RGHS घोटाला: सीकर में SOG की कार्रवाई से बवाल; दो डॉक्टरों की गिरफ्तारी के विरोध में OPD बंद

Jageshwar prasad | May 05, 2026, 16:30 IST
Photograph: (the sootr)
आरजीएचएस घोटाले में एसओजी द्वारा पूर्व अधीक्षक डॉ. के.के. अग्रवाल और लैब संचालक की गिरफ्तारी के बाद सीकर में डॉक्टरों ने ओपीडी बंद कर प्रदर्शन किया। प्रशासन ने बिना जरूरत महंगी जांचें करवाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप में यह कार्रवाई की है।

News In Short

  • आरजीएचएस फर्जीवाड़े में SOG की कार्रवाई का सीकर में हो रहा है विरोध।
  • SOG ने सीकर अस्पताल के पूर्व अधीक्षक और निजी लैब संचालक को किया था गिरफ्तार।
  • गिरफ्तारी के विरोध में संयुक्त चिकित्सक संघर्ष समिति ने अस्पतालों में ओपीडी बंद रखी।
  • सरकार पहले ही 7 डॉक्टरों को सस्पेंड कर चुकी है, जिन पर कमीशन खोरी का आरोप है।
  • डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि रिहाई नहीं हुई तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े की जांच कर रही स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) की कार्रवाई ने प्रदेश में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोमवार तड़के एसओजी द्वारा सीकर के श्री कल्याण (SK) अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. के.के. अग्रवाल और निजी लैब संचालक डॉ. बी.लाल की गिरफ्तारी के बाद डॉक्टरों ने लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।



SOG की कार्रवाई

ADG (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 7 बजे एसओजी की विशेष टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर मुख्य सूत्रधारों को दबोच लिया है। डॉ. के.के. अग्रवाल को जयपुर के मुरलीपुरा से और डॉ. बनवारी लाल को सीकर के बसंत विहार से गिरफ्तार किया गया।



यह कार्रवाई आरजीएचएस परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल की उस जांच रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए बिना जरूरत महंगी जांचें लिखने का खुलासा हुआ था।



ओपीडी ठप, इमरजेंसी के भरोसे मरीज

गिरफ्तारी की खबर फैलते ही सीकर के डॉक्टरों में भारी रोष व्याप्त हो गया। संयुक्त चिकित्सक संघर्ष समिति के आह्वान पर राजकीय एसके अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गईं। निजी अस्पतालों ने भी एकजुटता दिखाते हुए सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रखीं।



नियमित ओपीडी बंद रहने से दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नियमित डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के बीच रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न ने मोर्चा संभाला और इमरजेंसी सेवाएं जारी रखीं।



विवाद की जड़

एसओजी की जांच में सामने आया है कि डॉक्टरों के एक संगठित गिरोह (सिंडिकेट) ने सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए कमीशन का खेल खेला। मरीजों को HbA1c, RA Factor और Procalcitonin जैसी महंगी जांचें लिखी गईं, जिनका चिकित्सकीय आधार पर कोई औचित्य नहीं था। कई मामलों में टेस्ट की मूल रिपोर्ट और ओपीडी स्लिप पर संबंधित परामर्श के साक्ष्य ही नहीं मिले। इसी आधार पर सरकार ने पहले ही 7 डॉक्टरों को निलंबित कर दिया था।



आंदोलन की चेतावनी

चिकित्सक संगठनों का आरोप है कि एसओजी ने बिना विस्तृत और निष्पक्ष जांच के सीधे गिरफ्तारी की है, जिससे डॉक्टरों का मनोबल गिरा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गिरफ्तार डॉक्टरों की रिहाई नहीं हुई, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज किया जाएगा। फिलहाल, यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और डॉक्टरों के सम्मान के बीच की जंग बन गया है।



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