अस्पताल के बाहर दो घंटे तड़पती रही महिला मरीज, आखिर में तोड़ दिया दम

Jageshwar prasad | May 03, 2026, 14:04 IST
Photograph: (the sootr)
कोटा के एमबीएस अस्पताल में समय पर इलाज और स्ट्रेचर न मिलने से सड़क हादसे की घायल महिला की मौत हो गई। स्टाफ द्वारा स्ट्रेचर के लिए आधार कार्ड मांगने और डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण महिला दो घंटे तक तड़पती रही।

News In Short

  • कोटा के एमबीएस अस्पताल में गंभीर मरीज को स्ट्रेचर देने के बदले स्टाफ ने आधार कार्ड की मांग की।
  • 75 किमी दूर से सुरक्षित पहुंची महिला ने अस्पताल की इमरजेंसी सेवा के अभाव में तोड़ा दम।
  • ड्यूटी पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर ने सर्जरी विभाग का मामला बताकर मरीज को अटेंड करने से किया मना।
  • एंबुलेंसकर्मी की गुहार के बावजूद महिला को ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया और उसे बाहर जाने को कहा।
  • अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने स्टाफ को लगाई फटकार, लेकिन अस्पताल की बदहाली फिर हुई उजागर।

News In Detail

Kota: एमबीएस अस्पताल कोटा की इमरजेंसी सेवाओं ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार किया है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक महिला, जो 75 किलोमीटर दूर से एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर जिंदा अस्पताल पहुंची थी, उसने अस्पताल के गेट पर इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। लापरवाही का आलम यह था कि अस्पताल स्टाफ इलाज शुरू करने के बजाय कागजी औपचारिकताओं और आधार कार्ड मांगने में उलझा रहा।



हादसे से अस्पताल तक का सफर

मृतका उर्मिला बाई (55) शनिवार सुबह गणेशगंज क्षेत्र के पास एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। 108 एम्बुलेंस ने उन्हें प्राथमिक उपचार देकर पहले इटावा सीएचसी पहुंचाया, जहां से उन्हें कोटा के एमबीएस अस्पताल रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस में तैनात ईएमटी (EMT) लीलाधर पारेता के अनुसार, पूरे रास्ते महिला को ऑक्सीजन और फ्लूड सपोर्ट दिया गया था और उनकी हालत स्थिर बनी हुई थी।



स्ट्रेचर के लिए आधार कार्ड

सुबह करीब 11:30 बजे जब एंबुलेंस अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर पहुंची, तो वहां की अव्यवस्था ने महिला की मौत का रास्ता तैयार कर दिया। गेट पर एक भी स्ट्रेचर खाली नहीं था। जब एंबुलेंसकर्मी स्ट्रेचर लेने अंदर गया, तो काउंटर पर मौजूद स्टाफ ने पहले मरीज का आधार कार्ड दिखाने की शर्त रख दी।



इमरजेंसी बताने के बाद किसी तरह स्ट्रेचर मिला, लेकिन अंदर जाने पर मेडिसिन रेजिडेंट ने इसे सर्जरी का केस बताकर पल्ला झाड़ लिया और कहा कि अभी सर्जरी के डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। एंबुलेंसकर्मी के बार-बार गुहार लगाने के बावजूद न तो महिला को ऑक्सीजन लगाई गई और न ही मॉनिटर पर लिया गया। उल्टा स्टाफ ने एंबुलेंसकर्मी को ही बाहर जाने के लिए कह दिया।



अधीक्षक की फटकार, पर जान नहीं लौटी

घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा और उपाधीक्षक डॉ. कर्णेश गोयल मौके पर पहुंचे। अधीक्षक ने इमरजेंसी की स्थिति देखकर स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई और तुरंत गेट पर अतिरिक्त स्ट्रेचर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। हालांकि, तब तक महिला की मृत्यु हो चुकी थी।



सिस्टम पर बार-बार उठते सवाल

यह पहली बार नहीं है जब एमबीएस अस्पताल में ऐसी लापरवाही हुई हो। इससे पहले 23 मार्च को भी एक बुजुर्ग मरीज को गोद में अस्पताल लाया गया था। इलाज के इंतजार में मरीज की गोद में ही मौत हो गई थी। अब 75 किलोमीटर दूर से एक मरीज को सुरक्षित बचाकर लाने वाली एंबुलेंस की मेहनत अस्पताल की दहलीज पर आकर प्रशासनिक विफलता की भेंट चढ़ गई।



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