IPS अफसर बनने के लिए 3 नौकरियां छोड़ीं, अलवर SP सुधीर चौधरी की प्रेरणादायी कहानी
Jageshwar prasad | May 19, 2026, 16:51 IST
Photograph: (the sootr)
IIT रुड़की से बी.टेक करने के बाद IPS सुधीर चौधरी ने देश सेवा के लिए कॉर्पोरेट करियर और तीन प्रतिष्ठित नौकरियां छोड़ीं। वर्ष 2015 बैच के इस जांबाज आईपीएस अधिकारी ने अपराध अनुसंधान में अमूल्य योगदान देकर अपनी एक धाकड़ पहचान बनाई है।
कहते हैं कि सपने उन्हीं के पूरे होते हैं जो उनके लिए रातों की नींद छोड़ दें, अपने आराम छोड़ दें, और कभी-कभी अपनी नौकरियां भी छोड़ दें। IPS सुधीर चौधरी की कहानी ठीक ऐसी ही है। यह कहानी है एक ऐसे लड़के की, जिसने न केवल अपने सपने को साकार किया बल्कि अपनी मेहनत और लगन से राजस्थान के कई जिलों में अपराध को कम करने में सफलता पाई। आज वह अलवर जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं और अपनी धाकड़ पहचान बना चुके हैं।
IPS सुधीर चौधरी का जन्म राजस्थान के सीकर जिले की श्रीमाधोपुर तहसील के छोटे से गांव बागरिया बास में हुआ। उनके पिता लक्ष्मण राम कृषि विभाग में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन पिता की नौकरी के कारण उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के अलग-अलग शहरों में हुई।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा श्रीमाधोपुर से शुरू की, फिर बूंदी, जयपुर और कोटा में पूरी की। हर नए शहर में जाना, नई जगह ढलना, नए स्कूल में दोस्त बनाना - यह सब उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन सुधीर ने कभी हार नहीं मानी।
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने IIT रुड़की में प्रवेश लिया और वहां से B.Tech की डिग्री हासिल की। IIT जैसी संस्था से पढ़ाई करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन सुधीर के सपने यहीं खत्म नहीं हुए थे।
IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद, सुधीर ने एक साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। उनके पास अच्छी सैलरी थी, बढ़िया जीवन था, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगता था। उनके अंदर कुछ और करने की जिद थी। वह देश के लिए कुछ करना चाहते थे। और फिर शुरू हुआ उनका UPSC का सफर।
पहली सफलता (2012): सुधीर ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) की परीक्षा पास की और उसमें चयनित हो गए। यह एक प्रतिष्ठित नौकरी थी, लेकिन उन्हें लगा कि यह वह नहीं है जो वह सच में चाहते हैं।
दूसरी सफलता (2013): उन्होंने फिर से मेहनत की और भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित हो गए। एक बार फिर उनके पास एक शानदार नौकरी थी, लेकिन उनकी जिद कुछ और थी।
तीसरी सफलता (2014): सुधीर ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से UPSC की तैयारी की और इस बार उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में 185वीं रैंक के साथ चयन पाया। 2015 बैच के रूप में उन्हें राजस्थान कैडर आवंटित हुआ।
तीन बार नौकरी पाना आसान नहीं है, लेकिन तीन बार नौकरी छोड़कर अपने असली सपने के पीछे भागना उससे भी कहीं ज्यादा मुश्किल है। सुधीर चौधरी ने वह कर दिखाया।
![दबंग पुलिस अधीक्षक, SP हनुमानगढ़ : IPS सुधीर चौधरी | Superintendent of Police, SP Hanumangarh: IPS Sudhir Chaudhary]()
IPS बनने के बाद सुधीर चौधरी ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ परीक्षा पास करने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वह जमीनी हकीकत को समझने वाले बेहतरीन पुलिस अफसर हैं। उनका मानना है कि अपराध को खत्म नहीं, जड़ से हटाना चाहिए।
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि तब आई जब वह राजसमंद में तैनात थे। उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपियों को IPS चौधरी ने महज 5 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था।
यह कोई आम गिरफ्तारी नहीं थी। उन्होंने गिरफ्तारी के बाद हर एक सबूत को इकट्ठा किया और चंद दिनों में ही आरोपियों के पाकिस्तान कनेक्शन को भी साबित कर दिया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें पुलिस मुख्यालय द्वारा डीजीपी डिस्क से सम्मानित किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद स्थानीय स्तर पर सेना की मदद करने वालों का आर्मी ने आभार व्यक्त किया था। इसी क्रम में आर्मी ने तत्कालीन जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी का इस अभियान में सेना का साथ निभाने और उनकी अच्छी कार्यशैली को लेकर सम्मानित किया था।
![Jaisalmer SP Sudheer Choudhary receives commendation from Army chief | The BuckStopper]()
पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी सिर्फ एक कठोर पुलिस अधिकारी नहीं हैं, बल्कि एक शोधकर्ता भी हैं। उनकी विशेष रुचि साइबर क्राइम और तकनीकी विकास में है। 2023 में उन्होंने क्राउड कंट्रोल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग पर शोध पत्र बनाया और इसे DGP उत्तर प्रदेश के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने क्रिप्टो करेंसी और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पर भी गहरा शोध किया है।
कहते हैं कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। सुधीर चौधरी इसे बखूबी मानते हैं। वह अपने दिन की शुरुआत एक्सरसाइज, फुटबॉल, बैडमिंटन, ट्रैकिंग या टेनिस से करते हैं। IIT रुड़की में पढ़ाई के दौरान वह टेनिस टीम के कप्तान थे। यह शौक उन्होंने पुलिस सेवा में आने के बाद भी नहीं छोड़ा। भारतीय पुलिस अकादमी में उन्होंने टेनिस सिंगल्स में गोल्ड मेडल जीता।
सपना बड़ा रखो: IIT से पढ़ाई करने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने UPSC का सपना देखा।
हार मत मानो: तीन बार अलग-अलग नौकरियां मिलने के बाद भी वह रुके नहीं।
अनुशासित जीवन जीओ: रोज सुबह व्यायाम, समय पर काम - यही उनकी सफलता की कुंजी है।
खुद को अपडेट रखो: साइबर क्राइम, AI, क्रिप्टो करेंसी - उन्होंने हर नए विषय पर शोध किया।
नौकरी नहीं, जिम्मेदारी समझो: वह सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि समाज सेवक भी हैं।
IPS सुधीर चौधरी की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को लेकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर मेहनत ईमानदार हो, जिद पक्की हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
आज वह जिस मुकाम पर हैं, वह उनके संघर्ष, उनकी उन तीन छोड़ी गई नौकरियों और उनकी उस रातों की नींद का फल है, जब उन्होंने सिर्फ अपने सपने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था।
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गांव से निकलकर IIT तक का सफर
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा श्रीमाधोपुर से शुरू की, फिर बूंदी, जयपुर और कोटा में पूरी की। हर नए शहर में जाना, नई जगह ढलना, नए स्कूल में दोस्त बनाना - यह सब उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन सुधीर ने कभी हार नहीं मानी।
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने IIT रुड़की में प्रवेश लिया और वहां से B.Tech की डिग्री हासिल की। IIT जैसी संस्था से पढ़ाई करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन सुधीर के सपने यहीं खत्म नहीं हुए थे।
जब तीन नौकरियां छोड़ दीं
पहली सफलता (2012): सुधीर ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) की परीक्षा पास की और उसमें चयनित हो गए। यह एक प्रतिष्ठित नौकरी थी, लेकिन उन्हें लगा कि यह वह नहीं है जो वह सच में चाहते हैं।
दूसरी सफलता (2013): उन्होंने फिर से मेहनत की और भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित हो गए। एक बार फिर उनके पास एक शानदार नौकरी थी, लेकिन उनकी जिद कुछ और थी।
तीसरी सफलता (2014): सुधीर ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से UPSC की तैयारी की और इस बार उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में 185वीं रैंक के साथ चयन पाया। 2015 बैच के रूप में उन्हें राजस्थान कैडर आवंटित हुआ।
तीन बार नौकरी पाना आसान नहीं है, लेकिन तीन बार नौकरी छोड़कर अपने असली सपने के पीछे भागना उससे भी कहीं ज्यादा मुश्किल है। सुधीर चौधरी ने वह कर दिखाया।
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पुलिस सेवा में एक नई पहचान
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि तब आई जब वह राजसमंद में तैनात थे। उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपियों को IPS चौधरी ने महज 5 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था।
यह कोई आम गिरफ्तारी नहीं थी। उन्होंने गिरफ्तारी के बाद हर एक सबूत को इकट्ठा किया और चंद दिनों में ही आरोपियों के पाकिस्तान कनेक्शन को भी साबित कर दिया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें पुलिस मुख्यालय द्वारा डीजीपी डिस्क से सम्मानित किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद स्थानीय स्तर पर सेना की मदद करने वालों का आर्मी ने आभार व्यक्त किया था। इसी क्रम में आर्मी ने तत्कालीन जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी का इस अभियान में सेना का साथ निभाने और उनकी अच्छी कार्यशैली को लेकर सम्मानित किया था।
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हार मत मानो: तीन बार अलग-अलग नौकरियां मिलने के बाद भी वह रुके नहीं।
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खुद को अपडेट रखो: साइबर क्राइम, AI, क्रिप्टो करेंसी - उन्होंने हर नए विषय पर शोध किया।
नौकरी नहीं, जिम्मेदारी समझो: वह सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि समाज सेवक भी हैं।
IPS सुधीर चौधरी की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को लेकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर मेहनत ईमानदार हो, जिद पक्की हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
आज वह जिस मुकाम पर हैं, वह उनके संघर्ष, उनकी उन तीन छोड़ी गई नौकरियों और उनकी उस रातों की नींद का फल है, जब उन्होंने सिर्फ अपने सपने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था।
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