, पत्थरों के ढेर और अनाज के गोदाम उनके लिए आदर्श जगह बन जाते हैं। उदयपुर जिले में पहले भी कई बार सांप रेस्क्यू की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन एक साथ 23 रसल वाइपर का रेस्क्यू असाधारण माना जा रहा है।
FAQ
- रसल वाइपर क्या है और यह कितना खतरनाक है?
रसल वाइपर (Russell's Viper) भारत के चार सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसके काटने से खून जमने की प्रक्रिया बिगड़ जाती है जिससे गंभीर अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है। यह खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए बेहद खतरनाक है। - रसल वाइपर सांप के बच्चे कैसे पैदा होते हैं?
अधिकांश सांपों की तरह रसल वाइपर अंडे नहीं देता। यह सीधे बच्चों को जन्म देता है। इसका प्रजनन काल नवंबर में होता है और जून-जुलाई में मादा 20 से अधिक नवजात बच्चों को जन्म दे सकती है। - मानसून में सांप क्यों बाहर निकलते हैं?
मानसून से पहले और बाद में सांप गर्म और उमस भरे मौसम में नम व सुरक्षित जगह खोजते हैं। ट्यूबवेल चैंबर, पुरानी दीवारें और खेतों के कोने उनके लिए आदर्श जगह बन जाते हैं। इसीलिए जून-जुलाई में सांप के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
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