उदयपुर आईजी पर लगे जमीन की जबरन रजिस्ट्री कराने के आरोप, एफआईआर में आया नाम
News In Short
- उदयपुर आईजी के खिलाफ जमीन की जबरन रजिस्ट्री करवाने के आरोप।
- इस्तगासे के आधार पर कोर्ट आदेश से उदयपुर में दर्ज हुई एफआईआर।
- एफआईआर में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों पर भी लगाए गंभीर आरोप।
- आदिवासी की कृषि भूमि में फर्जीवाड़ा करने का लगाया आरोप।
- जांच उदयपुर में एससी-एसटी सेल की डीएसपी नीतू राठौड़ को सौंपी
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के उदयपुर जिले में करोड़ों रुपये की कृषि भूमि को लेकर बड़ेे फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। इसमें उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव, आरपीएस अधिकारी राजेश यादव व एक थानाधिकारी रविंद्र चारण और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों पर जमीन की जबरन रजिस्ट्री करवाने के आरोप लगे हैं। इस मामले में पीड़ित गोपाल भील के इस्तगासे पर उदयपुर की एससी-एसटी मामलों की विशेष कोर्ट ने सुखेर थाने को एफआईआर के आदेश दिए। इसके आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
क्या है पूरा मामला
चित्तौड़गढ़ के गोपाललाल भील ने अदालत में दायर परिवाद में बताया कि उसने उदयपुर की बड़गांव तहसील के मुवाना पटवार हलका के गांव गोडा भुवाणा में कुकी बाई व अन्य से जमीन खरीदी थी। 15 अक्टूबर 2025 को इसकी रजिस्ट्री भी करवा ली थी।
26 अक्टूबर 2025 को जमीन समतल करवाने के लिए परिवादी ने जेसीबी मंगवाई थी। जेसीबी काम कर रही थी। जब वह किसी काम से गया हुआ था, तब कुछ लोग लाठी व कुल्हाड़ी आदि लेकर आए और गाली-गचौच करने लगे। यह लोग जमीन खरीदने का विरोध कर रहे थे। इन लोगों ने काम रुकवा कर सुखेर थाना पुलिस केा बुलवा लिया। पुलिस ने मौके पर मौजूद परिवादी के मित्रों केा शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
परिवादी ने थाने पहुंचकर जमीन के दस्तावेज दिखाकर कहा कि जमीन उसकी है। लेकिन, पुलिस वालों ने एक नहीं सुनी। आरोपी उसे लगातार धमकियां और गालियां देते रहे और जमीन खरीदने का विरोध करते रहे और जान से मारने की धमकी देते रहे।
इस संबंध में परिवादी ने थानाधिकारी सुखेर और एसपी उदयपुर को रिपोर्ट देकर एफआईआर दर्ज करने की गुहार की, लेकिन हेमंत शर्मा के प्रभाव के कारण कुछ नहीं हुआ। उल्टे 17 नवंबर 2025 को पुलिस ने परिवादी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया।
बंधक बनाकर रखा
परिवादी गोपाललाल का आरोप है कि उसे गिरफ्तार करने के बाद यूनिवर्सिटी गैस्ट हाउस में बंधकर बनाकर रखा गया। हेमंत शर्मा ने उसे जान से मारने की धमकियां दी और डराया धमकाया। पुलिस उन खातेदारों केा भी पकड़ लाई, जिनसे परिवादी ने जमीन खरीदी थी और उन्हें भी वहीं बंधक बना लिया।
इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को परिवादी से उसकी जमीन बेचने के दस्तावेजों पर जबरन दस्तखत करवा लिए। दूसरे दिन 4 दिसंबर,2025 को बड़गांव रजिस्ट्री दफ्तर में ले जाकर डिप्टी रजिस्ट्रार द्वितीय सज्जन सिंह की अनुपस्थिति में फोटो खिंचवा दी। इसी दिन हेमंत शर्मा, सतीश जांगिड़, जयप्रकाश योगी और उनके वकील ने जमीन गुमानाराम के नाम करने के लिए सेल एग्रीमेंट बनवाया। इसमें परिवादी को जबरन गवाह के रुप में दिखाया और गुमानाराम के नाम से रजिस्ट्री करवा दी।
आईजी पर ये लगाए आरोप
परिवादी का आरोप है कि इस काम में आईजी गौरव श्रीवास्तव, आरपीएस राजेश यादव, थानाधिकारी रविंद्र चारण, हेड कांस्टेबल नीतेश मेनारिया और कांस्टेबल सुमेर झाकड़ व अन्य दो-तीन पुलिसकर्मी शामिल रहे। इन लोगों ने हेमंत शर्मा के डमी खातेदार गुमानाराम के नाम जबरन जमीन की रजिस्ट्री करवा दी। मामले में पुलिस ने सोमवार को एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले की जांच एससी-एसटी सेल की डीएसपी नीतू राठौड़ को सौंप गई है।
डोटासरा ने उठाए सवाल
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर सियासी आरोप-प्रत्योराप भी शुरू हो गए हैं।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि आईजी स्तर के अधिकारी पर इतने गंभीर आरोप लगना चिंताजनक है। कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होना मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
डोटासरा ने सवाल उठाया कि क्या उदयपुर रेंज में ही जांच होने से निष्पक्षता बनी रहेगी और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि गृह विभाग संभाल रहे सीएम की जिम्मेदारी बनती है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
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