बिना प्रोत्साहन कैसे सफल होगी वनमित्र योजना, हर पंचायत से होंगे 7 सदस्य
समझें क्या है पूरा मामला
- वन विभाग ने वनमित्र पंजीकरण अभियान फिर शुरू किया, हर पंचायत में 7 सदस्य जरूरी।
- वनमित्रों में दो महिला और पांच पुरुष शामिल करने का लक्ष्य तय किया गया।
- योजना में मानदेय या भत्ते का प्रावधान नहीं होने से उठे सवाल।
- विशेषज्ञों ने बिना आर्थिक सहायता के अभियान के प्रभावी होने पर जताई चिंता।
- वन संरक्षण के लिए ग्रामीण भागीदारी बढ़ाने की पहल, लेकिन चयन प्रक्रिया पर सवाल।
वन विभाग ने वनमित्र पंजीकरण अभियान फिर से शुरू किया है। हर ग्राम पंचायत से कम से कम 7 वनमित्र बनाने होंगे। इनमें दो महिला और पांच पुरुष शामिल करना जरूरी है। लेकिन इस योजना में मानदेय या भत्ते का कोई प्रावधान नहीं है। इसी वजह से योजना पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रदेश में वन संरक्षण के नाम पर वन विभाग ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर वनमित्र पंजीकरण अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।
विभाग ने हर ग्राम पंचायत से न्यूनतम 7 वनमित्रों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इनमें कम से कम दो महिला और पांच पुरुष शामिल होने चाहिए। इसे अब ग्रामीण सेवा शिविरों से भी जोड़ दिया गया है।
आदेश की समय सीमा
मुख्य वन संरक्षक सुनील चिद्री ने गत 30 जून को यह आदेश जारी किया। साथ ही 6 जुलाई तक सभी पंचायतों से वनमित्रों की सूची मांग ली गई है।
हालांकि विभाग की इस पूरी कवायद पर गंभीर नीतिगत सवाल उठ खड़े हुए हैं। योजना में वनमित्रों के लिए किसी प्रकार के मानदेय, भत्ते या बुनियादी सुविधा का कोई प्रावधान नहीं है।
चयन के मापदंड भी तय नहीं
चयन के लिए स्पष्ट मापदंड भी तय नहीं किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि केवल कागजी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्रामीण आगे क्यों आएंगे।
डेटा भेजने की प्रक्रिया
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) शिखा मेहरा के निर्देशों के अनुसार डेटा भेजने की प्रक्रिया तय की गई है। पंजीकृत वनमित्रों का डेटा उप वन संरक्षक सीधे मुख्यालय नहीं भेजेंगे।
पहले यह सूचना संभागीय मुख्य वन संरक्षक को भेजी जाएगी। वहां सभी वनमंडलों का डेटा संकलित कर मुख्य कार्यालय भेजा जाएगा।
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भी वन्यजीव वनमंडलों में इसी प्रक्रिया के तहत पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग का दावा और जमीनी हकीकत
वन विभाग का दावा है कि इस पहल से स्थानीय स्तर पर वनों की सुरक्षा में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
लेकिन धरातल पर बिना किसी वित्तीय और कानूनी सुरक्षा के वन्यजीवों और तस्करों के बीच ग्रामीणों को भेजना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। कई लोग इसे जोखिम भरा कदम बता रहे हैं।
बिना प्रोत्साहन योजना फेल होने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि वनमित्रों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट पात्रता और पारदर्शी चयन प्रक्रिया तय होनी चाहिए। वन संरक्षण, जन-जागरूकता और विभागीय सहयोग जैसे कार्य संवेदनशील और जोखिम भरे हैं।
ऐसे में वनमित्रों को किसी न किसी रूप में आर्थिक सहायता, मानदेय या यात्रा भत्ता मिलना जरूरी है। बिना आर्थिक प्रोत्साहन के केवल नाम दर्ज करने से यह व्यवस्था धरातल पर असरदार नहीं होगी। अगर यही स्थिति रही तो पूरा अभियान महज एक कागजी औपचारिकता तक सीमित रह सकता है।
FAQ
- वनमित्र पंजीकरण अभियान क्या है?
वन विभाग ने हर ग्राम पंचायत से न्यूनतम 7 वनमित्रों का पंजीकरण अनिवार्य किया है। इनमें दो महिला और पांच पुरुष शामिल करना जरूरी है। यह अभियान ग्रामीण सेवा शिविरों से भी जोड़ा गया है। - वनमित्रों को क्या सुविधाएं मिलेंगी?
फिलहाल इस योजना में मानदेय, भत्ते या बुनियादी सुविधाओं का कोई प्रावधान नहीं है। इसी वजह से योजना की व्यावहारिकता पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ आर्थिक प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं। - वनमित्रों का डेटा कैसे भेजा जाएगा?
उप वन संरक्षक पहले यह डेटा संभागीय मुख्य वन संरक्षक को भेजेंगे। वहां सभी वनमंडलों का डेटा संकलित होगा। इसके बाद यह जानकारी मुख्य कार्यालय भेजी जाएगी।
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