आठ जिलों में सौर ऊर्जा से होगी पानी की सप्लाई, बिजली बिल में होगी करोड़ों की बचत

Jageshwar prasad | Jul 31, 2026, 16:47 IST
राजस्थान के 8 जिलों में सौर ऊर्जा से होगी पानी की सप्लाई, हर महीने बचेंगे 184 करोड़
राजस्थान के जलदाय विभाग ने 8 जिलों में 201 मेगावाट का मेगा सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट शुरू किया है। 703.5 करोड़ रुपए की इस PPP परियोजना से पेयजल आपूर्ति के लिए हर महीने करीब 184 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान के 8 जिलों में सौर ऊर्जा से होगी पानी की सप्लाई।
  • हर महीने बचेंगे 184 करोड़, PPP मॉडल पर होगा काम।
  • 201 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट, 703.5 करोड़ की लागत।
  • 8 जिलों के बड़े पंपिंग स्टेशनों पर लगेंगे सोलर प्लांट।
  • जलदाय विभाग का बिल होगा कम, निजी क्षेत्र का होगा प्लांट।

प्रदेश में अब पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सौर ऊर्जा से जोड़ने की बड़ी पहल होने जा रही है। राजस्थान जलदाय विभाग के बड़े पंपिंग स्टेशनों के लिए 201 मेगावाट क्षमता के मेगा सोलर प्लांट स्थापित किए जाएंगे।



यह किसी एक सरकारी विभाग के लिए प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा आधारित प्रोजेक्ट होगा। यह प्रोजेक्ट 8 जिलों में शुरू किया गया है।



703.5 करोड़ रुपए की इस PPP परियोजना से पेयजल आपूर्ति के लिए बिजली बिल में हर महीने करीब 184 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। निजी कंपनियां प्लांट लगाएंगी और 25 साल तक रखरखाव करेंगी, जबकि सरकार को कोई निवेश नहीं करना होगा।



किन जिलों में लगेंगे प्लांट

पहले चरण में 8 जिलों के बड़े पंपिंग स्टेशनों पर सोलर सिस्टम लगाए जाएंगे। इन जिलों में कोटा, बूंदी, दौसा, बारां, भरतपुर, डूंगरपुर, सवाई माधोपुर और टोंक शामिल हैं। इसके बाद इस मॉडल का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा।



कितनी होगी बचत

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल जलदाय विभाग के पंपिंग स्टेशन सालाना करीब 350 करोड़ यूनिट बिजली की खपत कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से बिजली बिल में हर महीने करीब 184 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है।



राजस्थान के 8 जिलों में सौर ऊर्जा से होगी पानी की सप्लाई


कैसे होगा काम

यह परियोजना पीपीपी मॉडल पर होगी। प्लांट लगाने, उसका पूरा खर्च उठाने, संचालन और 25 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी अनुबंधित कंपनी की होगी। जलदाय विभाग को प्लांट लगाने में कोई निवेश नहीं करना होगा।



एक कंपनी को अधिकतम 50 मेगावाट क्षमता तक ही कार्य आवंटित होगा। प्लांट लगाने के लिए कंपनी को ऐसा सोलर प्लांट लगाना होगा, जिसका वार्षिक क्षमता उपयोग (CUF) 17 से 19% के बीच रहे। अनुबंध होने के 9 महीने के भीतर कार्य पूरा होगा।



वर्चुअल नेट मीटरिंग से मिलेगा लाभ

परियोजना वर्चुअल नेट मीटरिंग मॉडल पर आधारित है। एक स्थान पर बने सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली का लाभ विभाग के कई अलग-अलग बिजली कनेक्शनों को मिलेगा। सरकार केवल उपयोग की गई बिजली का भुगतान करेगी।



FAQ

  1. परियोजना का PPP मॉडल क्या होता है?
    सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership - PPP) सरकार और एक निजी कंपनी के बीच का एक दीर्घकालिक समझौता (long-term contract) है। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (जैसे- सड़कें, अस्पताल, मेट्रो, बिजली ग्रिड) का निर्माण करना और जनता को सेवाएं देना है।

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