क्यों सचिन पायलट के लिए अशोक गहलोत का दिल नहीं पिघल पा रहा, जानिए सियासत की पूरी कहानी
राजस्थान में कांग्रेस के पूर्व सीएम अशोक गहलोत राजनीति के ऐसे धुरधंर हैं, जिनकी काबिलियत का लोहा उनके प्रतिद्धंदी भी मानते हैं। 2013 में आजादी के बाद कांग्रेस की ऐतिहासिक हार होने तक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस के एकमात्र सर्वमान्य नेता थे।
लेकिन, 2014 में सचिन पायलट के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से स्थितियां गहलोत के लिए एक तरफा नहीं रहीं। जबर्दस्त उठा-पटक के बाद 2018 में पायलट को पटखनी देकर गहलोत तीसरी बार सीएम बन गए थे। वर्ष 2020 में पायलट समर्थक विधायकों के मानेसर जाने, गहलोत का अपने विधायकों के साथ 34 दिन होटलों में रहने और पायलट के लौटने की घटना सबको पता है।
दिसंबर 2023 में अंतत: अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में वापसी करनें में विफल रही। तब तक अधिकांश नेता और जनता पायलट समर्थक विधायकों के मानेसर जाने की घटना को भूल चुकी थी। लेकिन, यदि इस घटना को कोई एक व्यक्ति नहीं भूला है तो वह हैं अशोक गहलोत। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी को लगता है कि दोनों के बीच संबंध सामान्य हो चुके हैं तो उसे अपनी राजनीतिक सूझबूझ पर दोबारा विचार करना चाहिए।
ना भूले हैं ना भूलने देंगे
पायलट के प्रति गहलोत के राजनीतिक मनोभावों को समझने के लिए गहलोत के 4 मई को पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद 'एक्स' पर की गई पोस्ट को पढ़ना होगा। उन्होंने अपनी पोस्ट में केरल में जीत के लिए गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेताओं से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक को बधाई दी, लेकिन सचिन पायलट का जिक्र तक नहीं किया है।
पायलट केरल चुनाव के लिए पार्टी के सीनियर आब्जर्वर थे। उन्होंने वहां टिकट फाइनल करने से लेकर प्रचार तक में सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके बावजूद पूरी पोस्ट में पायलट का जिक्र तक नहीं करना स्पष्ट संकेत है कि गहलोत ना भूले हैं, ना ही भूलेंगे और पार्टी आलाकमान को भी नहीं भूलने देंगे।
13 दिन में दो बार जिक्र किया मानेसर का
मानेसर मामले को 6 साल होने जा रहे हैं। इसके बावजूद अशोक गहलोत इस मामले को गाहे-बगाहे राजनीतिक चर्चा में ले ही आते हैं। पिछले दिनों ही गहलोत दो बार मानेसर घटनाक्रम को चर्चा का केंद्र बिंदू बना चुके हैं।
14 अप्रैल 2026 को अंबेडकर जयंती पर डीडवाना में गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ पर तंज कसते हुए मानेसर का जिक्र किया। उन्होंने कहा था कि बार बार भजनलाल शर्मा और मदन राठौड़ हमारे ऊपर बोलते हैं। वे चाहते हैं कि सचिन पायलट का नाम लूं कि लोग मानेसर गए थे। वो चाहते हैं कि नाम लें तो इनकी लड़ाई शुरू हो जाए।
गहलोत ने कहा था कि मैं इनको दोष देता हूं। बताओ आपने हॉर्स ट्रेडिंग कितने लोगों के साथ की। क्या आपने राजस्थान वालों को छोड़ा? हम तो एकजुट हैं। इनको पूछो आपने कोई कमी रखी क्या? हम लोग इनके कुकर्मों, कुकृत्यों से राजस्थान के अंदर 34 दिन होटल में रहे। बीजेपी के नेता जो कर रहे हैं तो जनता समझ नहीं रही है क्या? यहां उन्होंने पूर्व विधायक चेतन डूडी का जिक्र करते हुए कहा था कि डूडी और दूसरे कुछ विधायकों की सूझबूझ से सरकार गिरने से बच गई थी।
इस बीच ही भाजपा के राजस्थान प्रभारी राधा मोहनदास अग्रवाल ने टोंक में सचिन पायलट को लेकर विवादित बयान दिया था। अग्रवाल ने पायलट को बहुरुपिया और भगौड़ा कहने के साथ ही उन्हें कांग्रेस पार्टी के प्रति गैर-निष्ठावान बताया। अग्रवाल ने टोंक विधायक पायलट को बाहरी बताते हुए कहा था कि उनकी एक टांग कांग्रेस में ओर एक टांग कहीं और रहने का बयान दिया।
गहलोत ने 27 अप्रैल को बंगाल से लौटने पर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में भाजपा नेता अग्रवाल के बयान पर प्रतिक्रिया में कहा कि सचिन पायलट समझ भी गए, संभल भी गए हैं। अब उनकी दोनों टांगें कांग्रेस में हैं। पहले उन्हें बहला-फुसलाकर मानेसर ले गए थे, लेकिन अब ये गलती नहीं करेंगे। अब जो लोग गुमराह करके हमारे लोगों को मानेसर ले गए थे, वे समझ गए हैं कि गलती का क्या अंजाम होता है। पूरी पार्टी उनके साथ है।
दिल्ली में हाथ तो मिले लेकिन...
22 अप्रेल को गहलोत और पायलट दोनों कांग्रेस ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में शामिल होने पार्टी मुख्यालय इंदिरा गांधी भवन पहुंचे थे। यहां पायलट ने गहलोत की कार से उतरते हुए अगवानी की। दोनों ने गर्मजोशी से हाथ मिलाकर फोटो भी खिंचाई थी। इस दौरान गहलोत ने हंसते हुए कहा था कि फोटो खींच लो, फिर कहोगे कि हमारे बीच बनती नहीं है।
पहले भी किया था याद
इससे पहले अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गहलोत ने चुनावी संदर्भ में कहा था कि कुछ लोगों ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। इसके बाद सितंबर 2025 में मानेसर मामले में पायलट व दो अन्य हाई कोर्ट से क्लीन चिट मिलने पर गहलोत ने प्रकरण का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा था कि यह कोई कहानी नहीं है बल्कि यह पूरा प्रकरण वास्तविकता में हुआ था।
डोटासरा को बताया मानेसर कांड की देन
मई 2025 में राजीव गांधी पुण्यतिथि पर प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में गहलोत ने राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को मानेसर कांड की देन बताया था। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से पायलट समर्थित विद्रोह की ओर इशारा करते हुए कहा था कि डोटासरा उसी घटनाक्रम से उभरे है।
आखिर कारण क्या?
अशोक गहलोत मौका मिलते ही मानेसर का जिक्र करना नहीं भूलते। जानकारों के अनुसार इसके पीछे 25 सितंबर, 2022 की घटना है। इस दिन आलाकमान के निर्देश पर विधायक दल की बैठक बुलाकर एक प्रस्ताव पारित करना था। लेकिन, गहलोत समर्थक विधायक बैठक में नहीं गए और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। इस घटना को सीधे कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ बगावत माना गया था। मानेसर कांड को पायलट की गहलोत के प्रति बगावत बताया जाता है।
कमजोर मानना भूल होगी
इसमें कोई दो राय नहीं कि 25 सितंबर की घटना के बाद गहलोत के प्रति आलाकमान का विश्वास डगमगाया है। यह इस बात से भी साबित है कि 2023 में विधानसभा चुनाव में मात खाने के बाद से अब तक पार्टी ने उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी है। लेकिन, अशोक गहलोत को राजनीति में चुका हुआ मान लेना ना केवल विपक्ष की भूल होगी बल्कि पार्टी में उनके प्रतिद्वंदियों के लिए भी भारी भूल साबित होगा।
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