माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ आईएएस बने माधव भारद्वाज, पिता थे LBSNAA में कर्मचारी
कहते हैं कि जो लोग LBSNAA (लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी) की चौखट को बचपन से देखते हैं, उनकी आंखों में प्रशासनिक सेवा का सपना स्वाभाविक रूप से पलने लगता है। लेकिन उत्तराखंड के मसूरी के रहने वाले एक लड़के की कहानी इससे बिल्कुल उलट और बेहद दिलचस्प है।
उनके पिता उसी ऐतिहासिक LBSNAA परिसर में कार्यरत थे जहां देश के आईएएस अफसरों को ट्रेनिंग दी जाती है। बेटा बचपन से उस परिसर को देखता रहा, लेकिन उसकी आंखों में सिविल सेवा का नहीं, बल्कि कंप्यूटर कोडिंग और कॉर्पोरेट जगत का सपना था।
वह लड़का आगे चलकर देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों से पढ़ा, माइक्रोसॉफ्ट जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी में लाखों के पैकेज पर प्रोडक्ट मैनेजर बना। लेकिन फिर नियति ने ऐसी करवट बदली कि उसने कॉर्पोरेट की चकाचौंध को छोड़ दिया और दिन में ऑफिस की नौकरी के साथ रात-रात भर जागकर पढ़ाई की।
सिर्फ 3 नंबर की मामूली चूक से पहला प्रयास असफल होने के बाद, उसने अगले ही हफ्ते ऐसी बाजी पलटी कि आज वह खुद उसी लबासना से ट्रेनिंग लेकर देश का आईएएस (IAS) अधिकारी बन चुका है। यह अद्भुत कहानी है वर्ष 2023 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस माधव भारद्वाज की। आइए जानते हैं माइक्रोसॉफ्ट के दफ्तर से निकलकर प्रशासनिक शीर्ष तक पहुंचने वाले उनके इस शानदार और अनुशासित सफर को।
LBSNAA के आंगन में बीता बचपन
माधव भारद्वाज मूल रूप से उत्तराखंड के मसूरी के रहने वाले हैं। उनके जीवन का सबसे खूबसूरत संयोग यह है कि उनके पिता उसी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) में काम करते थे, जहां आज माधव खुद आईएएस की ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। पिता के वहां कार्यरत होने के कारण माधव का बचपन उसी प्रशासनिक माहौल, अफसरों की चहल-पहल और उस ऐतिहासिक परिसर के इर्द-गिर्द बीता।
हालांकि, शुरुआत में माधव का रुख सिविल सेवा की तरफ नहीं था। वे टेक्नोलॉजी की दुनिया में जाना चाहते थे। स्कूलिंग के बाद उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर देश के प्रतिष्ठित MNNIT, प्रयागराज (मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में दाखिला लिया और कंप्यूटर साइंस में बी.टेक की डिग्री पूरी की।
IIT-IIM का सफर और माइक्रोसॉफ्ट में प्रोडक्ट मैनेजर
बी.टेक करने के बाद माधव यहीं नहीं रुके। उन्होंने देश की सबसे कठिन मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षा (CAT) को क्रैक किया और देश के नंबर वन बिजनेस स्कूल आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की।
इस शानदार शैक्षणिक बैकग्राउंड के बाद दुनिया की दिग्गज मल्टीनेशनल कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें अपने यहां प्रोडक्ट मैनेजर के बेहद ऊंचे पैकेज वाले पद पर नियुक्त किया। मुंबई-बेंगलुरु जैसे महानगरों की आलीशान जिंदगी और एक बेहद सुरक्षित व चकाचौंध भरा करियर उनके सामने था। सब कुछ बेहद शानदार चल रहा था, लेकिन साल 2020 में आई कोरोना महामारी ने उनके जीवन की दिशा को पूरी तरह बदल दिया।
वर्क फ्रॉम होम के दौरान जागा आईएएस बनने का सपना
साल 2020 में जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन लगा और कोरोना के कारण कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम दे दिया, तो माधव को आत्ममंथन करने का समय मिला। घर पर रहकर काम करते हुए उनके मन में अचानक समाज के लिए कुछ बड़ा करने और उस प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनने की इच्छा जागी, जिसे वे बचपन में अपने पिता के दफ्तर (लबासना) में देखा करते थे।
उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की बेहद व्यस्त कॉर्पोरेट नौकरी के साथ ही यूपीएससी (UPSC) की तैयारी का एक बेहद कठिन फैसला लिया। उनका डेली रूटीन किसी तपस्या से कम नहीं था।
माधव दिन के समय पूरी ईमानदारी से माइक्रोसॉफ्ट के लिए लॉगिन करते थे और ऑफिस का काम निपटाते थे। इसके बाद रात को जब दुनिया सोती थी, तब वे 4 से 5 घंटे की गहरी और अनुशासित पढ़ाई करते थे। वीकेंड (शनिवार-रविवार) और त्योहारों की छुट्टियों में जहां लोग आराम करते हैं, माधव 10 से 12 घंटे किताबों के साथ बिताते थे।
महज़ 3 नंबर की करारी चूक
माधव ने अपने पहले ही प्रयास में दिन-रात एक कर दिए। वे परीक्षा के दो चरणों को पार करते हुए इंटरव्यू तक पहुंचे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वे पहले ही प्रयास में लिस्ट में आ जाएंगे। लेकिन जब फाइनल रिजल्ट आया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। माधव महज़ 3 अंकों के मामूली अंतर से फाइनल सिलेक्शन से चूक गए।
मंज़िल के इतने करीब आकर केवल 3 नंबर से रह जाना किसी को भी अवसाद में डाल सकता है। माधव को भी थोड़ा झटका लगा, लेकिन रोने या हताश होने का समय ही नहीं था, क्योंकि महज़ एक हफ्ते बाद ही उनके दूसरे प्रयास की प्रारंभिक परीक्षा थी।
माधव ने एक सच्चे एडमिनिस्ट्रेटर की तरह मानसिक मजबूती दिखाई। उन्होंने महज़ एक हफ्ते पहले मिली अपनी उस ताज़ा असफलता के दर्द को अपने दिमाग से पूरी तरह डिलीट कर दिया और अपना पूरा फोकस आने वाले एग्जाम पर लगा दिया।
परीक्षा के आखिरी दिनों में उन्होंने 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई की। उनकी यह कड़ी एकाग्रता रंग लाई और अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने 536वीं रैंक हासिल कर सीधे आईएएस का टैग अपने नाम कर लिया।
राजस्थान कैडर और वर्तमान प्रशासनिक कमान
आईएएस बनने के बाद माधव भारद्वाज को 2023 बैच के तहत राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। LBSNAA से अपनी शुरुआती ट्रेनिंग और झीलों की नगरी उदयपुर में बतौर असिस्टेंट कलेक्टर (अंडर ट्रेनिंग) अपनी फील्ड ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी प्रशासनिक पारी बेहद मजबूती से आगे बढ़ रही है।
अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और तकनीकी व प्रशासनिक सूझबूझ के कारण आईएएस माधव भारद्वाज वर्तमान में राजस्थान के अलवर जिले में उपखंड अधिकारी और मजिस्ट्रेट (SDO/SDM) के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं, जहां वे 26 जुलाई 2025 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
फरवरी 2026 में माधव भारद्वाज सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में आए, जब उन्होंने गुजरात कैडर की होनहार आईएएस अधिकारी अदिति वार्ष्णेय के साथ बेहद सादगीपूर्ण तरीके से कोर्ट मैरिज की। इस प्रशासनिक जोड़े की सादगी ने युवाओं के बीच एक बेहतरीन संदेश दिया।
आईएएस माधव भारद्वाज के जीवन से एस्पिरेंट्स के लिए 4 सबसे बड़े सबक
कल तक जो माधव भारद्वाज कंप्यूटर स्क्रीन्स पर माइक्रोसॉफ्ट के कोड्स और प्रोडक्ट्स को मैनेज कर रहे थे, आज वे अलवर की धरती पर (SDM के रूप में) ग्राउंड जीरो पर उतरकर आम जनता की समस्याओं और सरकारी नीतियों को मैनेज कर रहे हैं।
जिस लबासना परिसर में उनके पिता एक कर्मचारी के रूप में काम करते थे, आज उसी परिसर से उनका बेटा एक गौरवशाली आईएएस अफसर बनकर बाहर निकला है, जो उनके माता-पिता के लिए जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
आईएएस माधव भारद्वाज का यह सफर देश के हर उस वर्किंग प्रोफेशनल और अभ्यर्थी के लिए एक जलती हुई मशाल है जो समय की कमी का रोना रोते हैं। यह कहानी गवाह है कि वक्त कम हो या परिस्थितियां कठिन, अगर आपके इरादों में अटूट निरंतरता और जिद है, तो आप किसी भी चकाचौंध को पीछे छोड़कर अपने हिस्से का इतिहास खुद लिख सकते हैं।
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