दो करोड़ की रिश्वत के मामले में एसीबी पर गवाह को धमकाने का आरोप, हाईकोर्ट ने वीडियो रिकॉर्डिंग में बयान लेने को कहा
उदयपुर में दो करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले में अब जांच करने वाली एजेंसी एसीबी पर ही सवाल उठे हैं। मामले के एक गवाह ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाकर आरोप लगाया है कि एसीबी के अधिकारी उसे डराकर अपनी मर्जी के मुताबिक बयान दिलवाना चाहते हैं।
इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि गवाह का बयान बिना किसी दबाव के लिया जाए और उसकी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाए। यह मामला एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी और सज्जन सिंह जैन से जुड़ा है। दोनों को सितंबर में रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया था।
गवाह ने कहा- एसीबी के अधिकारी बना रहे दबाव
मामले के गवाह नरेंद्र कुमार टेलर ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी उदयपुर के अधिकारी उन्हें डराकर ऐसा बयान दिलवाना चाहते हैं, जो वह अपनी मर्जी से नहीं देना चाहते।
नरेंद्र कुमार ने कोर्ट से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना था कि वह बिना किसी डर के सच्चाई के आधार पर बयान देना चाहते हैं। हालांकि, एसीबी अधिकारियों पर लगाए गए ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा- बयान लेते समय नहीं होना चाहिए कोई दबाव
याचिका पर सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को जरूरी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच के दौरान नरेंद्र कुमार टेलर का बयान दर्ज करना जरूरी हो, तो जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि गवाह पर किसी तरह का दबाव या डर न हो।
इसके साथ ही कोर्ट ने बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बयान दर्ज करने की प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। कोर्ट के इस आदेश को एसीबी अधिकारियों के खिलाफ आरोप साबित होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। आदेश का उद्देश्य बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखना है।
272 प्लॉट के मामले में एफआर लगाने के बदले मांगी थी रिश्वत
यह पूरा मामला उदयपुर नगर निगम के 272 प्लॉट से जुड़े कथित घोटाले की जांच से जुड़ा है। आरोप है कि इस मामले में एफआर यानी फाइनल रिपोर्ट लगाकर जांच बंद करने और जब्त सामान छोड़ने के बदले दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।
इस मामले में एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी और सज्जन सिंह जैन के नाम सामने आए थे। एफआर का मतलब फाइनल रिपोर्ट होता है। जांच एजेंसी जब किसी मामले में जांच पूरी कर उसे बंद करने की रिपोर्ट अदालत में पेश करती है, तो उसे आम भाषा में खात्मा रिपोर्ट भी कहा जाता है। हालांकि, अंतिम फैसला अदालत का होता है।
सितंबर में हुई थी एडिशनल एसपी की गिरफ्तारी
एसीबी ने 26 सितंबर 2026 को सज्जन सिंह जैन को दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक सज्जन सिंह जैन की भूमिका मुकेश कुमार सोनी के लिए रिश्वत लेने वाले व्यक्ति की थी।
इसके बाद 27 सितंबर को एसीबी ने एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी को भी गिरफ्तार किया था। उन्हें बालोतरा स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान आरोपी को फोर्ड एंडेवर कार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।