चंबल के सिंघम के नाम से मशहूर, बदमाश भी जिनसे कांपते हैं, IPS मृदुल कच्छावा की कहानी
जब भी देश में कानून-व्यवस्था और जांबाजी की बात आती है, तो हमारे सामने खाकी वर्दी में लिपटी एक ऐसी कड़क छवि उभरती है जो समाज को सुरक्षा का अहसास कराती है और अपराधियों की रूह कंपा देती है। भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के इतिहास में ऐसे कई जांबाज अफसर हुए हैं, जिन्होंने अपनी सेवा से जनता का दिल जीता। उन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम है- मृदुल कच्छावा।
वर्ष 2015 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस (IPS) अधिकारी मृदुल कच्छावा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। कॉर्पोरेट वर्ल्ड की आरामदायक नौकरियों की चकाचौंध और मुंबई के बैंकिंग सेक्टर के कम्फर्ट ज़ोन को छोड़कर खाकी को अपनाने वाले मृदुल कच्छावा ने यह साबित कर दिया कि यदि आपके इरादे फौलादी हों, तो आप नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकते हैं।
चंबल के बीहड़ों को डाकुओं और डकैतों के आतंक से मुक्त कराने वाले इस जांबाज IPS को जनता प्यार से धौलपुर का सिंघम कहती है। आइए जानते हैं बीकानेर से लेकर चंबल के बीहड़ों और फिर बीकानेर के पुलिस अधीक्षक (SP) बनने तक का उनका यह रोमांचक और प्रेरणादायी सफर।
बीकानेर और जयपुर में गुजरा शुरुआती जीवन
मृदुल कच्छावा का जन्म 30 अगस्त 1989 को राजस्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर बीकानेर के एक साधारण और अनुशासित परिवार में हुआ था। मृदुल का बचपन बीकानेर की गलियों में बीता और उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं से शुरू हुई। हालांकि, कुछ समय बाद उनका परिवार जयपुर आकर बस गया, जिसके कारण उनकी आगे की स्कूली शिक्षा जयपुर से हुई।
मृदुल ने जयपुर के केंद्रीय विद्यालय से अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी की। वे बचपन से ही बेहद अनुशासित, गंभीर और कुशाग्र बुद्धि के छात्र थे। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने जयपुर के प्रसिद्ध कॉमर्स कॉलेज में दाखिला लिया और वहां से वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की।
CA, CS की डिग्रियां और करियर का भटकाव
अक्सर माना जाता है कि सिविल सेवा में आने वाले अधिकांश लोग या तो आर्ट्स बैकग्राउंड से होते हैं या फिर इंजीनियरिंग के क्षेत्र से। लेकिन मृदुल कच्छावा ने एक बिल्कुल अलग और कठिन रास्ता चुना था। उन्होंने कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद देश की सबसे कठिन व्यावसायिक परीक्षाओं में से एक CA और CS की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में पीजी की डिग्री भी हासिल की।
इतनी डिग्रियां होने के बाद देश के कॉर्पोरेट जगत और मल्टीनेशनल कंपनियों के दरवाजे उनके लिए पूरी तरह खुले थे। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मृदुल ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का रुख किया और वहां एक बड़े बैंक में बतौर ऑफिसर काम करने लगे।
मुंबई की लाइफस्टाइल, मोटी सैलरी और कॉर्पोरेट का आराम- सब कुछ उनके पास था। लेकिन जिसके खून में देश सेवा और कुछ बड़ा करने का जुनून दौड़ रहा हो, उसे बैंक के केबिन की वातानुकूलित हवाएं कैसे बांध सकती थीं?
मृदुल कच्छावा का झुकाव शुरू से ही देश सेवा की तरफ था। उन्होंने भारतीय सेना में एक अधिकारी के रूप में शामिल होने का प्रयास भी किया था, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें वहां सफलता नहीं मिल सकी। सेना में न जा पाने की कसक उनके दिल में हमेशा रही। अंततः, उन्होंने मुंबई की अपनी अच्छी-भली बैंक की नौकरी को अलविदा कह दिया और देश की सबसे कठिन परीक्षा- UPSC के जरिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जाने का अटूट संकल्प लिया।
दिल्ली का संघर्ष और ऐतिहासिक सफलता
बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद मृदुल कच्छावा दिल्ली आ गए और खुद को एक छोटे से कमरे में बंद करके यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में झोंक दिया। CA और CS बैकग्राउंड होने के बावजूद सिविल सेवा का सिलेबस उनके लिए बिल्कुल नया और चुनौतीपूर्ण था।
2014 में उन्हें इंडियन पोस्टल सर्विस मिली इसके बाद उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा, अपनी रणनीति को मजबूत किया और दोगुनी मेहनत के साथ फिर उतर गए। उनकी मेहनत रंग लाई 2015 में ऑल इंडिया रैंक 216 के साथ IPS में चयन हुआ। सबसे बड़ी और खुशी की बात यह थी कि उन्हें अपना होम कैडर यानी राजस्थान कैडर ही मिला।
चंबल के बीहड़ों में डाकुओं का सफाया
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मृदुल कच्छावा को शुरुआत में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने अपनी कार्यशैली से सबको प्रभावित किया। इसके बाद बतौर एसपी (SP) उन्होंने धौलपुर, करौली, झुंझुनू, भरतपुर और नागौर जैसे कई जिलों में अपनी शानदार सेवाएं दीं। लेकिन उनके करियर का सबसे स्वर्णिम और साहसिक अध्याय तब लिखा गया, जब जुलाई 2019 में उन्हें धौलपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) की कमान सौंपी गई।
राजस्थान का धौलपुर जिला और उससे सटा चंबल का इलाका ऐतिहासिक रूप से डकैतों और बागियों का गढ़ माना जाता रहा है। यह वही क्षेत्र है जहां कभी फूलन देवी, मलखान सिंह, माधो सिंह, पान सिंह तोमर जैसे डकैतों की बंदूकें गरजा करती थीं।
हालांकि समय बदलने के साथ बड़े गैंग खत्म हो चुके थे, लेकिन फिर भी बीहड़ों की भौगोलिक बनावट के कारण छोटे-मोटे डकैत गिरोह स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और ग्रामीणों के लिए आतंक का पर्याय बने हुए थे। पुलिस के लिए इन बीहड़ों में डकैतों को ढूंढना एक बड़ी चुनौती थी।
मृदुल कच्छावा ने धौलपुर की कमान संभालते ही यह साफ कर दिया कि अपराधियों के लिए इस जिले में कोई जगह नहीं है। उन्होंने स्मार्ट और टेक-सैवी पुलिसिंग का सहारा लिया। डकैतों के सटीक लोकेशन और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उन्होंने एक विशेष साइबर सेल टीम का गठन किया।
वर्ष 2020 में जब पूरा देश और दुनिया कोरोना महामारी और लॉकडाउन के खौफ से घरों में कैद थी, तब धौलपुर के इस जांबाज एसपी ने अपनी जान की परवाह किए बिना, खुद पुलिस की टुकड़ी का नेतृत्व किया। सोशल मीडिया पर जब इस युवा आईपीएस अधिकारी की बीहड़ों में सर्च ऑपरेशन चलाते हुए तस्वीरें सामने आईं, तो पूरे देश ने उनकी बहादुरी को सलाम किया।
एक साल में 57 डकैतों को सलाखों के पीछे भेजा
मृदुल कच्छावा के इस आक्रामक और साहसिक अभियान के तहत उन्होंने दो दर्जन से अधिक डकैतों को गिरफ्तार किया, जिनमें पप्पू गुर्जर (कुख्यात जगन गुर्जर का छोटा भाई), लाल सिंह गुर्जर, रामविलास गुर्जर, भारत गुर्जर और रघुराज गुर्जर जैसे बेहद शातिर और इनामी डकैत शामिल थे।
अपने महज एक साल के छोटे से कार्यकाल में एसपी मृदुल कच्छावा ने 57 खतरनाक डकैतों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया। उनके इस खौफ के कारण कई अपराधियों ने अपराध की दुनिया से तौबा कर ली या जिला छोड़ दिया।
करौली का वह ऐतिहासिक जन-आंदोलन
धौलपुर के बाद मृदुल कच्छावा का तबादला करौली जिले के SP के रूप में हुआ। वहां भी उन्होंने अपराधियों पर कड़ा प्रहार जारी रखा। इस दौरान उनकी कार्यशैली का क्षेत्र के तत्कालीन विधायक ने विरोध किया। विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एसपी कच्छावा की शिकायत कर दी और उनके तबादले की मांग की।
लेकिन यहां इतिहास ने खुद को दोहराया। आमतौर पर जनता पुलिस के खिलाफ होती है, लेकिन मृदुल कच्छावा की ईमानदारी और निष्पक्षता के कायल करौली के आम लोग, युवा और व्यापारी सड़कों पर उतर आए।
जिले की जनता ने अपने चहेते ईमानदार अफसर के समर्थन में बड़े-बड़े जुलूस निकाले और नारे लगाए। यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण था कि यदि एक अधिकारी पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा करे, तो जनता खुद उसकी ढाल बनकर खड़ी हो जाती है।
अपनी जन्मभूमि बीकानेर में कमान
अपनी बेदाग छवि, कड़क प्रशासनिक पकड़ और बेजोड़ अनुशासन के कारण राज्य सरकार ने उन्हें वर्तमान में उनकी जन्मभूमि यानी बीकानेर के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में तैनात किया है। आज बीकानेर के एसपी के रूप में मृदुल कच्छावा अपनी उसी चिरपरिचित जीरो टॉलरेंस नीति के साथ नशे के सौदागरों, भू-माफियाओं और स्थानीय अपराधियों पर नकेल कस रहे हैं।
IPS मृदुल कच्छावा के जीवन से युवाओं के लिए 5 अनमोल प्रेरणाएं
आईपीएस मृदुल कच्छावा की यह जीवन कहानी देश के हर उस युवा के लिए एक मार्गदर्शिका है जो जीवन में कुछ असाधारण करना चाहता है। उनके जीवन से हम ये महत्वपूर्ण बातें सीख सकते हैं:
पैसे से बड़ा है आत्म-संतोष: एक CA, CS की डिग्री और मुंबई की शानदार बैंकिंग नौकरी को छोड़कर पुलिस सेवा में आना यह सिखाता है कि जीवन में केवल पैसा कमाना ही काफी नहीं है, बल्कि आपकी आत्मा को किस काम से संतोष मिलता है, वह महत्वपूर्ण है।
असफलता अंतिम सत्य नहीं है: सेना में चयन न होना मृदुल को तोड़ नहीं सका। उन्होंने अपनी असफलताओं को अपनी ताकत बनाया और सफलता हासिल की।
लीडर वह है जो आगे बढ़कर नेतृत्व करे: एक सच्चे लीडर की तरह, मृदुल ने डकैतों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान अपनी टीम को केवल आदेश नहीं दिया, बल्कि खुद अग्रिम पंक्ति में खड़े हुए।
तकनीक और बुद्धिमत्ता का सही मिश्रण: पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ साइबर तकनीक और AI का इस्तेमाल करना यह सिखाता है कि आधुनिक युग में किसी भी चुनौती से निपटने के लिए खुद को अप-टू-डेट रखना कितना जरूरी है।
ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है: जब आप पूरी निष्ठा और ईमानदारी से समाज की सेवा करते हैं, तो बड़े से बड़े राजनेता भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते, क्योंकि पूरी जनता आपके समर्थन में खड़ी हो जाती है।
कल तक जो युवा मुंबई की ऊंची इमारतों के बीच बैठकर फाइलों और खातों का हिसाब-किताब रखता था, आज वही शख्स चंबल के बीहड़ों से लेकर राजस्थान के बड़े जिलों में कानून-व्यवस्था का नया इतिहास लिख रहा है।
आईपीएस मृदुल कच्छावा की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सफलता किसी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि आपके दृढ़ निश्चय, कड़े अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की क्षमता से मिलती है।
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