तीन दशक बाद सुलझा यमुना जल विवाद, हरियाणा ने पाइपलाइन के लिए दी हरी झंडी

Ashish Bhardwaj | Feb 16, 2026, 12:25 IST
Photograph: (the sootr)
लगभग 32 साल के लंबे इंतजार के बाद अब राजस्थान को यमुना जल मिलने की उम्मीद दिख रही है। हरियाणा ने यमुना जल पाइपलाइन परियोजना के एलाइनमेंट पर अपनी आधिकारिक सहमति दे दी है।

News In Short

  • हरियाणा ने यमुना जल पाइपलाइन परियोजना के एलाइनमेंट पर सहमति दी।
  • 32 साल के लंबे इंतजार के बाद राजस्थान को अब यमुना जल आने की उम्मीद बंधी
  • राजस्थान का हरियाणा से यमुना जल लाने का यह विवाद 1994 से चल रहा है।
  • बुनियादी ढ़ांचे के अभाव में राजस्थान नहीं ले पा रहा था अपने हिस्से का पानी
  • यमुनानगर से शेखावाटी तक यह पाइपलाइन करीब 265 किलोमीटर लंबी होगी।

News In Detail

Jaipur: यमुना का पानी राजस्थान लाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। हरियाणा सरकार ने यमुना जल पाइपलाइन परियोजना के एलाइनमेंट पर अपनी आधिकारिक सहमति दे दी है। इस फैसले के साथ ही हथिनी कुंड से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र तक पानी लाने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। लगभग 32 साल के लंबे इंतजार और अंतहीन प्रशासनिक दांव-पेचों के बाद आखिरकार यमुना का पानी राजस्थान में आने की उम्मीद बनती दिख रही है।



​तीन दशकों का गतिरोध टूटा

​यमुना जल का यह विवाद 1994 से चल रहा था। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर एक समझौता हुआ था। समझौते के तहत राजस्थान को मानसून अवधि में 1,917 क्यूसेक जल आवंटित किया गया था। लेकिन, बुनियादी ढांचे के अभाव और तकनीकी असहमति के कारण राजस्थान अपने हिस्से का पानी नहीं ले पा रहा था। हरियाणा को डर था कि खुली नहर से पानी देने पर उसके अपने हिस्से में कमी आ सकती है, जबकि राजस्थान को अपने हक के पानी की सख्त दरकार थी।



​पाइपलाइन पर बनी सहमति

​ताजा घटनाक्रम के अनुसार हरियाणा सरकार ने हथिनी कुंड से हसियावास तक पाइपलाइन बिछाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। यमुनानगर जिले से शुरू होकर यह पाइपलाइन करीब 265 किलोमीटर लंबी होगी। इस परियोजना से मुख्य रूप से राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनू जिलों को जीवनदान मिलेगा। हरियाणा ने एलाइनमेंट पर सहमति देने के साथ ही अपने क्षेत्र की कुछ पेयजल योजनाओं के लिए भी इसी पाइपलाइन से पानी की मांग रखी है, जिस पर दोनों राज्यों में सैद्धांतिक सहमति बन गई है।



​नेताओं की सक्रियता ने रंग दिखाया

इस प्रोजेक्ट को गति देने में केंद्र और राज्य सरकारों की जुगलबंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले महीने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई उच्च स्तरीय बैठक में पाइपलाइन के एलाइनमेंट का प्रस्तुतीकरण दिया गया था।



​पुरानी बाधाएं और नया समाधान

​इससे पहले राजस्थान ने कई बार प्रयास किए थे:



​2017: सीबीडब्ल्यूसी (CBWC) को रिपोर्ट भेजी गई।



2019 और 2021: संशोधित प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन हरियाणा ने पानी की निकासी के लिए नए बैराज या खुली नहर के विकल्प पर आपत्ति जताई थी।



​समाधान: फरवरी 2024 में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच हुए एमओयू के बाद यह तय हुआ कि पानी खुली नहर के बजाय भूमिगत पाइपलाइन से लाया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी भी कम होगी और भूमि अधिग्रहण की समस्याएं भी न्यूनतम रहेंगी।



​शेखावाटी के लिए 'अमृत' साबित होगी यह योजना

​चूरू, सीकर और झुंझुनू जैसे जिलों में भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। यमुना नदी का यह पानी इन जिलों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। अब डीपीआर तैयार होने के बाद जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल पेयजल संकट दूर होगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी नई क्रांति आएगी।



मुख्य बिंदु एक नज़र में:

प्रोजेक्ट की कुल लंबाई: लगभग 265 किमी



मुख्य स्रोत: हथिनी कुंड बैराज



लाभान्वित राज्य: राजस्थान (चूरू, सीकर, झुंझुनू)



पुराना समझौता: 12 मई, 1994



तकनीकी माध्यम: अत्याधुनिक पाइपलाइन प्रणाली



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