सब्जी की दुकान से SP तक का सफर, आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ की कहानी
जब हौसले बुलंद हों और सीने में कुछ कर गुजरने का जुनून सुलग रहा हो, तो किस्मत की लकीरों को भी अपना रास्ता बदलना पड़ता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण परीक्षा माना जाता है। यहां हर साल लाखों युवा अपनी आंखों में सुनहरे सपने लिए उतरते हैं, लेकिन सफलता की मंजिल केवल उन्हें ही मिलती है जिनके पास अटूट धैर्य, मजबूत इरादे और विपरीत परिस्थितियों से टकराने का हौसला होता है।
ऐसी ही एक अद्भुत मिसाल पेश की है वर्ष 2022 बैच के राजस्थान कैडर के जांबाज आईपीएस (IPS) अधिकारी कांबले शरण गोपीनाथ ने। एक ऐसा लड़का जो कभी आर्थिक तंगी के कारण अपनी मां के साथ सड़क किनारे सब्जी बेचता था, जिसके पिता खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करते थे, आज वही लड़का राजस्थान के एक पूरे जिले की कानून-व्यवस्था का मुख्य पहरेदार है। आइए जानते हैं उनके इस कड़े संघर्ष और फर्श से अर्श तक पहुंचने की पूरी कहानी।
तंगहाली और सब्जी का ठेला
आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ मूल रूप से महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 30 सितंबर 1993 को सोलापुर के एक बेहद पिछड़े और छोटे से गांव तड़वले में हुआ था। शरण का बचपन घोर गरीबी और अभावों के बीच बीता। उनके पिता गोपीनाथ कांबले परिवार के भरण-पोषण के लिए दिन-रात खेतों और अन्य जगहों पर मजदूरी करते थे, जिससे बमुश्किल दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता था।
घर के वित्तीय हालातों को सहारा देने के लिए शरण की मां गांव के स्थानीय बाज़ार में सब्जी बेचने का काम करती थीं। शरण एक बेहद संवेदनशील और जिम्मेदार बेटे थे। वे केवल पढ़ाई ही नहीं करते थे, बल्कि स्कूल से आने के बाद अपनी मां का हाथ बंटाने के लिए खुद सड़क किनारे बैठकर सब्जी बेचा करते थे।
लेकिन इस भारी तंगहाली के बीच भी माता-पिता ने कभी शरण की पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी। शरण की कक्षा 10वीं तक की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक छोटे से सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें रोज 12 किलोमीटर दूर पड़ोस के गांव के स्कूल में पैदल या जैसे-तैसे जाना पड़ता था।
इंजीनियरिंग से देश के शीर्ष संस्थान IISc तक का सफर
शरण बचपन से ही पढ़ाई में बेहद कुशाग्र और अनुशासित थे। विपरीत परिस्थितियों ने उनकी बुद्धिमत्ता को और निखारा। 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा पास की और वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सांगली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की।
उनकी प्रतिभा का सफर यहीं नहीं रुका। बी.टेक के बाद उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (IISc), बैंगलोर से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की डिग्री पूरी की। देश के इस शीर्ष संस्थान से पास आउट होते ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के दरवाजे उनके लिए खुल गए और उन्हें ₹20 लाख सालाना का शानदार सैलरी पैकेज ऑफर हुआ।
पिता का सपना और ₹20 लाख के पैकेज को किया मना
एक गरीब परिवार के लड़के के लिए, जिसने बचपन से केवल तंगहाली देखी हो, ₹20 लाख का सालाना पैकेज मिलना किसी लॉटरी से कम नहीं था। इस नौकरी से उनकी गरीबी एक झटके में दूर हो सकती थी। लेकिन शरण के भीतर देश सेवा का एक अलग ही जज्बा हिलोरें ले रहा था। साथ ही, उनके मजदूर पिता गोपीनाथ का भी हमेशा से एक सपना था कि उनका बेटा समाज में एक बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बने और लाचारों की मदद करे।
अपने पिता के इसी सपने को अपनी ज़िंदगी का मकसद बनाकर शरण ने बिना किसी हिचकिचाहट के उस ₹20 लाख के कॉर्पोरेट पैकेज को ठुकरा दिया। वे अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर दिल्ली आ गए और यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में जुट गए।
स्कॉलरशिप के पैसे से लड़ी दिल्ली की जंग
दिल्ली में रहने और कोचिंग का खर्च उठाना एक गरीब परिवार के लिए नामुमकिन था। ऐसे में शरण ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए महाराष्ट्र सरकार की एक विशेष स्कॉलरशिप योजना की परीक्षा दी।
इस परीक्षा को पास करने के बाद उन्हें दिल्ली में तैयारी के दौरान हर महीने ₹12,000 की स्कॉलरशिप मिलने लगी। इसी सीमित स्कॉलरशिप के दम पर शरण ने एक छोटे से कमरे में खुद को बंद कर लिया और दिन-रात पढ़ाई में झोंक दिया।
लगातार तीन परीक्षाओं में सफलता का परचम
शरण की मेहनत और एकाग्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक बार जब उन्होंने यूपीएससी के चक्रव्यूह को भेदना शुरू किया, तो उन्होंने लगातार तीन बड़ी परीक्षाओं में अपनी सफलता का लोहा मनवाया:
वर्ष 2019: उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ (UPSC CAPF) परीक्षा पास की और पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक 08 हासिल कर असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चुने गए।
वर्ष 2020: उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) क्रैक की और 542वीं रैंक हासिल की।
वर्ष 2021: वे अपनी पुरानी रैंक से संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा परीक्षा देकर सीधे 127वीं रैंक हासिल की।
इस शानदार रैंक की बदौलत उन्हें प्रतिष्ठित IFS का विकल्प भी मिल रहा था, लेकिन खाकी वर्दी के प्रति उनके जुनून और समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की चाहत के कारण उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना। उन्हें राजस्थान कैडर आवंटित किया गया।
राजस्थान में मजबूत पुलिसिंग
2022 में फील्ड पोस्टिंग मिलने के बाद से ही शरण गोपीनाथ कांबले ने राजस्थान पुलिस में अपनी एक सख्त, ईमानदार और संवेदनशील अधिकारी की छवि स्थापित की है। उनकी प्रमुख तैनातियां और साहसिक कार्य निम्नलिखित हैं:
अजमेर (पुष्कर) में शुरुआत: एक ट्रेनी अधिकारी के रूप में अपनी पहली ही पोस्टिंग में उन्होंने पुष्कर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध बजरी माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया और माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।
सांचौर (जालौर) में मादक पदार्थों पर प्रहार: इसके बाद वे सांचौर में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बने। यहां उन्होंने सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी और बड़े तस्करों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। इस शानदार कार्य के लिए उन्हें राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रतिष्ठित डीजीपी डिस्क सम्मान से नवाजा गया।
अलवर में प्रशासनिक कड़कपन: सांचौर के बाद उन्होंने अलवर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में भी बेहतरीन सेवाएं दीं।
वर्तमान कमान
वर्तमान में आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ डीग जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में पूरी मुस्तैदी से अपनी कमान संभाल रहे हैं। डीग और आसपास का इलाका (मेवात क्षेत्र) पिछले कुछ समय से ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों के लिए पूरे देश में बदनाम रहा है। एसपी शरण कांबले ने पदभार संभालते ही इन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
साइबर ठगों और उनके फर्जी बैंक खातों के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए उन्होंने ऑपरेशन एंटीवायरस और ऑपरेशन म्यूल हंटर जैसे बेहद आक्रामक अभियान चलाए हैं, जिसके तहत सैकड़ों साइबर अपराधियों को दबोचा गया है।
क्रिकेट और साइकिलिंग के शौकीन
इतने बड़े प्रशासनिक पद और व्यस्तता के बावजूद शरण कांबले आज भी जमीन से जुड़े और बेहद सरल व्यक्ति हैं। वे अपनी फिटनेस को बहुत महत्व देते हैं। जब भी उन्हें अपने व्यस्त शेड्यूल से समय मिलता है, वे क्रिकेट खेलना और साइकिलिंग करना बेहद पसंद करते हैं। उनका मानना है कि एक संतुलित जीवनशैली, कड़ा अनुशासन और मानसिक शांति ही आपको अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने की शक्ति देती है।
आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ के जीवन से 5 बड़े सूत्र
यदि आप आज संसाधनों की कमी का रोना रो रहे हैं, तो शरण कांबले की यह कहानी आपके स्टडी रूम की दीवार पर होनी चाहिए:
गरीबी या परिस्थितियां कभी बहाना नहीं बन सकतीं: सड़क किनारे मां के साथ सब्जी बेचने वाला और सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला लड़का अगर देश का IPS बन सकता है, तो आपकी मुश्किलें बड़ी नहीं हैं।
शॉर्टकट के बजाय बड़ा विज़न रखें: ₹20 लाख के कॉर्पोरेट पैकेज को ना करना यह सिखाता है कि जीवन में आत्म-संतोष और माता-पिता के सपनों की कीमत पैसों से कहीं बढ़कर होती है।
खुद पर निवेश करें (स्कॉलरशिप का सही इस्तेमाल): सीमित संसाधनों में भी कैसे रास्ता बनाया जाता है, यह शरण ने स्कॉलरशिप परीक्षा पास करके और ₹12,000 महीने में दिल्ली में तैयारी करके साबित किया।
निरंतरता ही असली चाबी है: CAPF में AIR 8, फिर CSE में 542वीं रैंक और अंत में 127वीं रैंक पाना यह दिखाता है कि जब तक आपकी मनचाही मंज़िल न मिल जाए, तब तक रुकना मना है।
अपनी जड़ों के प्रति वफादारी: एक मजदूर का बेटा होने के कारण वे आज भी जब आम जनता की जनसुनवाई करते हैं, तो उनके भीतर समाज के सबसे गरीब तबके के प्रति गहरी संवेदनशीलता झलकती है।
कल तक जो लड़का अपनी फटी जेब और खाली पेट के साथ सोलापुर की सड़कों पर सब्जी का ठेला लगाता था, आज वही शरण गोपीनाथ कांबले राजस्थान के जिलों में देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़े हैं। उनकी यह जांबाज कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सफलता कभी किसी की विरासत की मोहताज नहीं होती, यह सिर्फ और सिर्फ आपकी मेहनत, जिद और आपके पसीने का कर्ज चुकाती है।
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