नंगे पांव विधानसभा में दिखे भाजपा विधायक, इस संकल्प के लिए छोड़ रखे हैं जूते-चप्पल
News In Short
- राजस्थान में भाजपा विधायक उदयलाल भड़ाणा का अनोखा संकल्प।
- न पहनेंगे जूते और न खाएंगे अन्न, यहां तक बाल भी नहीं कटाएंगे।
- मंदिर का ताला खुलवाने के लिए भड़ाणा ने ले रखा है बड़ा संकल्प।
- मांडलगढ़ के देवनारायण मंदिर पर 48 साल से लगा है ताला।
- विधायक का कहना है कि ताला खुलवाने के लिए विपक्ष भी करे सहयोगा।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गलियारों में एक दृश्य ने सबका ध्यान खींचा। भीलवाड़ा में मांडलगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के विधायक उदयलाल भड़ाणा पूरे सत्र के दौरान नंगे पांव नजर आए। उनकी यह वेशभूषा कोई फैशन या साधारण चुनाव नहीं, बल्कि एक कठिन संकल्प का हिस्सा है। इसे वे नौ महीनों से निभा रहे हैं।
क्या है संकल्प और क्यों त्यागे जूते-चप्पल
विधायक उदयलाल भड़ाणा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र की एक पुरानी और धार्मिक समस्या को सुलझाने के लिए भीष्म प्रतिज्ञा ली है। दरअसल, उनके क्षेत्र में देवनारायण मंदिर 48 साल से बंद पड़ा है।
इस मंदिर पर साल 1977 में एक विवाद के चलते प्रशासन ने ताला लगा दिया था और उसकी चाबियां स्थानीय थाने में जमा करा दी थीं। विधायक का कहना है कि जब तक इस प्राचीन मंदिर के द्वार आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए दोबारा नहीं खोले जाते, तब तक वे जूते या चप्पल नहीं पहनेंगे, अन्न का त्याग करेंगे (वर्तमान में वे केवल फलाहार पर जीवित हैं) और अपने सिर के बाल और दाढ़ी नहीं कटवाएंगे।
विपक्ष को करना चाहिए सहयोग
भड़ाणा ने विपक्ष और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ के चलते मंदिर को खुलवाने के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जनता ने मुझे एक बड़े भरोसे के साथ विधानसभा भेजा है। मेरा कर्तव्य है कि मैं उनकी आस्था का सम्मान करूं। विपक्षी दलों के नेताओं को राजनीति से ऊपर उठकर इस पवित्र कार्य में सहयोग करना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को उनका अधिकार मिल सके।
48 साल पुराना विवाद
मांडलगढ़ में देवनारायण मंदिर का यह विवाद दशकों पुराना है। 1977 में हुए विवाद के बाद से प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर को सील कर दिया था। विधायक भड़ाणा का तर्क है कि इतने साल बाद अब स्थिति सामान्य होनी चाहिए और ताला खोला जाना चाहिए।
जनता के बीच चर्चा का विषय
विधायक के इस रूप की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। समर्थकों का कहना है कि भड़ाणा का यह कदम सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाने का एक अहिंसक और आध्यात्मिक तरीका है।
फिलहाल, यह सवाल बना हुआ है कि विधायक के इस संकल्प के बाद क्या प्रशासन और सरकार 48 साल पुराने इस विवाद का कोई ठोस समाधान निकाल पाती है या विधायक का यह 'वनवास' अभी और लंबा चलेगा।
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