हाई कोर्ट ने दो टूक कहा- नौकरी करनी है तो ट्रांसफर के लिए तैयार रहें
Mukesh Sharma | Jun 11, 2026, 12:59 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी सिर्फ गाइडलाइन है, कोई कानून नहीं है। कोर्ट ने CSD कर्मचारी छत्रपाल सिंह की जयपुर से मुंबई ट्रांसफर के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है। CAT का आदेश बरकरार रखा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- CSD के कर्मचारी छत्रपाल सिंह का जयपुर से मुंबई ट्रांसफर विवाद अदालत तक गया।
- उन्होंने दावा किया कि ट्रांसफर उनके पद के अनुरूप नहीं और बदले की कार्रवाई है।
- CAT ने उनकी याचिका खारिज कर दी, विभागीय जरूरतों को आधार बताया।
- राजस्थान हाई कोर्ट ने भी ट्रांसफर को वैध मानते हुए याचिका ठुकरा दी।
- कोर्ट ने कहा कि 2011 की ट्रांसफर पॉलिसी केवल दिशानिर्देश है, कानूनी अधिकार नहीं।
क्यों दी गई चुनौती
मार्च 2023 में उनके अपने अनुरोध पर जयपुर ट्रांसफर हुआ। फिर 3 फरवरी 2025 को विभाग ने उन्हें मुंबई के CSD मुख्य कार्यालय भेज दिया।
कर्मचारी ने क्या दलीलें दीं
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ने 2011 की ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन किया। "सबसे लंबे समय से एक जगह टिके कर्मचारी को पहले भेजा जाए" वाले नियम को नजरअंदाज किया गया। 25 वरिष्ठ कर्मियों को छोड़कर उन्हें निशाना बनाया गया।
सबसे बड़ा आरोप यह था कि यह ट्रांसफर बदले की कार्रवाई है। उन्होंने 2022-23 के बकाया बोनस को लेकर रक्षा मंत्री को ईमेल किया था। साथ ही सूचना का अधिकार (RTI – Right to Information) अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी।
CAT ने क्या कहा था
छत्रपाल फिर CAT गए। 26 मई 2026 को यह नई अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद वे राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचे।
हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
कोर्ट ने साफ कहा - ट्रांसफर सेवा की एक अंतर्निहित शर्त है। इसे लागू करवाने का कर्मचारी को न कानूनी अधिकार है, न मौलिक अधिकार।
एम्प्लॉयर का विवेक सर्वोपरि
CSD का एक LDC यह दावा नहीं कर सकता कि उसे सिर्फ स्टोर यूनिट में ही रखा जाए। प्रशासनिक कार्यालय में काम करने से इनकार करने का उसे कोई अधिकार नहीं है।
2011 की ट्रांसफर पॉलिसी कानून नहीं
जब नीति में खुद यह प्रावधान हो कि प्रशासनिक जरूरत पड़ने पर नियमों से हटा जा सकता है, तो कोर्ट उसमें दखल नहीं दे सकती।
तीन साल से ज्यादा जयपुर में रहे
बदले की कार्रवाई का आरोप खारिज
FAQ
- क्या कोई कर्मचारी अपने ट्रांसफर को कोर्ट में रोक सकता है?
राजस्थान हाईकोर्ट के अनुसार ट्रांसफर रोकना कर्मचारी का कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं है। ट्रांसफर सेवा की अंतर्निहित शर्त होती है। सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही अदालत दखल देती है। - ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन होने पर क्या राहत मिलती है?
ट्रांसफर पॉलिसी को कोर्ट ने दिशानिर्देश माना है, अनिवार्य कानून नहीं। प्रशासनिक जरूरत पड़ने पर विभाग इससे हट सकता है। ऐसे में कर्मचारी को कोर्ट से राहत मिलना मुश्किल होता है। - RTI दाखिल करने के बाद ट्रांसफर हो तो क्या बदले की कार्रवाई मानी जाएगी?
केवल RTI दाखिल करने या शिकायत भेजने से ट्रांसफर को बदले की कार्रवाई नहीं माना जाता। कोर्ट देखती है कि क्या अन्य कर्मचारियों का ट्रांसफर भी उसी आदेश से हुआ। यदि प्रशासनिक आधार स्पष्ट हो तो बदले का आरोप नहीं टिकता।
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