समाज बदलने की सोच ने बनाया आईएएस, डॉ. मंजू का प्रशासनिक सेवा में आने का प्रेरणादायी सफर
कहते हैं कि अगर इरादों में नेकदिली और हौसलों में जान हो, तो कोई भी मुकाम हासिल करना नामुमकिन नहीं है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले की डॉ. मंजू की कहानी इसी जज्बे की एक जीती-जागती मिसाल है। एक सफल डॉक्टर (गायनोकोलॉजिस्ट) के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर, देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में 59वीं रैंक हासिल कर चित्तौड़गढ़ की जिला कलेक्टर बनने तक का उनका सफर हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहता है।
मेधावी छात्रा से दिल्ली के बड़े अस्पताल में डॉक्टर तक का सफर
डॉ. मंजू जाखड़ मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के अलसीसर की रहने वाली हैं। उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड किसी को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने न केवल MBBS किया, बल्कि स्त्री रोग विज्ञान में MS और DNB (ऑब्सट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) जैसी उच्च मेडिकल डिग्रियां भी हासिल कीं।
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित तेग बहादुर अस्पताल में एक चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं देना शुरू किया। एक डॉक्टर के तौर पर वह हर दिन दर्जनों महिलाओं का इलाज करती थीं, लेकिन उनके मन में कुछ और भी चल रहा था। उन्हें महसूस हुआ कि अस्पताल में इलाज करना तो जरूरी है ही, लेकिन अगर व्यवस्था में सुधार किया जाए, तो हजारों लोगों के जीवन को एक साथ बेहतर बनाया जा सकता है।
पहले ही प्रयास में 59वीं रैंक
डॉक्टर की नौकरी की व्यस्तता के बीच यूपीएससी की तैयारी करना आसान नहीं था। लेकिन मंजू जाखड़ ने हार नहीं मानी। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई का संतुलन बनाया और 2016 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। उन्होंने पूरे भारत में 59वीं रैंक हासिल की, जो उनकी कड़ी मेहनत और स्पष्ट विजन का प्रमाण था।
डॉ. मंजू अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार को देती हैं। विशेषकर उनके ससुर भगवानाराम जाखड़, पति डॉ. सुरेश जाखड़ (शिशु रोग विशेषज्ञ) और उनके बड़े भाई अनिल श्योराण (जो स्वयं एक IAS अधिकारी हैं), उनके सबसे बड़े संबल रहे। एक डॉक्टर और एक बहू के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए आईएएस ऑफिसर बनना महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण है।
जब कलम और स्टेथोस्कोप एक साथ चले
राजस्थान कैडर मेंमंजू जाखड़ की पहली पोस्टिंग उदयपुर के लसाड़िया जैसे सुदूर आदिवासी इलाके में हुई। यहां उन्होंने प्रशासन का एक ऐसा चेहरा पेश किया, जिसकी चर्चा आज भी होती है।
भ्रष्टाचार पर प्रहार: उन्होंने देखा कि राशन डीलर अनपढ़ आदिवासियों के अंगूठे लगवाकर उन्हें आधा राशन ही दे रहे थे। उन्होंने तुरंत इस पर कार्रवाई की और पारदर्शी व्यवस्था लागू करवाई।
प्रशासक के रूप में डॉक्टर: जब आदिवासी इलाकों में डॉक्टरों की कमी महसूस हुई, तो डॉ. मंजू ने अपनी आईएएस की कुर्सी छोड़ी और स्वयं मरीजों का इलाज करने के लिए आगे आईं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक विशेष हेल्थ कैलेंडर तैयार किया।
सामाजिक जागरूकता: आदिवासियों के बीच शराब की लत को छुड़ाने के लिए उन्होंने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया, जिसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला।
केंद्र से लेकर जिला मुख्यालय तक
आईएएस डॉ. मंजू का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक है। उन्होंने उदयपुर में SDO (बड़गांव) और CEO (जिला परिषद) के रूप में काम किया। इसके अलावा, उन्होंने नई दिल्ली में केंद्र सरकार के फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
हाल ही में उन्हें चित्तौड़गढ़ की 51वीं जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी शैक्षणिक योग्यता उन्हें जटिल प्रशासनिक समस्याओं को वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाने में मदद करती है।
सम्मान और उपलब्धियां
उनकी समाज के प्रति निष्ठा और बेहतरीन प्रशासनिक कार्यक्षमता के कारण उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया गया। मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया था। यह मेडल उनके कौशल और सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
युवाओं और अभ्यर्थियों के लिए डॉ. मंजू जाखड़ के सबक
बदलाव के लिए कदम उठाएं: अगर आपको लगता है कि समाज में कुछ गलत हो रहा है, तो केवल शिकायत न करें, बल्कि उस सिस्टम का हिस्सा बनकर उसे सुधारने का साहस जुटाएं।
शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती: डॉ. मंजू ने अपनी मेडिकल की पढ़ाई को प्रशासन में हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। आपकी डिग्री चाहे कोई भी हो, वह समाज सेवा में काम आ सकती है।
पारिवारिक सहयोग का महत्व: सफलता में परिवार का साथ बहुत जरूरी है। एक-दूसरे के सपनों का सम्मान करना ही एक आदर्श परिवार की पहचान है।
संवेदनशीलता ही असली शक्ति है: एक अधिकारी तभी सफल है जब वह गरीब और वंचित वर्ग के दुख को अपना समझे।
डॉ. मंजू जाखड़ आज न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं। उन्होंने साबित किया है कि एक महिला अपनी योग्यता के दम पर चिकित्सा जगत की विशेषज्ञ भी बन सकती है और एक सख्त लेकिन संवेदनशील प्रशासक भी। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सेवा परम धर्म: केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
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