क्या प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में जमे शिक्षक लौटेंगे स्कूलों में, निदेशालय ने मांगी जानकारी

Jageshwar prasad | May 01, 2026, 18:22 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में शिक्षा निदेशालय प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में बरसों से जमे शिक्षकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहा है। पूरे प्रदेश में अभी करीब 10,000 शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में काम कर रहे हैं।

News In Short

  • प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में जमे शिक्षकों को वापस बुलाने पर विचार।
  • सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से मांगी प्रतिनियुक्ति वाले शिक्षकों की जानकारी।
  • शिक्षा निदेशालय ने कहा कि जो शिक्षा अधिकारी सूची नहीं भेजेंगे, उन पर होगा एक्शन।
  • जनगणना और निर्वाचन कार्य में लगे शिक्षकों को इस दायरे से रखा बाहर।
  • पूरे प्रदेश में करीब 10 हजार शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में कर रहे काम।

News In Detail​

बीकानेर। राजस्थान में लंबे समय से दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर चल रहे शिक्षकों और कार्मिकों को लेकर शिक्षा निदेशालय ने कड़ा रुख अपना लिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने एक आदेश जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अन्य विभागों में लगे विभाग के कार्मिकों की पूरी सूची तत्काल अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। सूत्रों का कहना है कि विभाग प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों को वापस बुलाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।



​डेडलाइन आज शाम 5 बजे तक​

शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी इस आदेश के अनुसार पूर्व में मांगी गई सूचनाओं में ढिलाई को देखते हुए इस बार समय सीमा तय कर दी गई है। यह जानकारी सभी जिलों से 1 मई 2026, शुक्रवार शाम 5:00 बजे तक मांगी गई है। एक अनुमान के अनुसार शिक्षा विभाग के करीब 10 हजार शिक्षक और कार्मिक दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं।



​अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय

आदेश में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यदि इस बार समय सीमा के बाद कोई ऐसा कार्मिक पाया जाता है जो शिक्षा विभाग के बाहर कार्य कर रहा है और उसकी सूचना सूची में नहीं दी गई, तो इसके लिए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सूचना छुपाने या लापरवाही बरतने पर अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।



​इन कार्यों में लगे कर्मियों को मिली छूट

​हालांकि, विभाग ने दो श्रेणियों के कार्मिकों को इस अनिवार्य सूची से बाहर रखा है। एसआईआर (SIR) कार्य या जनगणना कार्यों में लगे कर्मचारियों को इस सूची में शामिल नहीं होंगे। निर्वाचन संबंधी बीएलओ ड्यूटी में लगे शिक्षकों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है।



​पारदर्शिता के लिए उठाया कदम

शिक्षा विभाग के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि विभाग के कितने दक्ष शिक्षक और अधिकारी वर्तमान में शिक्षण कार्य को छोड़कर अन्य प्रशासनिक या सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।



अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी रहती है, जबकि बड़ी संख्या में कार्मिक 'जुगाड़' या अन्य व्यवस्थाओं के तहत शहरी क्षेत्रों या अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर चले जाते हैं। सरकार इस मामले को लेकर काफी गंभीर है।



आगे क्या होगा?

अकसर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से शिक्षकों की कमी को लेकर शिकायतें आती रहती है। पता चला है कि बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों में पढ़ाई कराने के बजाय दूसरे विभागों में जमे हुए हैं। इससे स्कूलों की पढ़ाई व्यवस्था चौपट हो रही है।



​सूत्रों का कहना है कि डेटा प्राप्त होने के बाद निदेशालय इन प्रतिनियुक्तियों की समीक्षा करेगा। अनावश्यक रूप से दूसरे विभागों में जमे कार्मिकों को वापस उनके मूल पदस्थापन (स्कूलों) पर भेजा जा सकता है, ताकि आगामी सत्र में शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके।



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